निजी तस्वीरें वायरल होने पर घबराएं नहीं...पुलिस को बताएं:ब्लैकमेल होकर परेशान न हो, साइबर पोर्टल पर दर्ज कराएं शिकायत, ऑपरेशन डिजिटल कवच की एडवाइजरी

Oct 28, 2026 - 20:14
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निजी तस्वीरें वायरल होने पर घबराएं नहीं...पुलिस को बताएं:ब्लैकमेल होकर परेशान न हो, साइबर पोर्टल पर दर्ज कराएं शिकायत, ऑपरेशन डिजिटल कवच की एडवाइजरी
सोशल मीडिया पर निजी तस्वीरें या वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने वालों से घबराने की जरूरत नहीं है। पीड़ित पुलिस से शिकायत करने के साथ संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने की मांग भी कर सकते हैं। लखनऊ पुलिस ने ऑपरेशन डिजिटल कवच के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें निजी तस्वीरें लीक होने, मॉर्फ्ड फोटो के जरिए बदनाम करने और वीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल किए जाने की स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी गई है। एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि कई पीड़ित सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक प्रतिक्रिया और बदनामी के डर से शिकायत करने से बचते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित को घबराने या खुद को दोषी मानने की जरूरत नहीं है। पुलिस ने अपील की है कि निजी तस्वीरें या वीडियो वायरल करने की धमकी मिलने पर आरोपी की मांग पूरी करने के बजाय तत्काल शिकायत करें। स्क्रीनशॉट, चैट और लिंक सुरक्षित रखें पुलिस के मुताबिक, निजी तस्वीरें या वीडियो लीक होने पर सबसे पहले संबंधित पोस्ट, URL, सोशल मीडिया प्रोफाइल, स्क्रीनशॉट, चैट और धमकी भरे संदेशों को सुरक्षित रखें। आपत्तिजनक सामग्री को आगे साझा न करें। यदि कोई आरोपी तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर पैसे या अन्य अनुचित मांग करता है, तो उसकी मांग पूरी करने के बजाय पुलिस को सूचना दें। पीड़ित संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, वीडियो या अकाउंट को रिपोर्ट कर सामग्री हटाने का अनुरोध कर सकते हैं। साथ ही, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड बदलकर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करने की सलाह दी गई है। शिकायत नजदीकी थाने या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भी दर्ज कराई जा सकती है। साइबर पोर्टल पर ऐसे दर्ज करें शिकायत साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल "cybercrime.gov.in" (https://www.cybercrime.gov.in/?utm_source=chatgpt.com) पर ऑनलाइन दर्ज कराई जा सकती है। इसके लिए पोर्टल पर घटना के अनुसार साइबर अपराध की श्रेणी चुननी होगी। इसके बाद घटना का विवरण, तारीख, संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट या लिंक और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य दर्ज करने होंगे। शिकायत सबमिट करने के बाद मिलने वाला एक्नॉलेजमेंट नंबर या संदर्भ संख्या सुरक्षित रखना चाहिए। इससे उपलब्ध सुविधा के अनुसार शिकायत की स्थिति देखी जा सकती है। महिलाओं और बच्चों के कुछ मामलों में गुमनाम शिकायत का विकल्प पुलिस के मुताबिक, पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों से संबंधित कुछ निर्धारित श्रेणियों में 'Report Anonymously' का विकल्प उपलब्ध है। इसके लिए पोर्टल पर 'Women/Children Related Crime' श्रेणी में जाकर उपलब्ध होने पर गुमनाम शिकायत का विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा सभी प्रकार के साइबर अपराधों के लिए उपलब्ध नहीं है। गुमनाम सूचना देने और औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया अलग हो सकती है। जांच के लिए आगे अतिरिक्त जानकारी या औपचारिक शिकायत की जरूरत पड़ सकती है। निजी तस्वीरों का प्रसार रोकने में मिलेगी मदद वयस्कों की बिना सहमति साझा की जाने वाली निजी और यौन तस्वीरों या वीडियो के ऑनलाइन प्रसार को रोकने में "StopNCII.org" (https://stopncii.org/?utm_source=chatgpt.com) की मदद ली जा सकती है। यह निःशुल्क टूल संबंधित तस्वीर या वीडियो का डिजिटल फिंगरप्रिंट यानी हैश तैयार करता है। इसमें मूल तस्वीर या वीडियो वेबसाइट पर अपलोड नहीं होता। हैश के जरिए भाग लेने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अपनी सेवाओं पर मिलती-जुलती सामग्री की पहचान कर अपनी नीतियों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं। इसके लिए वेबसाइट पर 'Create Your Case' विकल्प चुनकर पात्रता संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिलने वाला केस नंबर सुरक्षित रखना चाहिए। यह टूल पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का विकल्प नहीं है। यदि संबंधित तस्वीर या वीडियो बनाए जाने के समय पीड़ित की उम्र 18 वर्ष से कम थी, तो "Take It Down" (https://takeitdown.ncmec.org/?utm_source=chatgpt.com) जैसे उपयुक्त टूल की मदद ली जा सकती है। ऐसी सामग्री को डाउनलोड करने, कॉपी करने या आगे साझा करने से बचना चाहिए और पुलिस को सूचना देनी चाहिए। तस्वीरें वायरल करने पर हो सकती है जेल निजी तस्वीरें या वीडियो बिना सहमति साझा करने, अश्लील सामग्री प्रसारित करने और ब्लैकमेल करने के मामलों में अपराध की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। - आईटी एक्ट की धारा 66E: किसी व्यक्ति के निजी अंगों की तस्वीर उसकी सहमति के बिना निजता का उल्लंघन करते हुए कैप्चर, प्रकाशित या प्रसारित करने पर अधिकतम 3 साल की जेल, 2 लाख रुपए तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। - आईटी एक्ट की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने पर पहली दोषसिद्धि में अधिकतम 3 साल की जेल और 5 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। - आईटी एक्ट की धारा 67A: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने पर पहली दोषसिद्धि में अधिकतम 5 साल की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है। - बीएनएस की धारा 77: निर्धारित परिस्थितियों में किसी महिला के निजी कृत्य की तस्वीर लेने या प्रसारित करने पर पहली दोषसिद्धि में 1 से 3 साल और दूसरी या बाद की दोषसिद्धि में 3 से 7 साल तक की जेल हो सकती है। जुर्माने का भी प्रावधान है। धमकी देने, ब्लैकमेल करने, जबरन वसूली या पीछा करने के मामलों में तथ्यों के अनुसार अन्य धाराएं भी लगाई जा सकती हैं। इन नंबरों पर लें मदद - 112: आपातकालीन पुलिस सहायता। - 1090: यूपी महिला पावर लाइन। - 1098: संकट में फंसे बच्चों की सहायता। - 1930: ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत। - cybercrime.gov.in: ऑनलाइन साइबर अपराध की शिकायत। - stopncii.org: पात्र वयस्कों की निजी तस्वीरों के ऑनलाइन प्रसार को रोकने में सहायता। - takeitdown.ncmec.org: पात्र नाबालिगों की तस्वीरों या वीडियो के प्रसार को रोकने में सहायता। निजी तस्वीरें लीक होने के मामले में केवल 1930 हेल्पलाइन पर निर्भर न रहें। संबंधित साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं या सीधे पुलिस से संपर्क करें। ऑपरेशन डिजिटल कवच के तहत पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि निजी तस्वीरें या वीडियो वायरल होने अथवा ब्लैकमेल किए जाने पर चुप न रहें। पीड़ित की गलती नहीं है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

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