लखनऊ में दशलक्षण महापर्व श्रद्धापूर्वक संपन्न:उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म विशेष पूजा-अर्चना, भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक मनाया
लखनऊ में चल रहे दशलक्षण महापर्व के दसवें एवं अंतिम दिन शुक्रवार को शहर के सभी जैन मंदिरों में उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा-अर्चना बड़े भक्तिभाव के साथ की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान कर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की। आशियाना स्थित दिगंबर जैन मंदिर एवं धर्मशाला में उपाध्याय श्री विहेसंत सागर महाराज ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि मन, वचन और कर्म से विषय-वासनाओं का त्याग कर आत्मसंयम एवं पवित्रता को अपनाना ही उत्तम ब्रह्मचर्य है। उन्होंने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल विवाह न करना नहीं है, बल्कि यह विचारों की निर्मलता, इंद्रियों पर नियंत्रण और आचरण की शुद्धता का मार्ग है। बाहरी संयम के साथ-साथ मन के विचारों को पवित्र रखना और जीवन में सदाचार को अपनाना ही वास्तविक ब्रह्मचर्य है। धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने उपाध्याय श्री के मंगल प्रवचनों का लाभ लेते हुए आत्मसंयम, पवित्रता एवं सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वहीं दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन जैन धर्म के बारहवें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक भी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के बाद मोक्ष कल्याणक के प्रतीक स्वरूप लड्डू भगवान के चरणों में समर्पित किए गए। मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि अनंत अनंत चौदस तिथि जैन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और दशलक्षण महापर्व के दौरान यह विशेष धार्मिक साधना का दिन होता है। इस दिन बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी 24 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं। कई श्रद्धालु पूरे दस दिनों तक उपवास की साधना करते हैं, जबकि अनेक लोग तीन दिन या अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत-उपवास करते हैं। जो श्रद्धालु आज अपना उपवास पूर्ण करेंगे, उनका पारण का कार्यक्रम अगले दिन विभिन्न जैन मंदिरों में धार्मिक विधि-विधान एवं श्रद्धाभाव के साथ होगा।
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