धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर BJP क्यों चुप्पी साधे है:अखिलेश आक्रामक; बदले हुए राजनीतिक व्यवहार की वजह क्या है
बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के राम-कृष्ण वाले विवादित बयान पर अखिलेश यादव बहुत ज्यादा एग्रेसिव है। साधु-संत भी विरोध कर रहे हैं। जबकि, भाजपा इस पर एकदम चुप्पी साधे है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हिंदू और सनातन पर हुई किसी भी विवादित टिप्पणी पर भाजपा हमेशा बहुत एग्रेसिव रहती थी। जबकि, अखिलेश यादव और सपा उन बयानों पर बहुत ज्यादा बात नहीं करती थी। लेकिन, इस बार उल्टा हो रहा है। दोनों पार्टियों के इस ‘बदले हुए राजनीतिक व्यवहार’ की वजह डिकोड करेंगे, यूपी एक्सप्लेनर में… आमतौर पर भाजपा सनातन धर्म, हिंदू देवी-देवताओं या प्रतीकों के खिलाफ किसी भी टिप्पणी पर देशव्यापी आंदोलन खड़ा कर देती है। लेकिन, धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से उपजे विवाद पर भाजपा की वैसी पारंपरिक आक्रामकता या तीखा विरोध बिल्कुल ‘गायब’ है। इस मामले में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और प्रवक्ताओं की चुप्पी के पीछे 4 प्रमुख रणनीतिक और वैचारिक कारण हैं… 1. धीरेंद्र शास्त्री से वैचारिक समानता 2. धीरेंद्र शास्त्री सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं 2. धर्म से जुड़े व्यक्तियों के मामले में चुप रहना 4. पॉलिटिकल ट्रैप से खुद को दूर रखना अब अखिलेश यादव के आक्रामक होने के कारण समझ लेते हैं। राजनीतिक जानकार इसकी भी 4 बड़ी वजह बताते हैं… 1. भाजपा को उसी की पिच पर घेरना 2. 'सॉफ्ट हिंदुत्व' और 'सच्चे सनातनी' की छवि बनाना 3. कोर वोट बैंक (यादव समाज) लामबंद करना 4. वोट बैंक का दायरा बढ़ाना (रघुवंशी + यदुवंशी) ------------------------------------------- ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… मुलायम से मायावती तक बिना चुनाव लड़े CM बने: रणनीति या टोटका; अखिलेश क्यों नहीं लड़ रहे ‘हम मुख्यमंत्री तभी बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते हैं…’ ऐसा कहकर अखिलेश यादव ने 2027 यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के संकेत दिए हैं। जबकि, उन्होंने सीएम योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। आखिर इसके पीछे कोई रणनीति है या टोटका? अखिलेश चुनाव क्यों नहीं लड़ना चाहते? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…
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