स्टूडेंट्स ने प्रयोगशाला में उगाया ऑयस्टर मशरूम:जौनपुर में पूर्वांचल विवि के कुलपति को दिया, बैग में बिस्किट, नमकीन बनाएंगे
जौनपुर में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बीएससी एग्रीकल्चर के विद्यार्थियों ने बुधवार दोपहर 1 बजे कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह से उनके कार्यालय में मुलाकात की। विद्यार्थियों ने उन्हें खुद उगाया ताजा ऑयस्टर मशरूम भेंट किया। अब वे मशरूम से बिस्कुट, नमकीन और समोसा बनाने के प्रयोग करेंगे। विद्यार्थियों ने कुलपति को मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया, इस्तेमाल की गई तकनीक और अपने व्यावहारिक अनुभव बताए। कुलपति ने कहा कि कृषि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों को प्रयोग और व्यावहारिक गतिविधियों से सीखने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नए प्रयोग करने और उद्यम शुरू करने की भावना विकसित होती है। मशरूम उत्पादन में कम जगह और कम संसाधनों के साथ स्वरोजगार की संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल कर नए अवसर तलाशने को कहा। विद्यार्थियों ने बताया कि मशरूम उगाना कक्षा में सीखे ज्ञान को असल परिस्थितियों में इस्तेमाल करने का अनुभव रहा। इससे उन्हें उत्पादन तकनीक और कृषि आधारित कारोबार की संभावनाएं समझने का मौका मिला। मशरूम का उत्पादन विश्वविद्यालय परिसर के महर्षि पराशर कृषि विज्ञान संस्थान की प्रयोगशाला में किया गया। प्ल्यूरोटस सजोर-काजू और प्ल्यूरोटस फ्लोरिडा प्रजातियों के कुल 63 बैग तैयार किए गए। स्पॉनिंग के करीब 25 दिन बाद पहली बार मशरूम की कटाई की गई। डॉ. शुभम सिंह ने बताया कि मौसम के अनुसार सालभर मशरूम की अलग-अलग प्रजातियां उगाई जा सकती हैं। सर्दियों में बटन और ऑयस्टर मशरूम, जबकि गर्मियों में मिल्की और पैडी स्ट्रॉ मशरूम उगाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मशरूम में कैलरी कम और फाइबर व प्रोटीन भरपूर होता है। इसमें विटामिन बी-2, बी-3 और बी-5 के साथ पोटैशियम, सेलेनियम, जिंक और अन्य खनिज तत्व पाए जाते हैं। प्रति 100 ग्राम मशरूम में करीब 3 ग्राम प्रोटीन, 3.28 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 3 मिलीग्राम कैल्शियम होता है।
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