14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामले, रेवंत रेड्डी सबसे आगे

सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट के मुताबिक 28 में से 14 राज्यों के मौजूदा मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी 89 मामलों के साथ सूची में सबसे ऊपर हैं। इसके अलावा कई सांसदों और विधायकों के खिलाफ भी गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। हालांकि किसी नेता के खिलाफ मामला दर्ज होना दोषसिद्धि नहीं है और अंतिम निर्णय न्यायालय करता है।

Aug 18, 2026 - 11:22
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14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामले, रेवंत रेड्डी सबसे आगे

दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 18 अगस्त 2026

सुप्रीम कोर्ट में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जल्द सुनवाई से जुड़ी कार्यवाही के दौरान देश के मौजूदा जनप्रतिनिधियों को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायालय की सहायता के लिए नियुक्त अधिवक्ता विजय हंसारिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि 28 राज्यों में से 14 राज्यों के मौजूदा मुख्यमंत्रियों से जुड़े आपराधिक मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ सबसे अधिक 89 मामले दर्ज बताए गए हैं।रिपोर्ट में अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों का विवरण दिया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना और अदालत से दोषी साबित होना अलग-अलग बातें हैं। किसी नेता के खिलाफ प्राथमिकी या मुकदमा दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि वह अपराध का दोषी सिद्ध हो चुका है। अंतिम निर्णय केवल न्यायालय के फैसले के बाद ही माना जाता है।

रेवंत रेड्डी के खिलाफ सबसे अधिक मामले

रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ कुल 89 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों में वह इस सूची में सबसे ऊपर हैं। उनके बाद पश्चिम बंगाल से जुड़े नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 मामले बताए गए हैं।कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार और आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ 19-19 मामले दर्ज बताए गए हैं। केरल के वी.डी. सतीसन के खिलाफ 18 मामले बताए गए हैं। इन आंकड़ों को देखते हुए जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मामलों की संख्या एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है।

इन नेताओं के खिलाफ भी दर्ज हैं मामले

रिपोर्ट में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ पांच मामले बताए गए हैं। महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस और हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ चार-चार मामले दर्ज बताए गए हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ दो मामले बताए गए हैं।इसके अलावा रिपोर्ट में सिक्किम के मुख्यमंत्री पी.एस. तमांग, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के खिलाफ एक-एक मामला दर्ज होने की बात कही गई है। इन सभी आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि मामला दर्ज होना दोषसिद्धि के समान नहीं है।

गंभीर आपराधिक मामलों में विधायकों की स्थिति

रिपोर्ट में केवल मुख्यमंत्रियों से जुड़े मामलों का ही उल्लेख नहीं है, बल्कि राज्यों के विधायकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों की स्थिति भी सामने रखी गई है। आंकड़ों के अनुसार गंभीर मामलों का सामना कर रहे विधायकों के अनुपात में पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर बताया गया है। वहां करीब 58 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।इसके बाद केरल का स्थान बताया गया है, जहां करीब 57 प्रतिशत विधायक ऐसे मामलों का सामना कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश में यह आंकड़ा करीब 56 प्रतिशत, तेलंगाना में 49 प्रतिशत तथा झारखंड और ओडिशा में करीब 45 प्रतिशत बताया गया है। ये आंकड़े राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों के आपराधिक मामलों को लेकर चल रही बहस को और गंभीर बनाते हैं।

गंभीर आपराधिक मामला किसे माना जाता है

गंभीर आपराधिक मामलों की श्रेणी में आम तौर पर ऐसे अपराध शामिल होते हैं जिनमें कानून के तहत पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो सकता है। इसमें हत्या, हत्या का प्रयास, बलात्कार, अपहरण और डकैती जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामले शामिल हो सकते हैं। हालांकि किसी मामले का गंभीर श्रेणी में होना भी यह साबित नहीं करता कि आरोपी व्यक्ति दोषी है।किसी भी आपराधिक मामले में आरोपों की जांच और सुनवाई न्यायालय के माध्यम से होती है। जब तक अदालत किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करती, तब तक उसे केवल दर्ज मामले के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। इसलिए जनप्रतिनिधियों से जुड़े इन आंकड़ों को संदर्भ के साथ समझना जरूरी है।

लोकसभा के कई सांसदों पर भी गंभीर मामले

रिपोर्ट में संसद के सदस्यों से जुड़े आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लोकसभा के 170 सांसदों यानी करीब 31 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। इससे संसद में मौजूद जनप्रतिनिधियों की पृष्ठभूमि को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।राज्यसभा के सदस्यों को लेकर भी आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक राज्यसभा के कुल 233 सदस्यों में से 75 सदस्यों यानी करीब 33 प्रतिशत के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। इनमें 40 सदस्य यानी करीब 18 प्रतिशत गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े बताए गए हैं।

नेताओं के खिलाफ मामले की जानकारी कैसे मिलेगी?

