PM मोदी ने फिर कहा- ‘सोना न खरीदें’, आखिर क्यों

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देशवासियों से जरूरत न होने पर सोना नहीं खरीदने की अपील की है। इसके पीछे सोने के बढ़ते आयात, विदेशी मुद्रा पर दबाव और चालू खाते के घाटे जैसी आर्थिक चिंताएं प्रमुख मानी जा रही हैं। मई 2026 में भी प्रधानमंत्री ने ऐसी अपील की थी, लेकिन सोने का आयात अब भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

Sep 01, 2026 - 13:49
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PM मोदी ने फिर कहा- ‘सोना न खरीदें’, आखिर क्यों

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 01 सितंबर 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देशवासियों से जरूरत न होने पर सोना नहीं खरीदने और अनावश्यक विदेश यात्रा से बचने की अपील की है। इसके पीछे बढ़ते सोने के आयात, विदेशी मुद्रा पर दबाव और चालू खाते के घाटे जैसी आर्थिक चिंताओं को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इससे पहले मई 2026 में भी प्रधानमंत्री ने एक वर्ष तक सोने के आभूषण नहीं खरीदने की अपील की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने फिर की सोना न खरीदने की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 सितंबर 2026 को सामाजिक माध्यम पर साझा संदेश के जरिए लोगों से जरूरत न होने पर सोना नहीं खरीदने की अपील की। उन्होंने लोगों से अनावश्यक विदेश यात्रा और विदेश में विवाह करने से भी बचने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री की यह अपील मई 2026 के बाद दूसरी बार सामने आई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि सरकार सोने की खरीद को लेकर बार-बार लोगों से अपील क्यों कर रही है।

सोने के बढ़ते आयात से बढ़ी चिंता

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है, जबकि घरेलू उत्पादन उसकी मांग के मुकाबले बहुत कम है। ऐसे में देश को अपनी जरूरत का अधिकांश सोना दूसरे देशों से मंगाना पड़ता है। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने के आयात पर करीब 72 अरब डॉलर खर्च होने का दावा किया गया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष के करीब 58 अरब डॉलर के मुकाबले काफी अधिक बताई गई है।सोने का आयात बढ़ने पर देश से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जाती है। सोना खरीदने के लिए आयातकों को मुख्य रूप से डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। सरकार के लिए यही वजह सोने के अनावश्यक आयात को नियंत्रित करने की कोशिश का आधार बन सकती है।

तेल और सोने के आयात का दोहरा दबाव

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भी बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी आने पर देश का आयात खर्च बढ़ जाता है। इसके साथ यदि सोने का आयात भी ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो विदेशी मुद्रा की जरूरत और बढ़ सकती है। ऐसे समय में सरकार आयात को नियंत्रित करने के लिए लोगों से गैर-जरूरी खरीदारी कम करने की अपील कर सकती है।मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा प्रभाव भारत के आयात खर्च पर पड़ता है। ऐसे में सोने और ऊर्जा दोनों के आयात पर दबाव रहने से बाहरी क्षेत्र की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, इन परिस्थितियों का वास्तविक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजार और आगे होने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।

चालू खाते के घाटे को लेकर भी चिंता

जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक हो जाता है तो बाहरी भुगतान की स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। सोने और तेल जैसे बड़े आयात इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। यदि सोने का आयात लगातार ऊंचा रहता है तो चालू खाते के घाटे पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। यही कारण है कि सरकार घरेलू मांग को संतुलित करने पर जोर दे सकती है।सोने की खरीद को केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। भारत में सोना बचत, विवाह, त्योहार और पारिवारिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसलिए लोगों से सोना न खरीदने की अपील सामान्य आर्थिक सलाह से अलग मानी जा रही है। सरकार की ओर से बार-बार ऐसा आग्रह किए जाने के पीछे विदेशी मुद्रा की बचत और आयात खर्च कम करने की कोशिश को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।

मई में भी प्रधानमंत्री ने की थी अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने 10 मई 2026 को हैदराबाद की एक सभा में लोगों से एक वर्ष तक सोने के आभूषण नहीं खरीदने का आग्रह किया था। इसके साथ उन्होंने अनावश्यक विदेश यात्रा से बचने, ईंधन की खपत कम करने और ऊर्जा की बचत करने जैसी बातें भी कही थीं। उन्होंने लोगों से देश में बने सामान को प्राथमिकता देने और विलासिता वाली वस्तुओं की खपत कम करने का आह्वान किया था।उस समय प्रधानमंत्री की अपील के बाद सोने के बाजार और आभूषण कारोबार को लेकर चर्चा तेज हुई थी। सरकार की आर्थिक नीतियों और सोने के आयात को लेकर भी कई तरह के अनुमान लगाए गए थे। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर बाद के महीनों में सोने के आयात की मात्रा में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हालांकि, केवल प्रधानमंत्री की अपील को इसका एकमात्र कारण मानना उचित नहीं होगा।

