राम मंदिर को मिला पहला बॉस! पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी
राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिलने जा रहा है। सेवानिवृत्त वायु मार्शल जितेंद्र मिश्रा को इस पद के लिए चुना गया है। वह तीन वर्षों तक मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे।
दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या | 02 सितंबर 2026
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को अब अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिलने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सेवानिवृत्त वायु मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बन गई है। उनकी नियुक्ति की औपचारिक घोषणा ट्रस्ट की ओर से की जाएगी। माना जा रहा है कि इस नियुक्ति का उद्देश्य मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक व्यवस्थित तथा मजबूत बनाना है।
तीन वर्ष तक संभालेंगे मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी
सेवानिवृत्त वायु मार्शल जितेंद्र मिश्रा नियुक्ति की तारीख से तीन वर्षों तक मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर रहेंगे। वह इसी वर्ष अप्रैल में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। लगभग 38 वर्षों तक वायुसेना में सेवा देने के बाद अब उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। उनकी नियुक्ति को ट्रस्ट के कामकाज में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर प्रशिक्षक और परीक्षण पायलट तक का अनुभव
जितेंद्र मिश्रा का सैन्य जीवन काफी लंबा और अनुभव से भरा रहा है। उन्होंने लड़ाकू विमान पायलट, युद्ध प्रशिक्षक और परीक्षण पायलट के रूप में सेवाएं दी हैं। उनके पास तीन हजार घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव बताया गया है। सैन्य सेवा के दौरान उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।
कारगिल युद्ध में भी निभा चुके हैं महत्वपूर्ण भूमिका
पूर्व वायु मार्शल जितेंद्र मिश्रा का नाम कारगिल युद्ध से भी जुड़ा रहा है। उन्होंने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा पिछले वर्ष हुए ऑपरेशन सिंदूर में भी उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। उनकी सैन्य सेवाओं के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।
देवरिया से है संबंध, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के रहे हैं छात्र
जितेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से संबंध रखते हैं। वह खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के छात्र रह चुके हैं। सैन्य क्षेत्र में लंबे अनुभव के साथ उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। अब राम मंदिर ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति के बाद उनसे मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की उम्मीद की जा रही है।
पांच हजार से अधिक लोगों ने किया था आवेदन
राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया था। जानकारी के अनुसार, इस पद के लिए पांच हजार पांच सौ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 18 उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना गया था। चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों से खान-पान, रहन-सहन और हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यताओं सहित कई विषयों पर सवाल पूछे गए थे।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी की क्या होगी जिम्मेदारी
राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को संभालना होगी। इसके साथ ही वित्तीय प्रबंधन और कानूनी मामलों की निगरानी भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल होगी। मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से चलाना और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
मंदिर की व्यवस्थाओं में बदलाव की बढ़ी थी मांग
राम मंदिर में इस वर्ष जून-जुलाई के दौरान चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था। घटना के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव की मांग तेज हुई थी। इसी बीच ट्रस्ट के स्तर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद बनाए जाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
पहले भी उठी थी मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने की मांग
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने की आवश्यकता जताई थी। हालांकि ट्रस्ट के भीतर इस पद को लेकर अलग-अलग राय भी सामने आई थी। कुछ लोगों का मत था कि मंदिर का संचालन संतों और धार्मिक प्रतिनिधियों के हाथों में ही रहना चाहिए। अब जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति से प्रशासनिक और धार्मिक व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती भी होगी।
तीन सदस्यीय समिति ने किया चयन
मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन के लिए ट्रस्ट की ओर से तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल थे। समिति ने उम्मीदवारों की योग्यता और उपयुक्तता सहित कई पहलुओं पर विचार किया। इसके बाद जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई है।
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