स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:कैसी इच्छाएं दुख देती हैं; 9 बातें ध्यान रखेंगे, तो मन शांत रहेगा
मन में रखने से सांसारिक इच्छाएं होती हैं, तो भय और दुख बढ़ते हैं। जबकि, परमात्मा को मन में बसाने से विश्वास, निर्भयता और संतोष बढ़ता है। इसलिए अपनी कल्पनाओं और स्मृतियों को ईश्वरमय बनाइए। जब मन में ईश्वर का निवास होगा, तब जीवन में अकेलेपन और अभाव का अनुभव नहीं रहेगा। कल्पनाओं और स्मृतियों से जुड़ी ये 9 बातें ध्यान रखेंगे, तो मन शांत रहेगा… 1. जब हम अपनी कल्पनाओं और स्मृतियों में परमात्मा को स्थान देते हैं, तब मन में शांति, संतोष और आनंद का अनुभव होता है। 2. ईश्वर के साथ होने का भाव, जीवन में एक गहरा आश्वासन और आत्मविश्वास पैदा करता है। 3. जब मन में ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास होता है, तब परिस्थितियां कैसी भी हों, हम भयभीत नहीं होते। 4. ईश्वर की समीपता का अनुभव होने पर हम समझते हैं कि हमारे जीवन में सबसे बड़ा धन परमात्मा का साथ ही है। 5. ईश्वर को पाने के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। वे हमारे हृदय में ही विद्यमान हैं। 6. बीती हुई घटनाओं को बार-बार याद करने के बजाय परमात्मा के नाम, गुण और कृपा का स्मरण करना चाहिए। 7. हमारी कल्पनाएं जैसी होंगी, हमारा मन भी वैसा ही बनेगा। इसलिए कल्पनाओं में ईश्वर को स्थान देना चाहिए। 8. ईश्वर पर विश्वास होने से कठिन समय में भी धैर्य बना रहता है और जीवन में निराशा नहीं आती। 9. हमारी सबसे बड़ी भूल यही है कि हम स्वयं को ईश्वर से अलग समझते हैं। वास्तविकता यह है कि परमात्मा हर पल हमारे निकट हैं। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर दिए गए फोटो पर क्लिक करें।
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