ट्रंप ने क्यों ठुकराया ईरान का युद्धविराम प्रस्ताव? सामने आई वजह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज के मुताबिक, ईरान बातचीत शुरू होने से पहले ही प्रतिबंधों में राहत, जमी हुई संपत्तियां जारी करने और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने जैसी रियायतें मांग रहा था। वहीं ईरान ने अपनी मांगों को अधिकार बताते हुए कहा है कि उचित कदम उठाए जाने पर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और बातचीत आगे बढ़ाने की संभावना बनी हुई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | ईरान | 28 सितंबर 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज के अनुसार, ईरान बातचीत शुरू होने से पहले ही प्रतिबंधों में राहत, जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने जैसी मांगें कर रहा था। वहीं ईरान ने इन शर्तों को अपने अधिकार बताते हुए कूटनीति का रास्ता खुला रखने की बात कही है।
ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव क्यों ठुकराया
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए ईरान की ओर से युद्धविराम और बातचीत का नया प्रस्ताव रखा गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान बातचीत शुरू करने से पहले ही कई बड़ी रियायतें चाहता था। वॉल्ट्ज के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, प्रतिबंधों में राहत देने और अपनी जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच देने जैसी मांगें रखी थीं। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन मांगों को बातचीत शुरू होने से पहले पूरा करने की शर्त रखी गई थी। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
ईरान की युद्धविराम योजना में क्या था
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अपने प्रस्ताव के बारे में जानकारी दी थी। प्रस्ताव के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी। इसके बदले अमेरिका से कुछ कदम उठाने की मांग की गई थी। ईरान की मांगों में जमी हुई संपत्तियों को जारी करना, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में राहत और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना शामिल था। ईरान का कहना है कि इन कदमों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जा सकता है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
अमेरिका को ईरान पर भरोसा क्यों नहीं
माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन को ईरान की ओर से किए गए वादों को लेकर भरोसे की कमी है। उनके अनुसार, पहले हुई बातचीत और समझौतों के अनुभव के बाद ट्रंप प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी नए समझौते से वास्तविक परिणाम सामने आएं। अमेरिकी पक्ष विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठोस आश्वासन चाहता है। वॉल्ट्ज ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन संघर्ष को अंततः किसी समझौते के जरिए समाप्त करना चाहता है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका बातचीत के साथ-साथ अन्य विकल्प भी खुले रखेगा। इस बयान से साफ है कि प्रस्ताव खारिज होने के बावजूद कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
ईरान ने अमेरिकी आरोपों को किया खारिज
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी राजदूत के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से रखी गई शर्तें अचानक सामने नहीं आई हैं और इन्हें ईरान अपने अधिकारों से जुड़ा विषय मानता है। अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिका की ओर से उचित कदम उठाए जाने पर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की संभावना बनी हुई है। अराघची ने कूटनीति को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन पिछले अनुभवों के कारण ईरान को अमेरिकी प्रशासन के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने को लेकर संदेह है। इसके बावजूद ईरान ने बातचीत के जरिए समाधान की संभावना खुली रखी है।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी बातचीत
ट्रंप द्वारा प्रस्ताव ठुकराए जाने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है। ट्रंप ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत दोबारा हो सकती है। क्षेत्रीय मध्यस्थ भी दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने के प्रयास कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष बातचीत के बजाय अप्रत्यक्ष बातचीत का रास्ता अपनाया जा सकता है। ऐसे में युद्धविराम प्रस्ताव अस्वीकार होने के बाद भी कूटनीतिक प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है। आगे की बातचीत में प्रतिबंधों, होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण रह सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है
होर्मुज जलडमरूमध्य मध्य पूर्व से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ईरान की ओर से इसे दोबारा खोलने को युद्धविराम और बातचीत की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इसी कारण इस मुद्दे का प्रभाव केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों तक सीमित नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच इस जलमार्ग को लेकर मतभेद जारी रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी नजर बनी हुई है। ईरान इसे अपने प्रस्ताव का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है, जबकि अमेरिका बातचीत से पहले ईरान की मांगों को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।
मुख्य बिंदु
- डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज किया।
- अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने प्रस्ताव खारिज होने की वजह बताई।
- ईरान ने बातचीत से पहले कई रियायतों की मांग की थी।
- मांगों में प्रतिबंधों में राहत और जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच शामिल थी।
- ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की भी बात कही।
- ईरान ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए अपनी मांगों को अधिकार बताया।
- दोनों देशों के बीच आगे अप्रत्यक्ष बातचीत की संभावना बनी हुई है।
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