राघव चड्ढा का बड़ा आरोप, मतदाता सूची में नाम ‘स्थानांतरित’!

पंजाब की मसौदा मतदाता सूची में राघव चड्ढा का नाम ‘स्थानांतरित’ दर्ज होने पर उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीतिक बदले का आरोप लगाया। चड्ढा ने इसे सामान्य गलती मानने से इनकार किया और कहा कि मतदाता सूची किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से नाम में बदलाव को लेकर जवाब मांगा।

Sep 03, 2026 - 10:48
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राघव चड्ढा का बड़ा आरोप, मतदाता सूची में नाम ‘स्थानांतरित’!

दि राइजिंग न्यूज़ | पंजाब | 03 सितंबर 2026

पंजाब की मसौदा मतदाता सूची में अपना नाम ‘स्थानांतरित’ दर्ज होने पर राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीतिक बदले का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनका मतदाता पंजीकरण मोहाली में है और वह पंजाब से मौजूदा सांसद हैं। चड्ढा ने इसे लिपिकीय गलती मानने से इनकार करते हुए पूछा कि उनका नाम स्थानांतरित किसके निर्देश पर किया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब की मतदाता सूची किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है।

मतदाता सूची में नाम ‘स्थानांतरित’ होने पर भड़के राघव चड्ढा

पंजाब की मसौदा मतदाता सूची में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम ‘स्थानांतरित’ के रूप में दर्ज किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए चड्ढा ने इस मामले पर पंजाब सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि उनका मतदाता पहचान पत्र मोहाली में पंजीकृत है और वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में उनका नाम स्थानांतरित दर्ज किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

यह महज लिपिकीय गलती नहीं

राघव चड्ढा ने अपने नाम को मतदाता सूची में स्थानांतरित बताए जाने को सामान्य प्रशासनिक गलती मानने से साफ इनकार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई का हिस्सा है। चड्ढा के मुताबिक, जब वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका मतदाता पंजीकरण मोहाली में है, तो फिर उनके नाम को स्थानांतरित किस आधार पर दर्ज किया गया। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

पंजाब की मतदाता सूची आम आदमी पार्टी की निजी संपत्ति नहीं

राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब की मसौदा मतदाता सूची किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि उनके नाम को स्थानांतरित किसने दर्ज किया और इस बदलाव का सत्यापन किस अधिकारी ने किया। चड्ढा ने यह भी पूछा कि इस प्रक्रिया को उच्च स्तर तक किसने आगे बढ़ाया। उनके अनुसार, इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।

मसौदा सूची में सुधार का अभी भी मौका

चड्ढा ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह अंतिम मतदाता सूची नहीं बल्कि मसौदा सूची है। मतदाताओं को अपने नाम और विवरण में सुधार के लिए दावा एवं आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि राहत की बात यह है कि अंतिम सूची अभी जारी नहीं हुई है। उनके अनुसार, अक्टूबर 2026 में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है।

चुनावी प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल

राघव चड्ढा ने मतदाता सूची तैयार करने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बूथ स्तर के अधिकारी से लेकर सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी तक अलग-अलग स्तरों पर अधिकारी इस प्रक्रिया से जुड़े होते हैं। उनके मुताबिक, सबसे ऊपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी की भूमिका होती है। इसलिए उनके नाम को स्थानांतरित दर्ज किए जाने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव का लगाया आरोप

चड्ढा ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में काम करने वाले अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि अधिकारियों को अपने स्थानांतरण, नियुक्ति और सेवा से जुड़े फैसलों को लेकर सरकार के प्रभाव की चिंता रहती है। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जाती है। हालांकि, ये सभी आरोप राघव चड्ढा की ओर से लगाए गए हैं।

आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद बढ़ी नाराजगी का दावा

राघव चड्ढा ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद से पार्टी नेतृत्व उनसे नाराज है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने और पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। चड्ढा ने यह भी दावा किया कि उनके अलावा पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी निशाना बनाया गया है।

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