पत्नी और 3 मासूम बेटियों की मौत में पति दोषी:औरैया में 7 साल कैद, बेटियां होने पर देता था ताना, 20 हजार जुर्माना लगा
औरैया जिले के सेहुद गांव में 4 साल पहले हुए दिल दहला देने वाले मामले में शुक्रवार को अदालत ने अंतिम फैसला सुना दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार की अदालत ने पत्नी और तीन बेटियों को आत्महत्या के लिए उकसाने के दोषी पति कुलदीप को 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न अदा करने पर दोषी को 3 महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। 1 नवंबर 2020 को फंदे से लटके मिले थे 4 शव सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरविंद राजपूत ने बताया कि दर्दनाक घटना 1 नवंबर 2020 की है। दिबियापुर थाना क्षेत्र के सेहुद गांव में मजदूर कुलदीप की पत्नी साधना और उसकी तीन मासूम बेटियां गुंजन (7 वर्ष), अंजुम (3 वर्ष) और महज 15 दिन की नवजात बच्ची घर के भीतर फांसी के फंदे से लटकी मिली थीं। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। लगातार बेटियां पैदा होने पर ताने देता था पति मृतका साधना के भाई बृजविहारी (निवासी अमानपुर, सहायल) ने दिबियापुर थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि शादी के 10 साल बाद लगातार तीन बेटियां होने के कारण कुलदीप पत्नी को लगातार ताने देता था और शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। इसी उत्पीड़न से तंग आकर साधना ने पहले अपनी तीनों मासूम बच्चियों को फंदे पर लटकाया और फिर खुद फांसी लगा ली। अदालत में संतोषजनक जवाब नहीं दे सका पति पुलिस ने जांच पूरी कर आरोपी पति कुलदीप के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप पत्र (चार्जशीट) अदालत में दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महावीर शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि घर में पत्नी और तीन मासूमों के शव मिलने जैसी गंभीर परिस्थिति का संतोषजनक जवाब देने की मुख्य जिम्मेदारी पति की थी, जिसे वह साबित नहीं कर सका। दोषी कुलदीप को भेजा गया इटावा जेल अदालत ने दोनों पक्षों के गवाहों और सबूतों को देखने के बाद कुलदीप को दोषी करार दिया और सजा का ऐलान किया। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी कुलदीप को कस्टडी में लेकर जिला कारागार इटावा भेज दिया गया है।
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