JEE-मेन में 99.89 पर्सेंटाइल से शुरू हुआ हरजस का सफर:4 साल बाद राष्ट्रपति गोल्ड मेडल, IIT-BHU में प्रतीक और मेहुल ने भी जीता डायरेक्टर गोल्ड मेडल

Nov 01, 2026 - 06:17
0
JEE-मेन में 99.89 पर्सेंटाइल से शुरू हुआ हरजस का सफर:4 साल बाद राष्ट्रपति गोल्ड मेडल, IIT-BHU में प्रतीक और मेहुल ने भी जीता डायरेक्टर गोल्ड मेडल
मेहनत, परिवार का साथ और सही दिशा में पढ़ाई। इन तीन मंत्रों ने हिमाचल प्रदेश की हरजस कौर को आईआईटी बीएचयू की सबसे चमकदार मेधावियों में शामिल कर दिया। साल 2022 में जेईई मेन में 99.89 पर्सेंटाइल हासिल कर अपने राज्य में इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की टॉपर बनीं हरजस ने चार साल बाद 2026 में आईआईटी बीएचयू के 15वें दीक्षांत समारोह में कामयाबी का नया इतिहास रच दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की इस छात्रा को प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल समेत कुल 15 मेडल और पुरस्कार मिले। हरजस ने न सिर्फ अपनी शाखा में शीर्ष स्थान हासिल किया, बल्कि बीटेक की सभी शाखाओं में सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाली छात्रा भी बनीं। आईआईटी में सबसे बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी को दिया जाने वाला राष्ट्रपति मेडल हासिल कर उन्होंने अपनी मेहनत पर सफलता की मुहर लगा दी। परिवार बना ताकत, भाई ने भी निभाया अहम किरदार हरजस अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, भाई और शिक्षकों को देती हैं। उनके पिता दवा कारोबारी हैं और मेडिकल स्टोर चलाते हैं, जबकि मां शिक्षिका हैं और घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं। भाई अर्जुन सिंह भी पढ़ाई कर रहे हैं। हरजस के मुताबिक, माता-पिता ने बचपन से ही उनकी सफलता की नींव रखी। परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया और भाई उनके लिए मजबूत स्तंभ की तरह रहा। शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के भरोसे ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। प्रतीक ने सीखा- हमेशा कोई न कोई बेहतर होता है कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के छात्र प्रतीक त्रिपाठी को डायरेक्टर गोल्ड मेडल मिला। आईआईटी बीएचयू में पढ़ाई के दौरान उन्होंने तकनीकी ज्ञान के साथ एक अहम जीवन सीख भी हासिल की। उनका कहना है कि देशभर से आए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के बीच रहकर यह समझ आया कि हमेशा कोई न कोई हमसे बेहतर होता है और उससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। कटक में शुरुआती पढ़ाई करने वाले प्रतीक का परिवार बाद में रायपुर आ गया। उन्होंने राजकुमार कॉलेज और डीपीएस रायपुर से पढ़ाई की। आईआईटी बीएचयू में दाखिले के पीछे संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता और बेहतर प्लेसमेंट प्रमुख वजहें थीं। वाराणसी जैसे जीवंत शहर में पढ़ाई करने का अनुभव भी उनके लिए खास रहा। फिलहाल प्रतीक गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उनका लक्ष्य ऐसे नए और अनोखे सॉफ्टवेयर तैयार करना है, जो तकनीक की दुनिया में उनकी अलग पहचान बनाएं। प्रोफेसरों की सीख और पिता के मार्गदर्शन से मेहुल को गोल्ड सिविल इंजीनियरिंग के इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री छात्र लखादी मेहुल कुमार राजकुमार ने भी डायरेक्टर गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय प्रोफेसरों के मार्गदर्शन और पिता की सीख को दिया। प्रो. बासुराज भौमिक के मार्गदर्शन ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। मेहुल के पिता राजकुमार लखादिवे लातूर में प्रोफेसर हैं, जबकि मां मीनाक्षी लखादिवे स्टेट जीएसटी अधिकारी हैं। फिलहाल मेहुल डेलॉयट यूएसआई में एनालिस्ट हैं। अगले दो साल में यूपीएससी या एमपीएससी पास करना उनका लक्ष्य है। वहीं, 30 वर्ष की उम्र के बाद वे शोध के अपने बचपन के सपने को पूरा करना चाहते हैं। पहली बार मिला ग्रीन एनर्जी मेडल सौर ऊर्जा से कम नुकसान में उपयोगी बिजली बनाने की तकनीक विकसित करने वाले मध्य प्रदेश के प्रखर नेमा को पहली बार ग्रीन एनर्जी मेडल से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में अहम है। 2,048 विद्यार्थियों को मिली डिग्री आईआईटी बीएचयू के 15वें दीक्षांत समारोह में कुल 2,048 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 1,106 बीटेक, 385 इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री, 322 एमटेक और एमफार्मा, 182 पीएचडी, 39 एमएससी और 14 बीआर्क के विद्यार्थी शामिल हैं। समारोह में 62 मेधावियों को पदक दिए गए, जबकि कुल 124 पदक और पुरस्कार वितरित किए गए।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User