बनबसा में शहीद स्मारक का लोकार्पण, धामी ने वीर जवानों को किया नमन
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनबसा में सैनिक स्मारक एवं झंडा पार्क का लोकार्पण किया। उन्होंने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह स्मारक उनके त्याग, साहस और बलिदान की याद को जीवित रखेगा। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा और राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित करेगा।
दि राइजिंग न्यूज़ | उत्तराखंड | 02 सितंबर 2026
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनबसा में सैनिक स्मारक एवं झंडा पार्क का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्मारक वीर सैनिकों के साहस, त्याग और बलिदान की स्मृतियों को सदैव जीवित रखेगा। साथ ही यह आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा।
नेपाल-भारत सीमा पर शहीद स्मारक का लोकार्पण
भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे बनबसा क्षेत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सैनिक स्मारक एवं झंडा पार्क का विधिवत पूजा-अर्चना के साथ लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। एसएसबी जवानों के बिगुल वादन के बीच मुख्यमंत्री सहित उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को नमन किया।कार्यक्रम के दौरान सीमांत क्षेत्र में नवनिर्मित शहीद स्मारक का लोकार्पण करने के साथ ही विशाल राष्ट्रध्वज तिरंगा भी फहराया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र में शहीद स्मारक और विशाल तिरंगे का लोकार्पण प्रदेश और देश के लिए गौरव का विषय है। यह स्मारक उन वीर सैनिकों की बहादुरी, त्याग और बलिदान की यादों को हमेशा जीवित रखेगा, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा स्मारक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह स्मारक केवल शहीद सैनिकों की स्मृति को सम्मान देने वाला स्थल नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बनेगा। यहां आने वाले लोग यह जान सकेंगे कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों ने किन कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि वीर सैनिकों का साहस और समर्पण देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणादायक रहेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्मारक युवाओं को देश सेवा, त्याग और समर्पण की भावना से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का सेना और अर्धसैनिक बलों से लंबे समय से गहरा जुड़ाव रहा है। प्रदेश के अनेक परिवारों के सदस्य देश की सुरक्षा में योगदान दे रहे हैं और उत्तराखंड के जवान राष्ट्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों को मिल रही नई पहचान
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले सीमावर्ती क्षेत्रों को देश के अंतिम गांव या अंतिम क्षेत्र के रूप में देखा जाता था। अब इन्हें देश के पहले क्षेत्रों के रूप में पहचान देने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों का विकास और वहां रहने वाले लोगों की सुविधाएं सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।उन्होंने कहा कि सैनिकों, उनके परिवारों और वीर शहीदों की स्मृतियों को सम्मान देना सरकार की जिम्मेदारी है। सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य पर डटे रहते हैं। ऐसे में उनके त्याग और बलिदान को सम्मानित करने वाले स्मारक समाज और नई पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाते रहेंगे।
मुख्यमंत्री बोले- सैनिक का पुत्र होने के नाते भावुक हूं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वह स्वयं एक सैनिक के पुत्र हैं और इसलिए सैनिकों के सम्मान से जुड़े इस कार्य में सहभागी बनना उनके लिए भावुक और गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि सैनिकों का जीवन देश की सुरक्षा और सेवा के लिए समर्पित होता है। उनके बलिदान और परिवारों के त्याग को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।उन्होंने कहा कि सैनिकों के परिवार भी देश सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वीर नारियां और वीर माताएं अपने प्रियजनों को खोने के बाद भी राष्ट्र के प्रति सम्मान और गौरव की भावना बनाए रखती हैं। सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान तथा कल्याण के लिए लगातार कार्य करती रहेगी।
वीर नारियों और वीरता पदक विजेता का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीर नारियों और वीरता पदक विजेता को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। सम्मानित वीर नारियों में सरस्वती देवी, लक्ष्मी देवी, कमला देवी, खीमा देवी, माया चन्द, सरस्वती देवी, ललिता चन्द, गीता देवी और पिंकी रैसवाल शामिल रहीं। इन सभी ने देश की रक्षा में अपने पति के बलिदान को सहन किया है और उनके त्याग को कार्यक्रम में सम्मान दिया गया।इसके अलावा वीर माता लक्ष्मी देवी, माता स्वर्गीय नायक खीम सिंह तथा वीरता पदक विजेता सूबेदार गोपाल दत्त शर्मा को भी सम्मानित किया गया। सूबेदार गोपाल दत्त शर्मा को सेना पदक प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने सम्मानित वीर नारियों, वीर माताओं और पूर्व सैनिकों से संवाद कर उनका हाल जाना और उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
एसएसबी जवानों का भी बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने वीर नारियों और पूर्व सैनिकों से बातचीत की। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात सशस्त्र सीमा बल के जवानों से भी मुलाकात की और उनके साथ तस्वीर खिंचवाकर उनका उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा में सैनिकों और सुरक्षा बलों का योगदान सर्वोपरि है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, वीर नारियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान तथा कल्याण के लिए लगातार प्रतिबद्ध है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, सैन्य अधिकारियों, सेवानिवृत्त सैनिकों, वीर माताओं और वीर नारियों की मौजूदगी रही।
कार्यक्रम में ये अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिलाधिकारी मनीष कुमार, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल उमेद सिंह सेवानिवृत्त, सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट सुरेंद्र विक्रम सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त सैनिक, वीर माताएं और वीर नारियां भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। सभी ने शहीद स्मारक पर वीर जवानों के बलिदान को नमन किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे स्मारक देश के वीर सपूतों की गाथा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। नेपाल-भारत सीमा के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थापित स्मारक सैनिकों के त्याग और देशभक्ति की भावना को हमेशा जीवित रखने का कार्य करेगा।
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