ढाक की थाप- बंगाली धुन पर थिरकीं महिलाएं, VIDEO:गोरखपुर में सुहागिनों ने सिंदूर खेला रस्म किया, नम आंखों से मां दुर्गा को दी विदाई

Oct 21, 2026 - 15:26
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ढाक की थाप- बंगाली धुन पर थिरकीं महिलाएं, VIDEO:गोरखपुर में सुहागिनों ने सिंदूर खेला रस्म किया, नम आंखों से मां दुर्गा को दी विदाई
गोरखपुर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र दुर्गाबाड़ी में बुधवार को बंगाली रीति-रिवाज और परंपरा के अनुसार 'सिंदूर खेला' का भव्य और रंगारंग आयोजन किया गया। शारदीय नवरात्रि के पांच दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव के अंतिम दिन आयोजित इस खास रस्म में बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक बंगाली परिधानों में सजी-धजी शामिल हुईं। लाल-सफेद बॉर्डर वाली साड़ियों में पहुंचीं सुहागिनों ने सबसे पहले मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर उनके चरण स्पर्श किए और परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि व अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे के गालों और माथे पर सिंदूर लगाकर पर्व की बधाई दी और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। देखिए तस्वीरें… सुबह से ही उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ दुर्गाबाड़ी परिसर में सुबह से ही सिंदूर खेला की रस्म में हिस्सा लेने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। क्या बुजुर्ग और क्या युवा, हर उम्र की महिलाएं हाथ में पूजा की थाली, मिठाई और सिंदूर लिए परिसर में नजर आईं। पंडाल में अव्यवस्था न हो, इसके लिए महिलाओं ने बेहद अनुशासित ढंग से लंबी लाइनें लगाईं और शांतिपूर्वक अपनी बारी का इंतजार किया। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, दुर्गाबाड़ी का पूरा परिसर बंगाली संस्कृति, भक्ति भाव और सिंदूर के लाल रंग से पूरी तरह सराबोर हो गया। दुर्गाबाड़ी का माहौल पूरी तरह उत्सवमय रहा सिंदूर खेला के दौरान दुर्गाबाड़ी का माहौल पूरी तरह उत्सवमय नजर आया। पारंपरिक बंगाली गानों और ढोल-ढाक की गूंजती थाप पर महिलाओं ने जमकर डांस किया। एक-दूसरे को सिंदूर लगाने और फोटो-वीडियो खिंचवाने का सिलसिला दोपहर तक लगातार चलता रहा। महिलाओं के चेहरे पर जहां उत्सव का उल्लास और सिंदूर की रंगत छाई थी, वहीं मां की विदाई का भावुक पल भी साफ नजर आ रहा था। भावुक हुईं महिलाएं इस भावुक मौके पर महिलाओं ने कहा कि मां दुर्गा नवरात्रि के दौरान अपने मायके आती हैं और हम सब बेटियों-बहुओं की तरह उनके साथ यह उत्सव मनाते हैं। आज जब मां की विदाई का समय आया है, तो दिल बहुत दुखी और भारी है, ठीक वैसे ही जैसे किसी बेटी को उसके ससुराल विदा करते समय होता है। हालांकि, महिलाओं ने यह भी कहा कि इस बात का सुकून और तसल्ली है कि मां अगले वर्ष फिर इसी तरह अपार खुशियां, सुख-समृद्धि और उमंग लेकर हमारे बीच पधारेंगी। सिंदूर खेला की यह पावन रस्म पूरी होने के साथ ही दुर्गाबाड़ी में पिछले पांच दिनों से चल रहे भव्य दुर्गा पूजा महोत्सव का औपचारिक समापन हो गया। इसके बाद समिति के सदस्यों ने नम आंखों से जयकारों के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन की तैयारियां शुरू कर दीं।

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