सहयोगी दलों को भरपूर सम्मान मिला:दो दिनों के दौरे में मजबूत गठबंधन का संदेश दे गए नितिन नवीन
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का दो दिनों का दौरा विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर खास रहा। उन्होंने वर्तमान पदाधिकारियों को सीख दी तो जनप्रतिनिधियों को जनता से जुड़ाव पर ही सकारात्मक परिणाम आने की नसीहत भी दी। पूर्व पदाधिकारियों और पूर्व जनप्रतिनिधियों से मिलकर उनके अनुभवों के आधार पर पार्टी की जमीनी हकीकत समझने की कोशिश की। प्रबुद्ध वर्ग के लोगों से दो घंटे तक संवाद कर मतदाताओं का मन टटोलने का प्रयास किया। इसी प्रबुद्ध वर्ग को यह समझाने का प्रयास भी किया कि मतदाता सूची को लेकर विपक्ष के दावे केवल अफवाह हैं। इन प्रयासों के बीच वह एनडीए के उत्तर प्रदेश के घटक दलों को सम्मान देना नहीं भूले। उन्हें भरपूरे सम्मान देकर 2027 के विधानसभा चुनाव में भी मजबूत गठबंधन का संदेश दे गए। नितिन नवीन के दो दिनी दौरे की शुरूआत 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के लिए आयोजित जनसभा से हुई। इस जनसभा में उनके संबोधन में आक्रामक तेवर नजर आया। इस मंच पर नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद थे लेकिन घटक दलों को सम्मान मिला। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद, अपना दल के विधानमंडल दल के नेता रामनिवास वर्मा व सुभासपा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर को न केवल मुख्य मंच पर जगह मिली बल्कि संबोधन का मौका भी दिया गया। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी उस वक्त पहुंचे, जब अंतिम संबोधन के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बोल चुके थे लेकिन जैसे ही जयंत आए, उन्हें बोलने का मौका दिया गया। डा. संजय निषाद के घर भी पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के मिनट-टू मिनट कार्यक्रम में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद के आवास जाने का कार्यक्रम शामिल नहीं था। लेकिन संजय निषाद के आग्रह पर राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरुवार की सुबह उनके घर पहुंचे। उनके परिवार से मिले और राजनीतिक हालातों पर चर्चा की। ऐसा करके राष्ट्रीय अध्यक्ष ने निषाद समाज में यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके नेता का पूरा सम्मान है और राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं उनको खास तवज्जो देते हैं। विधायकों की बैठक अलग करने के पीछे भी घटक दलों को खुश करने की रणनीति विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान भाजपा के कई नेता निषाद पार्टी व अपना दल के सिंबल पर चुनाव लड़े थे। जीतने के बाद कई बार ऐसी बातें आयीं कि जिस पार्टी से वे जीते हैं, उनके नेताओं को ही भरपूर तवज्जो नहीं मिल पाती। जब भी जनप्रतिनिधियों की बैठक होती तो वे भी साथ ही शामिल होते। लेकिन नितिन नवीन ने यह परंपरा तोड़ दी। उन्होंने भाजपा के जनप्रतिनिधियों की बैठक एक साथ और घटक दलों की एक साथ ली। घटक दलों के उन विधायकों को जब बुधवार की बैठक में नहीं जाने दिया गया, जो भाजपा का झंडा लगाते हैं तो उनमें चर्चा शुरू हो गई। उन्होंने इसका कारण जानने के लिए अपनी पार्टी प्रमुखों से बात की। इस बदलाव ने घटक दलों के प्रमुखों को खुश कर दिया है। विधायकों को यह संदेश दे दिया गया है कि टिकट के लिए भी उन्हें उन्हीं पार्टियों में चक्कर लगानी होगी। भाजपा से टिकट पाना आसान नहीं होगा।
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