प्रेमानंद आश्रम में 4 दिन रहा लापता प्रधान:भाई से झगड़े के बाद छोड़ा था घर, घरवालों ने छिपाए रखी विवाद की बात

Nov 05, 2026 - 16:54
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प्रेमानंद आश्रम में 4 दिन रहा लापता प्रधान:भाई से झगड़े के बाद छोड़ा था घर, घरवालों ने छिपाए रखी विवाद की बात
प्रयागराज के थरवई क्षेत्र स्थित मनसैता गांव के लापता ग्राम प्रधान जानकी नाथ यादव चार दिन तक वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के आश्रम में छिपे रहे। भाई से झगड़े के बाद वह 29 अक्टूबर की रात घर से चुपचाप निकल गए थे। उस समय उन्होंने लुंगी और बनियान पहन रखी थी। पैदल ही कछार के रास्ते फाफामऊ पहुंचे और वहां नए कपड़े खरीदे। इसके बाद ट्रेन से लखनऊ होते हुए मथुरा पहुंचे और फिर वृंदावन चले गए। चार दिन तक परिवार से कोई संपर्क नहीं किया। बुधवार शाम नया मोबाइल और सिम खरीदने के बाद उन्होंने खुद ही अपने ठिकाने की जानकारी पुलिस को दी। बृहस्पतिवार को पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा किया। डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार के मुताबिक, प्रधान ने घर से निकलते ही रास्ते में अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर फेंक दिया था। इसके बाद वह लगातार चार दिन तक परिवार और परिचितों से दूर रहे। बुधवार शाम नया मोबाइल और सिम लेने के बाद सबसे पहले चाचा को फोन किया। फिर थरवई थाने के सीयूजी नंबर पर कॉल कर इंस्पेक्टर को वृंदावन में होने की जानकारी दी। इसके बाद प्रयागराज पुलिस की टीम वृंदावन पहुंची और बृहस्पतिवार को उन्हें लेकर प्रयागराज लौट आई। पूछताछ के बाद प्रधान को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। लुंगी-बनियान में पैदल पहुंचे फाफामऊ पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि जानकी नाथ यादव 29 अक्टूबर की रात भाई से झगड़े के बाद घर छोड़कर निकले थे। वह बिना किसी को बताए चुपचाप घर से बाहर चले गए। उस वक्त उन्होंने लुंगी और बनियान पहन रखी थी। घर से निकलने के बाद वह पैदल ही कछार के रास्ते फाफामऊ पहुंचे। यहां उन्होंने नए कपड़े खरीदे और फिर अगले दिन सुबह छह बजे गंगा-गोमती एक्सप्रेस पकड़कर लखनऊ चले गए। लखनऊ पहुंचने के बाद सुबह करीब 10:30 बजे जनरल बोगी में बैठकर आगरा पहुंचे। वहां से झेलम एक्सप्रेस पकड़कर मथुरा चले गए। मथुरा पहुंचने के बाद शाम को वृंदावन पहुंचे और प्रेमानंद महाराज के आश्रम में ठहर गए। अगले चार दिनों तक वह वहीं रहे। इस दौरान उन्होंने न तो घरवालों से संपर्क किया और न ही अपनी लोकेशन किसी परिचित को बताई। नया मोबाइल खरीदा, चाचा को फोन कर दी जानकारी डीसीपी के मुताबिक, बुधवार शाम जानकी नाथ ने नया मोबाइल फोन और सिम खरीदा। इसके बाद सबसे पहले अपने चाचा को फोन किया। फिर थरवई थाने के सीयूजी नंबर पर कॉल कर इंस्पेक्टर को बताया कि वह वृंदावन में हैं। उनकी सूचना मिलते ही प्रयागराज पुलिस सक्रिय हुई और एक टीम वृंदावन रवाना की गई। पुलिस टीम उन्हें लेकर बृहस्पतिवार को प्रयागराज पहुंची। यहां पूछताछ के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। परिवार ने पुलिस से छिपाई भाई से झगड़े की बात इस मामले में पुलिस अधिकारियों ने परिवार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूछताछ के दौरान कई बार बातचीत होने के बावजूद परिजनों ने भाई से झगड़े की बात नहीं बताई। खुद भाई छत्रपाल यादव ने भी इस संबंध में पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी, जबकि उन्होंने ही प्रधान के लापता होने के बाद अपहरण कर हत्या किए जाने की आशंका जताते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अब इस बात की भी जांच की जाएगी कि परिवार ने झगड़े की जानकारी क्यों छिपाई और भाई ने अपहरण व हत्या की आशंका जताते हुए एफआईआर क्यों दर्ज कराई। इस संबंध में छत्रपाल से भी पूछताछ की जाएगी। तलाश में लगाई गई थीं 13 पुलिस टीमें ग्राम प्रधान की तलाश के लिए पुलिस अधिकारियों ने कुल 13 टीमें गठित की थीं। इनमें पांच टीमें आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही थीं, जबकि तीन टीमें रिश्तेदारों और परिचितों के घर जाकर जानकारी जुटा रही थीं। सर्विलांस के लिए तीन टीमें लगाई गई थीं। इसके अलावा दो टीमें स्थानीय स्तर पर संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। पुलिस ने उन तीन परिचितों से भी पूछताछ की थी, जिनसे लापता होने के बाद प्रधान ने बातचीत की थी। शुरुआत में उनके मोबाइल की आखिरी लोकेशन थरवई रामलीला मैदान के पास मिली थी। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग संभावित स्थानों पर उनकी तलाश जारी रखी। चार दिन तक चले इस घटनाक्रम का अंत तब हुआ, जब प्रधान ने खुद फोन कर वृंदावन में होने की जानकारी पुलिस को दी।

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