दुष्कर्म की शिकायत मारपीट में दर्ज, एसओ-दरोगा सस्पेंड:फतेहपुर में पीड़िता कोर्ट पहुंची, अवैध वसूली और गंभीर आरोपों की जांच में पुलिसकर्मियों की लापरवाही
फतेहपुर में दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में लापरवाही बरतना हथगांव थाना प्रभारी और विवेचक को भारी पड़ गया। पीड़िता की शिकायत पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करने के बजाय मामले को मारपीट की धाराओं में दर्ज करने के आरोप में एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने शुक्रवार को थाना प्रभारी अरुण चतुर्वेदी और उपनिरीक्षक अखिलेश यादव को निलंबित कर दिया। दोनों पर मामले में लीपापोती करने और आरोपी पक्ष से अवैध वसूली के आरोप भी लगे थे। कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में खलबली मच गई। मामला हथगांव थाने से जुड़ा है। आरोप है कि एक पीड़िता ने थाने में दुष्कर्म की शिकायत की थी। इसके बावजूद थाना प्रभारी अरुण चतुर्वेदी और मामले के विवेचक उपनिरीक्षक अखिलेश यादव ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मियों ने दुष्कर्म के मामले को मारपीट का मामला बताकर एफआईआर दर्ज कर दी। इतना ही नहीं, आरोपी पक्ष से कथित अवैध वसूली करने और मामले को कमजोर करने के आरोप भी लगाए गए। न्याय के लिए पीड़िता को खटखटाना पड़ा अदालत का दरवाजा पीड़िता का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने उसकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की और आरोपियों को बचाने का प्रयास किया। इसके बाद उसे न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। न्यायालय के आदेश के बाद मामले में दुष्कर्म से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे। जांच में लापरवाही सामने आने पर एसपी की कार्रवाई प्रकरण की शुरुआती जांच में थाना प्रभारी अरुण चतुर्वेदी और विवेचक अखिलेश यादव की कार्यशैली में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को गंभीर मामलों में शिकायतों की अनदेखी और विवेचना में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
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