मऊ में पराली जलाने पर 15 हजार रुपए तक जुर्माना:एसएमएस के बिना धान काटने वाली कंबाइन सीज होगी
मऊ जिले में धान की कटाई तेजी से चल रही है। खेतों में फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए कृषि विभाग ने किसानों और कंबाइन हार्वेस्टर संचालकों को निर्देश दिए हैं। बिना स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) लगाए धान काटने वाली कंबाइन हार्वेस्टर को सीज किया जाएगा। कृषि उपनिदेशक प्रेम कुमार ठाकुर ने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वराशक्ति पर असर पड़ता है। कंबाइन से कटाई के बाद खेतों में पराली और अन्य फसल अवशेष बचते हैं। कुछ किसान इन्हें खेतों में जला देते हैं। इससे मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव भी नष्ट होते हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के नियमों के तहत पराली जलाने पर खेत के रकबे के अनुसार जुर्माना लगाया जा सकता है। दो एकड़ से कम जमीन पर पराली जलाने पर 2,500 रुपए, दो से पांच एकड़ तक 5,000 रुपए और पांच एकड़ से अधिक जमीन पर 15,000 रुपए तक जुर्माना है। किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके प्रबंधन की सलाह दी गई है। इसके लिए सुपर सीडर, जीरो टिल सीड ड्रिल और रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ का इस्तेमाल किया जा सकता है। पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए शासन के निर्देश पर ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान, लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी की संयुक्त समिति बनाई गई है। किसी ग्राम सभा में पराली जलाने की घटना सामने आने पर लेखपाल और ग्राम प्रधान को तुरंत तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी को सूचना देनी होगी।
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