राम के बाण चलाते ही धू-धूकर जला रावण:खांडसा बाजार में दशहरे के दूसरे दिन लगा मेला, 15 हजार लोगों की उमड़ी भीड़
अयोध्या जिले के खांडसा बाजार में बुधवार को दशहरा के दूसरे दिन पारंपरिक मेले का आयोजन किया गया। मेले में अमानीगंज, खांडसा, बहादुरगंज, सैदपुर, कुमारगंज, अमरगंज समेत आसपास के गांवों से करीब 15 हजार लोग पहुंचे। लोगों ने मेले में जमकर खरीदारी की और विभिन्न दुकानों पर सामान लेने के साथ मेले का आनंद उठाया। शाम को आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रावण के पुतले के दहन के साथ ही पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। जानकारी के मुताबिक, खांडसा बाजार में दशहरा के दूसरे दिन मेला लगाने और रावण दहन की परंपरा करीब 40 वर्षों से चली आ रही है। हर वर्ष क्षेत्र के लोग इस आयोजन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। दशहरा के दूसरे दिन होने के कारण आसपास के कई गांवों के लोग परिवार के साथ मेले में पहुंचते हैं। मेले में बच्चों, युवाओं और महिलाओं की भी अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। दुकानों पर लोगों ने जरूरत के सामानों के साथ खिलौने और अन्य वस्तुओं की खरीदारी की। गौरतलब है कि जिले में दशहरा की शाम को दर्जनों स्थानों पर रावण दहन किया गया, जबकि खांडसा बाजार में बुधवार की शाम को यह आयोजन हुआ। रावण दहन के दौरान लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। जैसे ही प्रभु श्रीराम ने रावण पर बाण चलाया, पटाखों की तड़तड़ाहट के बीच रावण का पुतला धू-धू कर जलने लगा। कुछ ही देर में रावण का पुतला पूरी तरह जलकर राख हो गया। इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। आयोजन के दौरान लोगों ने कहा कि रावण ने अपने अहंकार और अत्याचार के बल पर तीनों लोकों में अपना प्रभाव स्थापित कर लिया था, लेकिन अंत में अधर्म का नाश हुआ और सत्य की विजय हुई। रावण दहन का संदेश यही है कि व्यक्ति चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, बुराई और अन्याय का अंत निश्चित है। प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलकर ही समाज में सत्य, धर्म और सद्भाव की स्थापना की जा सकती है।
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