पिछली अपील का कितना असर हुआ

उपलब्ध जानकारी के अनुसार मई 2026 के बाद कुछ समय के दौरान सोने के आयात की मात्रा में कमी देखने को मिली थी। जनवरी में करीब 100 टन के स्तर से फरवरी में यह मात्रा लगभग 65 से 66 टन और मार्च में करीब 20 से 22 टन तक आने का दावा किया गया है। हालांकि, अलग-अलग महीनों के आंकड़ों में कई कारणों से बदलाव हो सकता है। इसलिए इन आंकड़ों को पूरे वर्ष की तस्वीर के रूप में देखना सही नहीं होगा।कुछ सर्वेक्षणों में लोगों के सोना खरीदने के फैसले पर प्रधानमंत्री की अपील के असर का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि कई लोगों ने सोने की खरीदारी टालने या कम करने पर विचार किया। इसके बावजूद पूरे वित्त वर्ष में सोने के आयात पर खर्च काफी ऊंचा रहा। इससे संकेत मिलता है कि अपील का कुछ असर होने के बावजूद भारत की सोने की मांग को पूरी तरह कम करना आसान नहीं है।

सोने की कीमत बढ़ना भी बड़ी चुनौती

सोने की कीमतों में तेजी रहने पर लोगों का व्यवहार दो तरह से प्रभावित हो सकता है। एक तरफ महंगा सोना होने के कारण कुछ लोग खरीदारी टाल सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ कई निवेशक इसे सुरक्षित निवेश मानकर और अधिक खरीदारी कर सकते हैं। भारत में सोने को लंबे समय से आर्थिक सुरक्षा के साधन के तौर पर देखा जाता है। यही वजह है कि ऊंची कीमत के बावजूद इसकी मांग पूरी तरह खत्म नहीं होती।त्योहार और विवाह का मौसम सोने की मांग को और बढ़ा सकता है। भारतीय परिवारों में विवाह के दौरान आभूषण खरीदने की परंपरा काफी मजबूत है। ऐसे में केवल अपील के जरिए सोने की मांग को लंबे समय तक कम रखना सरकार के लिए चुनौती हो सकता है। आने वाले महीनों में लोगों की खरीदारी और अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।

प्रधानमंत्री ने विदेश यात्रा और विदेश में विवाह से भी बचने को कहा

प्रधानमंत्री की ताजा अपील केवल सोने की खरीद तक सीमित नहीं है। उन्होंने लोगों से अनावश्यक विदेश यात्रा से बचने और विदेश में विवाह करने के बजाय देश में ही विवाह समारोह आयोजित करने का आग्रह किया है। विदेश यात्रा और विदेश में होने वाले बड़े खर्च से विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाती है। ऐसे खर्च को घरेलू अर्थव्यवस्था की ओर मोड़ने से देश के भीतर कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद की जा सकती है।विदेश में विवाह और पर्यटन पर होने वाला खर्च भी देश के भुगतान संतुलन से जुड़ा विषय है। यदि लोग घरेलू स्तर पर खर्च करते हैं तो इसका लाभ स्थानीय कारोबार, होटल, परिवहन और सेवा क्षेत्र को मिल सकता है। हालांकि, विदेश यात्रा या विवाह का निर्णय व्यक्तिगत पसंद और आर्थिक क्षमता से भी जुड़ा होता है। इसलिए प्रधानमंत्री की अपील को मुख्य रूप से आर्थिक बचत और घरेलू खर्च को बढ़ावा देने के संदेश के रूप में देखा जा सकता है।

आगे क्या कदम उठा सकती है सरकार

यदि सोने का आयात लगातार ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो सरकार आयात को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत कदमों पर विचार कर सकती है। इसमें कर व्यवस्था, आयात नियम या अन्य आर्थिक उपाय शामिल हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी नए कदम की घोषणा के बिना उसके बारे में निश्चित रूप से कहना उचित नहीं होगा। फिलहाल प्रधानमंत्री की अपील को लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।आने वाले त्योहारों और विवाह के मौसम में यह साफ होगा कि प्रधानमंत्री की दूसरी अपील का लोगों की खरीदारी पर कितना प्रभाव पड़ता है। यदि सोने की मांग में उल्लेखनीय कमी आती है तो इससे आयात खर्च और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं यदि मांग पहले की तरह बनी रहती है तो सरकार को अन्य नीतिगत उपायों पर ध्यान देना पड़ सकता है। इस पूरे मामले में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत, घरेलू मांग और आयात आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे।

अर्थव्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सोना

सोने का आयात भारत की अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। आयात बढ़ने पर देश के व्यापार और बाहरी भुगतान की स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर सोना भारतीय परिवारों की बचत और सामाजिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए सरकार के लिए मांग कम करना और लोगों की परंपरागत जरूरतों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।प्रधानमंत्री की बार-बार की गई अपील इसी आर्थिक चुनौती की ओर ध्यान खींचती है। सरकार चाहती है कि लोग अनावश्यक आयात वाली वस्तुओं पर खर्च कम करें और घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता दें। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव तभी स्पष्ट होगा जब आने वाले महीनों के आयात और खरीदारी के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल सोने की मांग और कीमतों पर बाजार की नजर बनी हुई है।

मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर जरूरत न होने पर सोना नहीं खरीदने की अपील की।
  • मई 2026 के बाद यह दूसरी ऐसी अपील बताई जा रही है।
  • सोने के बढ़ते आयात को विदेशी मुद्रा खर्च से जोड़कर देखा जा रहा है।
  • तेल और सोने के आयात से बाहरी भुगतान पर दबाव बढ़ने की चिंता है।
  • भारत में सोना विवाह, त्योहार और बचत से जुड़ा होने के कारण मांग कम करना चुनौतीपूर्ण है।
  • आने वाले त्योहार और विवाह के मौसम में प्रधानमंत्री की अपील के असर की परीक्षा होगी।

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