केरलम कांग्रेस पदाधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट का अवमानना नोटिस:कहा- न्यायपालिका की स्वतंत्रता राजनीतिक सुविधा नहीं; CJI सूर्यकांत पर पोस्ट का मामला
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरलम कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया। CJI सूर्यकांत को निशाना बनाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट पर यह नोटिस जारी किया गया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं है। संविधान सर्वोच्च है और कोई व्यक्ति या राजनीतिक संगठन इससे ऊपर नहीं है। बेंच ने कहा कि फैसलों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल न्याय प्रशासन में डर पैदा करने के लिए नहीं हो सकता। कोर्ट ने मामले में वरिष्ठ वकील अरविंद दातार और सिद्धार्थ अग्रवाल को एमिकस क्यूरी नियुक्त करने की बात कही है। कोर्ट ने आगे कहा, “जहां न्याय प्रशासन स्थापित है, वहां कानून को अपना काम करना चाहिए।” बेंच ने यह भी कहा कि न्यायिक संयम को संस्थागत कमजोरी नहीं समझना चाहिए। कांग्रेस की ओर से बिना मंजूरी पोस्ट करने की दलील सुनवाई के दौरान केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह सामग्री पदाधिकारियों की मंजूरी के बिना अपलोड की गई थी। बाद में इसे हटा दिया गया। वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में बिना शर्त माफी भी मांगी गई है। जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि कोर्ट यह देखेगा कि माफी “कलम से आई है या दिल से।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह भी जांचेगा कि मामले में आपराधिक अवमानना लागू होती है या सिविल अवमानना। इसके लिए वरिष्ठ वकील अरविंद दातार और सिद्धार्थ अग्रवाल को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया जाएगा। कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से भी मामले में मदद मांगी है। 12 अक्टूबर को वायरल हुई थी पोस्ट केरलम कांग्रेस के आधिकारिक X अकाउंट से CJI के खिलाफ एक पोस्ट 12 अक्टूबर को की गई थी। पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी कड़ी आलोचना हुई। बाद में इसे डिलीट कर दिया गया। पार्टी ने इसके बाद कहा था कि पोस्ट के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को पद से हटा दिया गया है। KPCC अध्यक्ष सनी जोसेफ ने भी कहा था कि संबंधित व्यक्ति को पदभार से हटा दिया गया है। जोसेफ ने कहा था कि पोस्ट KPCC नेतृत्व की जानकारी, सहमति या सलाह के बिना की गई थी। उन्होंने साफ किया था कि कांग्रेस को न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर कोई असहमति नहीं है। शिकायत को 30 अक्टूबर को याचिका में बदला गया अधिवक्ता विनीत जिंदल ने 13 अक्टूबर को CJI को शिकायत भेजी थी। इस शिकायत को 30 अक्टूबर को रिट याचिका के रूप में दर्ज किया गया। शिकायत में अधिकारियों को यह पता लगाने का निर्देश देने की मांग की गई थी कि 12 अक्टूबर 2026 की शाम सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक प्रदर्शन और नारेबाजी बिना अनुमति हुई थी या नहीं। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी और अन्य राजनीतिक नेता शामिल हुए थे। शिकायत में यह भी पता लगाने की मांग की गई थी कि इससे वकीलों, पक्षकारों, न्यायिक अधिकारियों या कोर्ट कर्मचारियों की आवाजाही में कोई रुकावट आई थी या नहीं।
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