सहारनपुर की गौशाला में गायों के लिए म्यूजिक सिस्टम लगाया:तनाव घटाने और दूध बढ़ाने के लिए किया गया अनोखा प्रयोग, पशुओं को मिलेगा सुकून
सहारनपुर में गायों का दूध बढ़ाने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया गया है। यहां नगर निगम की आत्मनिर्भर मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला को म्यूजिक सिस्टम से लैस किया गया है। मकसद है हल्का और मधुर संगीत बजाकर गायों को तनावमुक्त रखना, उनके स्वास्थ्य में सुधार करना और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करना। नगर निगम क्षेत्र के नवादा गांव में स्थित यह गौशाला पहले से ही अपने नवाचारों के लिए पहचान बना चुकी है। यहां गोबर, गोमूत्र और गायों के दूध से तैयार होने वाले उत्पादों के जरिए गौशाला का खर्च चलाया जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यहां का दौरा कर गौ उत्पादों की तारीफ कर चुके हैं। गौशाला को अपने उत्पादों और नवाचारों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिल चुका है। अब गौशाला प्रबंधन ने पशुओं को तनाव से दूर रखने के लिए संगीत का सहारा लिया है। गौशाला में सुबह और शाम दूध निकालने के दौरान मधुर संगीत बजाया जाता है। इसके अलावा दिन में भी कुछ-कुछ समय के अंतराल पर संगीत सुनाया जाता है, ताकि गायों को शांत माहौल मिल सके। पशु चिकित्सक एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप कुमार मिश्रा के मुताबिक, नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, करनाल समेत विभिन्न संस्थानों के शोध में शांत संगीत से पशुओं का तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। तनाव कम होने से पशुओं के शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन के स्राव और दूध उतरने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि कुछ शोधों में संगीत के प्रभाव से दूध उत्पादन में तीन प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है। डॉ. मिश्रा के अनुसार, गौशाला में यह प्रयोग पशुओं को स्वस्थ रखने, तनाव कम करने और दूध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। उनके मुताबिक, यह गौशाला आवारा पशुओं से भी प्रतिदिन 100 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन करती है। गौशाला का यह प्रयोग उन पशुपालकों के लिए भी उपयोगी विकल्प बन सकता है,जो अपने पशुओं को शांत और स्वस्थ रखने के साथ दूध उत्पादन बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि,संगीत का असर पशुओं की नस्ल,स्वास्थ्य,खानपान और देखभाल पर भी निर्भर करता है।
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