शहबाज के सामने पीएम मोदी का आतंकवाद पर बड़ा वार!
शंघाई सहयोग संगठन के 26वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वाली पूरी व्यवस्था को खत्म करने की अपील की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में पीएम मोदी ने बिना नाम लिए आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों को भी स्पष्ट संदेश दिय
दि राइजिंग न्यूज़ | शंघाई | 01 सितंबर 2026
शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वाली पूरी व्यवस्था को खत्म करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने सभी देशों से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की।
आतंकवाद के खिलाफ पीएम मोदी का कड़ा संदेश
शंघाई सहयोग संगठन के 26वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए सभी देशों से मिलकर कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती है और इससे निपटने के लिए केवल किसी घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है।प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था में धन उपलब्ध कराने वाले लोग, आतंकियों की भर्ती करने वाले तंत्र, कट्टरपंथ फैलाने वाले समूह और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने देने वाले लोग शामिल हैं। इस पूरी व्यवस्था के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
शहबाज शरीफ के सामने पाकिस्तान को लेकर दिया स्पष्ट संदेश
शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन देशों को कड़ा संदेश दिया जो आतंकवाद को अपनी नीतियों का माध्यम बनाते हैं या आतंकियों को समर्थन और सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी देश के लिए रणनीतिक साधन या संपत्ति नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में बढ़ावा देने वालों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका यह बयान भारत की लंबे समय से चली आ रही आतंकवाद के खिलाफ नीति को भी दर्शाता है।
आतंक की आर्थिक मदद रोकना जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक आतंकियों तक धन पहुंचाने वाली व्यवस्था को खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पूरी तरह सफल नहीं हो सकती।आतंकी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद उनके पूरे तंत्र को मजबूत करती है। इसी वजह से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ उसके आर्थिक स्रोतों पर भी रोक लगाना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने सभी देशों से आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क को खत्म करने के लिए सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
आतंकियों की भर्ती और कट्टरपंथ पर भी चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के लिए युवाओं की भर्ती और कट्टरपंथ फैलाने वाली गतिविधियों को भी गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का तंत्र केवल हथियारों और धन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे लोगों को प्रभावित करने और हिंसक विचारधारा की ओर ले जाने वाली व्यवस्था भी काम करती है।इस व्यवस्था को कमजोर करने के लिए आतंकवाद की विचारधारा के खिलाफ भी प्रभावी कदम उठाने होंगे। प्रधानमंत्री के मुताबिक आतंकियों की भर्ती रोकना और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले तंत्र को खत्म करना आतंकवाद के खिलाफ व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
आतंकवाद को पनाह देने वालों पर भी कार्रवाई की मांग
प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने देने वाले देशों और संगठनों को लेकर भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को किसी भी प्रकार का समर्थन या संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। आतंकियों को सुरक्षित स्थान मिलने से उनका नेटवर्क लगातार मजबूत होता है और वे दूसरे देशों में भी हिंसा फैलाने में सक्षम होते हैं।भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की मांग करता रहा है। शंघाई सहयोग संगठन के मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसी रुख को दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद से मुकाबले के लिए सभी देशों को साझा प्रयास करना होगा।
आतंकवाद किसी देश के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि आतंकवाद को किसी देश के रणनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र आतंकवाद को अपनी नीति का माध्यम बनाते हैं, उन्हें यह समझना होगा कि ऐसी नीति लंबे समय में किसी के हित में नहीं है।प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद और आतंकियों को मिलने वाले समर्थन के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में दिया गया यह बयान भारत की आतंकवाद के प्रति सख्त नीति को एक बार फिर सामने रखता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)