राम मंदिर दान प्रकरण की चार्जशीट पर उठे सवाल:अमिताभ ठाकुर ने DGP से मांगी आगे की जांच, SIT ने 105 घटनाओं का किया था जिक्र

Sep 25, 2026 - 16:41
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राम मंदिर दान प्रकरण की चार्जशीट पर उठे सवाल:अमिताभ ठाकुर ने DGP से मांगी आगे की जांच, SIT ने 105 घटनाओं का किया था जिक्र
अयोध्या राम मंदिर दान प्रकरण में SIT की ओर से दाखिल आरोप-पत्र को लेकर आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के DGP को पत्र भेजकर मामले में आगे की विवेचना कराने की मांग की है। ठाकुर ने कहा कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और अंतिम आरोप-पत्र के दायरे में अंतर दिखाई देता है, जिसकी दोबारा पड़ताल जरूरी है। 70 से बढ़कर 105 घटनाओं का सामने आया जिक्र अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में मीडिया में सामने आए जांच संबंधी तथ्यों का हवाला दिया है। उनके अनुसार, प्रारंभिक SIT जांच में दान की नकदी से जुड़ी 70 घटनाओं के साथ गंभीर पर्यवेक्षीय चूकों को चिन्हित किया गया था। इसके बाद हुई जांच में कथित तौर पर 105 ऐसी घटनाओं का उल्लेख सामने आया, जिनमें नकदी को अनधिकृत रूप से हटाने या छिपाने की बात कही गई। जांच में काउंटिंग प्रक्रिया के दौरान ‘अन्य व्यक्तियों की सहायता’ किए जाने का भी उल्लेख बताया गया है। मामले की जांच के दौरान CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, बैंकिंग और वित्तीय रिकॉर्ड के साथ फॉरेंसिक ऑडिट जैसी सामग्री की जांच किए जाने की बात भी पत्र में कही गई है। जांच का दायरा बढ़ा, लेकिन आरोप-पत्र 8 लोगों तक सीमित ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब जांच के दौरान घटनाओं और संभावित जिम्मेदारियों से जुड़े तथ्य सामने आए, तो अंतिम आरोप-पत्र में केवल आठ व्यक्तियों को ही आरोपी बनाया गया। उनका कहना है कि इससे उन लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठते हैं, जिनकी जिम्मेदारी या भूमिका प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आई थी। उन्होंने संस्थागत और पर्यवेक्षीय स्तर पर जिम्मेदारी की भी जांच किए जाने की मांग की है। ठाकुर के मुताबिक, केवल आरोप-पत्र दाखिल हो जाने से जांच में सामने आए सभी पहलुओं का परीक्षण पूरा नहीं माना जाना चाहिए। BNSS की धारा 193(9) के तहत आगे की विवेचना की मांग अमिताभ ठाकुर ने DGP से BNSS की धारा 193(9) के तहत आगे की विवेचना कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि CCTV, वित्तीय दस्तावेज, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक ऑडिट से सामने आए तथ्यों के आधार पर छूटे हुए पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जांच के दौरान सामने आए सभी व्यक्तियों की भूमिका, पर्यवेक्षीय जिम्मेदारी और संस्थागत स्तर पर हुई संभावित चूकों की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल की जाए, ताकि मामले में जांच का पूरा दायरा स्पष्ट हो सके।

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