अंधविश्वास के अंधेरे में उल्लुओं का शिकार, वन विभाग अलर्ट:तंत्र-मंत्र से धन मिलने की मिथक का फायदा उठा रहे शिकारी-तस्कर, बढ़ाई गई निगरानी

Nov 06, 2026 - 12:41
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अंधविश्वास के अंधेरे में उल्लुओं का शिकार, वन विभाग अलर्ट:तंत्र-मंत्र से धन मिलने की मिथक का फायदा उठा रहे शिकारी-तस्कर, बढ़ाई गई निगरानी
इटावा में दीपावली पर घर-घर मां लक्ष्मी की पूजा कर लोग सुख-समृद्धि और धन-वैभव की कामना करते हैं, लेकिन इसी त्योहार के आसपास अंधविश्वास के चलते एक बेजुबान पक्षी की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। मां लक्ष्मी की सवारी माने जाने वाले उल्लू को लेकर तंत्र-मंत्र और बलि से धन प्राप्त होने जैसी निराधार मान्यताएं शिकारियों और वन्यजीव तस्करों के लिए कमाई का जरिया बन जाती हैं। दुर्लभ प्रजाति के उल्लुओं की मांग और अवैध शिकार की आशंका को देखते हुए इटावा की राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी में वन विभाग अलर्ट हो गया है। चंबल के बीहड़ों से लेकर संभावित तस्करी के ठिकानों तक निगरानी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें सक्रिय कर दी गई हैं, ताकि त्योहार की आड़ में वन्यजीवों का शिकार और तस्करी न हो सके। बलि से धन मिलने की मान्यता का उठा रहे फायदा दीपावली के आसपास उल्लुओं को लेकर कई तरह की अंधविश्वास से जुड़ी मान्यताएं प्रचलित हो जाती हैं। कुछ लोग तंत्र-मंत्र और पूजा के नाम पर उल्लू की बलि देने से धन-संपत्ति मिलने का दावा करते हैं, जबकि इस धारणा का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इसी मिथक का फायदा उठाकर वन्यजीव शिकारी दुर्लभ प्रजातियों के उल्लुओं को पकड़ने और उनकी तस्करी में जुट जाते हैं। मोटी रकम मिलने के लालच में इन पक्षियों का अवैध शिकार किया जाता है। इससे उल्लुओं की आबादी और उनके प्राकृतिक आवास पर खतरा बढ़ता है। चंबल से महानगरों तक पहुंचाए जाते हैं उल्लू बताया जाता है कि दुर्लभ प्रजाति के उल्लुओं की मांग दिल्ली, मुंबई समेत देश के बड़े महानगरों तक रहती है। शिकारियों का नेटवर्क चंबल के बीहड़ों से इन पक्षियों को पकड़कर दूसरे शहरों तक पहुंचाने का काम करता है। पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों के मुताबिक, चंबल क्षेत्र में पहले भी उल्लुओं की तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं। अवैध कारोबार में मोटी कमाई के लालच के चलते दीपावली के आसपास शिकारियों की सक्रियता बढ़ने की आशंका रहती है। चंबल में पाई जाती है बड़ी प्रजाति का उल्लू उत्तर प्रदेश के इटावा में स्थित राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। चंबल घाटी में यूरेशियन ईगल आउल यानी ग्रेट हॉर्नड आउल जैसी बड़ी प्रजाति का उल्लू पाया जाता है। इसकी मौजूदगी इस क्षेत्र की जैव विविधता को महत्वपूर्ण बनाती है। दीपावली के दौरान अवैध शिकार और तस्करी की आशंका को देखते हुए सेंचुरी प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी शुरू कर दी है। बलि देने से धन मिलने की बात सिर्फ मिथक: महंत लक्ष्मण दास महंत लक्ष्मण दास का कहना है कि उल्लू को सबसे बुद्धिमान पक्षियों में माना जाता है और उसका हर अंग किसी न किसी रूप में महत्वपूर्ण है। सैकड़ों वर्षों से उल्लू की बलि देने से धन प्राप्त होने की मान्यता प्रचलित है, लेकिन वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं है। यह पूरी तरह मिथक है। इस अंधविश्वास के कारण बड़ी संख्या में वन्यजीवों का शिकार किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि लालच में कुछ संपन्न लोग भी ऐसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, हालांकि उनकी जानकारी में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। धार्मिक आस्था के नाम पर हत्या करना गलत: पुजारी पुजारी राकेश द्विवेदी बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं और अंधविश्वास के बीच अंतर समझना जरूरी है। मां लक्ष्मी की सवारी होने के कारण उल्लू का धार्मिक महत्व है, लेकिन उसकी बलि देकर धनवान बनने की सोच पूरी तरह निराधार है। धर्म और आस्था का अर्थ किसी जीव की हत्या करना नहीं है। लोगों को ऐसी मान्यताओं से दूर रहकर वन्यजीवों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के महासचिव डॉ. राजीव चौहान के मुताबिक, उल्लू पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह चूहों और अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में उल्लुओं का शिकार केवल एक पक्षी की जान लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रकृति का संतुलन भी प्रभावित होता है। उन्होंने लोगों से अंधविश्वास से दूर रहने और वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करने की अपील की। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान उल्लू की विभिन्न प्रजातियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इनका अवैध शिकार, पकड़ना और व्यापार करना अपराध है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद अंधविश्वास और लालच के चलते इन पक्षियों पर खतरा बना रहता है। संवेदनशील इलाकों में टीमें तैनात, संदिग्धों पर नजर क्षेत्रीय वन अधिकारी केके त्यागी ने बताया कि दीपावली को देखते हुए राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी के अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट किया गया है। संभावित स्थानों पर टीमें लगाई गई हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। विभाग का प्रयास है कि कोई भी शिकारी दुर्लभ प्रजाति के उल्लुओं को पकड़कर उनका अवैध कारोबार न कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकार या तस्करी का मामला सामने आने पर आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि दीपावली पर अंधविश्वास के नाम पर किसी वन्यजीव को नुकसान न पहुंचाएं। यदि कहीं उल्लुओं को पकड़ने, बेचने या उनके अवैध शिकार से जुड़ी गतिविधि दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को सूचना दें। त्योहार की खुशियों के बीच बेजुबान पक्षियों की जिंदगी बचाना भी समाज की जिम्मेदारी है।

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