1987 से आज तक किसानों की समस्याएं बरकरार:फतेहपुर में बोले किसान नेता, बिजली कटौती पर भी जताई चिंता
फतेहपुर जिले के असोथर कस्बे के मंडी समिति में भारतीय किसान यूनियन (महात्मा टिकैत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल तालान रविवार के दिन किसानों की समस्याओं और उनकी बदहाल स्थिति पर खुलकर चर्चा की। शहर स्थित राष्ट्रीय महामंत्री रामदत्त मिश्रा के आवास पर सुबह 11 बजे पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि किसानों की समस्याएं और सालों से चल रही मांगों में कोई नयापन नहीं है। 1987 से लेकर आज तक वही समस्याएं बनीं हुई हैं। चाहे वह बिजली के बिल हों या फसल के उचित दाम, किसानों की लूट-खसोट और बिजली कटौती के मुद्दे भी जस के तस हैं। उत्पाद की कीमतों में भारी अंतर अनिल तालान ने चिंता जताई कि वर्ष 1967 को आधार वर्ष मानकर किसानों को उनके उत्पाद की कीमत मिलनी चाहिए। बाजार में अन्य रोजमर्रा की वस्तुएं और उत्पाद 300 से 450 गुना तक महंगे हो गए हैं, जबकि कृषि उत्पादों की कीमतें केवल 20 से 30 गुना ही बढ़ी हैं। राजनीतिक दलों पर निशाना अनिल ने सभी राजनीतिक दलों और सरकारों पर आरोप लगाया कि चुनाव के वक्त वे किसानों को लुभाने के लिए बड़े-बड़े वादे और दावे करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद किसानों को भूल जाते हैं और सिर्फ सत्ता हासिल करना उनका मकसद होता है। उन्होंने कुछ तथाकथित किसान संगठनों पर तंज कसते हुए कहा कि आज कुछ लोग मामूली राशि लेकर या बिना किसी बड़े संघर्ष के बड़े-बड़े संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाते हैं, जिनका पूरा संगठन एक गाड़ी में समा जाता है। यह किसानों के साथ एक बड़ा छलावा और शोषण है। महात्मा टिकैत और हरी टोपी का प्रभाव अनिल तालान ने कहा कि महात्मा टिकैत के संघर्ष और हरी टोपी में इतनी ताकत व तपस्या का आशीर्वाद है कि आज भी प्रशासन और शासन किसानों की आवाज सुनने के लिए मजबूर हो जाता है। साथ ही उन्होंने अपील की कि अन्नदाता (किसान) भगवान के समान है जो जीवनदायिनी वस्तुएं पैदा करता है, इसलिए किसानों के साथ किसी भी प्रकार का छल या धोखा नहीं किया जाना चाहिए।
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