किसी नेता के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी हासिल करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम उसका चुनावी शपथपत्र है। चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार निर्वाचन आयोग के सामने शपथपत्र दाखिल करता है। इसमें उसकी संपत्ति, देनदारी, शिक्षा और उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी दी जाती है।आपराधिक मामलों से जुड़े विवरण में मामले की संख्या, संबंधित कानूनी धाराएं और मामले की स्थिति जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं। इसलिए किसी नेता के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी प्राप्त करने के लिए उसके चुनावी शपथपत्र को देखना उपयोगी होता है। हालांकि किसी पुराने शपथपत्र की जानकारी और वर्तमान स्थिति में अंतर हो सकता है।

निर्वाचन आयोग के अभिलेख भी महत्वपूर्ण

निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से जुड़े चुनावी शपथपत्र उपलब्ध रहते हैं। मतदाता इन शपथपत्रों के माध्यम से उम्मीदवार के खिलाफ घोषित आपराधिक मामलों की जानकारी हासिल कर सकते हैं। चुनाव के समय उम्मीदवारों द्वारा दी गई जानकारी को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण आधिकारिक स्रोत है।इसके अलावा लोकतांत्रिक सुधारों से जुड़े संगठन भी चुनावी शपथपत्रों का विश्लेषण करते हैं। ऐसे विश्लेषणों में सांसदों और विधायकों के खिलाफ घोषित आपराधिक मामलों से जुड़े आंकड़े सामने रखे जाते हैं। हालांकि किसी भी महत्वपूर्ण समाचार के लिए मूल शपथपत्र और आधिकारिक अभिलेखों से आंकड़ों का मिलान करना जरूरी है।

केवल मामलों की संख्या देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं

किसी नेता के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या अपने आप में पूरी तस्वीर नहीं बताती। यह देखना भी जरूरी है कि मामले किन कानूनी धाराओं के तहत दर्ज हैं, वे किस चरण में हैं और संबंधित न्यायालय में उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। कई मामलों में जांच चल रही हो सकती है, जबकि कुछ मामले न्यायालय में लंबित हो सकते हैं।इसके साथ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि चुनावी शपथपत्र उम्मीदवार द्वारा दी गई घोषणा होती है। समय के साथ किसी मामले में आरोप हट सकते हैं, मामले की स्थिति बदल सकती है या न्यायालय से कोई निर्णय आ सकता है। इसलिए किसी नेता के खिलाफ वर्तमान स्थिति जानने के लिए नवीनतम आधिकारिक अभिलेखों की जांच आवश्यक है।

जनप्रतिनिधियों के लंबित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की नजर

सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जल्द सुनवाई का विषय लंबे समय से न्यायपालिका के सामने रहा है। जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट कई बार चिंता जता चुका है। ऐसे मामलों के शीघ्र निपटारे से न्याय प्रक्रिया को गति देने के साथ राजनीतिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।हालांकि, आपराधिक मामलों का लंबित होना और किसी व्यक्ति का दोषी होना अलग-अलग विषय हैं। लोकतंत्र में मतदाताओं के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के खिलाफ कौन-कौन से मामले लंबित हैं। चुनावी शपथपत्र और न्यायालय के अभिलेख मतदाताओं को उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अधिक सूचित निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • रिपोर्ट के अनुसार 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से जुड़े आपराधिक मामले दर्ज हैं।

  • तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले बताए गए हैं।

  • पश्चिम बंगाल से जुड़े नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 मामले बताए गए हैं।

  • डी.के. शिवकुमार और एन. चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ 19-19 मामले बताए गए हैं।

  • केरल के वी.डी. सतीसन के खिलाफ 18 मामले दर्ज बताए गए हैं।

  • झारखंड के हेमंत सोरेन के खिलाफ पांच मामले बताए गए हैं।

  • महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस और हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ चार-चार मामले बताए गए हैं।

  • बिहार के सम्राट चौधरी के खिलाफ दो मामले बताए गए हैं।

  • कई अन्य मुख्यमंत्रियों के खिलाफ एक-एक मामला दर्ज बताया गया है।

  • लोकसभा के 170 सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।

  • राज्यसभा के 40 सदस्यों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले बताए गए हैं।

  • किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना उसकी दोषसिद्धि नहीं माना जाता।

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