मुशर्रफ का गार्ड बना आतंकी, कश्मीर में ढेर हुआ हाशिम मूसा
जम्मू-कश्मीर के बडगाम में भारतीय सेना ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया। बताया गया है कि मूसा पाकिस्तानी सेना के विशेष सेवा समूह में 23 साल तक हवलदार रहा और 2006 से 2008 के बीच परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा में भी तैनात था। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद वह लश्कर से जुड़ा और जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों में उसकी भूमिका सामने आई।
दि राइजिंग न्यूज़ | जम्मू-कश्मीर | 30 सितंबर 2026
जम्मू-कश्मीर के बडगाम में भारतीय सेना के अभियान में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के मारे जाने की खबर है। बताया गया है कि वह पाकिस्तानी सेना के विशेष सेवा समूह में 23 वर्षों तक हवलदार के पद पर रहा था। वह वर्ष 2006 से 2008 के बीच तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा में भी तैनात रहा था। सेवानिवृत्ति के बाद उसके लश्कर से जुड़ने और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की बात सामने आई है।
बडगाम में भारतीय सेना ने मार गिराया
जम्मू-कश्मीर के बडगाम में बीती रात भारतीय सेना ने पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मुठभेड़ में मार गिराया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह पाकिस्तान का रहने वाला था और पाकिस्तानी सेना के विशेष सेवा समूह में लंबे समय तक काम कर चुका था। वर्ष 2023 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उसके लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ने की बात सामने आई। इसके बाद वह कथित तौर पर घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर पहुंचा था।
पाकिस्तानी सेना के विशेष सेवा समूह में 23 साल रहा
मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा पाकिस्तानी सेना के विशेष सेवा समूह की चौथी कमांडो यलगार बटालियन में तैनात रहा था। बताया गया है कि उसने पाकिस्तानी सेना में करीब 23 वर्षों तक हवलदार के पद पर सेवा दी। उसके सैन्य रिकॉर्ड के अनुसार वह कई अभियानों में शामिल रहा था। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उसका नाम जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर के आतंकियों से जुड़ गया।
परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा में भी था तैनात
रिपोर्ट के अनुसार, हाशिम मूसा वर्ष 2006 से 2008 के बीच पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा में तैनात रहा था। पाकिस्तानी सेना में अपनी सेवा के दौरान उसे विशेष अभियानों का अनुभव मिला था। वह आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी शामिल रहा। इसी सैन्य पृष्ठभूमि के कारण उसके बाद की आतंकी गतिविधियों को सुरक्षा एजेंसियों ने गंभीरता से देखा।
कई सैन्य अभियानों में शामिल होने का दावा
बताया गया है कि हाशिम मूसा वर्ष 2006 में बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी के खिलाफ अभियान का हिस्सा रहा था। इसके अलावा वर्ष 2011-12 में कुर्रम क्षेत्र और वर्ष 2014-15 में उत्तरी तथा दक्षिणी वजीरिस्तान में भी उसने अभियान में भाग लिया। वर्ष 2015-16 में खैबर क्षेत्र में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई में भी उसके शामिल होने की बात कही गई है। इन अभियानों के दौरान उसे सैन्य अनुभव हासिल हुआ।
पाकिस्तानी सेना ने दिए थे कई सम्मान
पाकिस्तानी सेना में सेवा के दौरान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को कई सैन्य सम्मानों से सम्मानित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें तमगा-ए-इस्तेगाल और तमगा-ए-आजम जैसे सम्मान शामिल बताए गए हैं। इससे पता चलता है कि सेना में उसके लंबे कार्यकाल के दौरान उसे विभिन्न अभियानों में सेवा के लिए मान्यता मिली थी। हालांकि, उसके बाद आतंकी संगठन से जुड़ने की जानकारी सामने आई।
संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी गया था सूडान
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2009 में मोहम्मद आसिफ पाकिस्तानी सेना की ओर से सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन का हिस्सा भी रहा था। इसके बाद उसने पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य अभियानों में भाग लिया। लंबे सैन्य अनुभव के बाद 31 मार्च 2023 को 42 वर्ष की उम्र में वह पाकिस्तानी सेना से सेवानिवृत्त हुआ। इसके बाद उसके लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ने की जानकारी सामने आई।
जम्मू-कश्मीर में लश्कर का कमांडर बनने का दावा
सेवानिवृत्ति के बाद मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के भारत में घुसपैठ करने और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, वह जम्मू-कश्मीर में संगठन की गतिविधियों में सक्रिय था और उसे क्षेत्र का प्रमुख कमांडर बताया गया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसका नाम जम्मू-कश्मीर में हुए कई आतंकी हमलों से भी जोड़ा गया है।
पुंछ और गुलमर्ग हमलों से भी जुड़ा नाम
मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा का नाम 21 दिसंबर 2023 को डेरा की गली में हुए आतंकी हमले से जोड़ा गया है। इसके अलावा अक्टूबर 2024 में गुलमर्ग में हुए आतंकी हमले में भी उसकी भूमिका होने का दावा किया गया है। 4 मई 2024 को पुंछ जिले में भारतीय वायुसेना के काफिले पर हुए हमले को भी उसके नेतृत्व से जोड़ा गया। इस हमले में एक भारतीय वायुसेना अधिकारी की मौत हुई थी और पांच लोग घायल हुए थे।
पाकिस्तान के अटक जिले से था परिवार
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मोहम्मद आसिफ का परिवार पाकिस्तान के अटक जिले के नसीराबाद क्षेत्र के ढोक मलियार गांव से जुड़ा था। वर्ष 2015 में वह अपनी पत्नी आबिदा परवीन और तीन बेटियों के साथ रावलपिंडी चला गया था। बाद में उसने पाकिस्तानी सेना में अपनी सेवा पूरी की। सेवानिवृत्ति के बाद उसके लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ने और भारत में घुसपैठ करने की जानकारी सामने आई।
बडगाम मुठभेड़ के बाद कई सवाल
बडगाम में हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद उसकी सैन्य पृष्ठभूमि और आतंकी संगठन से उसके जुड़ाव को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक व्यक्ति का लंबे समय तक पाकिस्तानी सेना के विशेष बल में रहना और बाद में आतंकी संगठन से जुड़ना इस मामले का प्रमुख पहलू है। सुरक्षा एजेंसियां उसके पुराने सैन्य रिकॉर्ड और जम्मू-कश्मीर में उसकी गतिविधियों के बीच संबंधों की भी जांच कर सकती हैं।
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