मऊ में MLC प्रत्याशी ने उठाए पुरानी पेंशन-मानदेय के मुद्दे:गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का 23 को होगा मतदान
मऊ में गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन-2026 के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। इस चुनाव में कुल 16 प्रत्याशी मैदान में हैं। वहीं, मऊ जिले के रहने वाले निर्दलीय उम्मीदवार अजीत कुमार सिंह ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिक्षकों की समस्याओं, पुरानी पेंशन, सेवा सुरक्षा और वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के मानदेय का मुद्दा उठाया। अजीत कुमार सिंह ने कहा कि वह पिछले 2 साल से गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के 17 जनपदों में लगातार विद्यालयों का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने और डोर-टू-डोर जनसंपर्क करने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक, निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 54,700 मतदाता हैं, जिनमें से करीब 44 हजार शिक्षक साथियों से उन्होंने संपर्क किया है। उन्होंने अपने जनसंपर्क अभियान को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि मदरसा शिक्षकों से भी सीधे संवाद किया गया है। मदरसा शिक्षकों के कैशलेस इलाज का उठाया मुद्दा निर्दलीय प्रत्याशी ने कहा कि मदरसा शिक्षकों को अब तक कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल पाई है, जबकि उन्हें ट्रेजरी के माध्यम से वेतन मिलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मदरसों में कार्यरत रसोइयों और अन्य विद्यालयों के शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज की व्यवस्था की जा रही है, तो मदरसा शिक्षकों को इससे वंचित क्यों रखा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 5 नवंबर तक मदरसा शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा जारी नहीं की गई, तो वह उनके अधिकारों के लिए लखनऊ स्थित हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल करेंगे। अजीत कुमार सिंह ने पुरानी पेंशन बहाली को शिक्षकों की प्रमुख मांग बताते हुए कहा कि पेंशन बुढ़ापे का सहारा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिका है, लेकिन शिक्षक निर्वाचन के प्रतिनिधि के रूप में वह राज्य सरकार पर दबाव बनाएंगे और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि सत्ता में चाहे कोई भी दल हो, शिक्षकों के हितों के लिए उससे सवाल पूछे जाएंगे और मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष किया जाएगा। वित्तविहीन शिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय की मांग
निर्दलीय प्रत्याशी ने वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि एलटी ग्रेड के शिक्षकों को 25 हजार रुपए और प्रवक्ताओं को 30 हजार रुपए प्रतिमाह सम्मानजनक मानदेय दिया जाए। उन्होंने कहा कि कई वित्तविहीन विद्यालयों में शिक्षक 15 से 20 सालों से पढ़ा रहे हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। स्कूल प्रबंधन अपने संसाधनों से वेतन देने का प्रयास करता है, लेकिन सरकारी सहायता मिलने और शिक्षकों को सीधे ट्रेजरी से वेतन दिए जाने पर उनकी स्थिति बेहतर हो सकती है। उन्होंने वित्तविहीन विद्यालयों से संबंधित पोर्टल नहीं खुलने की समस्या का भी जिक्र किया और कहा कि इस विषय को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
सेवा सुरक्षा और शिक्षकों के सम्मान को बताया प्राथमिकता
अजीत कुमार सिंह ने कहा कि उनकी प्राथमिकताओं में पुरानी पेंशन बहाली, शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय की व्यवस्था शामिल है। उन्होंने दावा किया कि शिक्षक किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं और चुनाव में अपने अधिकारों के मुद्दों पर फैसला करेंगे।
उन्होंने कहा कि वह पहली बार शिक्षक निर्वाचन का चुनाव लड़ रहे हैं। उनका दावा है कि इस चुनाव में मुकाबला केवल प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि शिक्षकों की समस्याओं और उनके अधिकारों को प्रभावी ढंग से उठाने के मुद्दे पर भी है। अब 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में मतदाता किस प्रत्याशी के पक्ष में अपना समर्थन देते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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