पंजाब में बड़ा सियासी भूचाल! भगवंत मान सरकार पर ईडी के गंभीर आरोप

पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों और सरकारी कामकाज में कथित हस्तक्षेप को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

Sep 02, 2026 - 12:25
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पंजाब में बड़ा सियासी भूचाल! भगवंत मान सरकार पर ईडी के गंभीर आरोप

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 02 सितंबर 2026

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें कथित भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में बिचौलियों के प्रभाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 3 सितंबर को होनी है।

मुख्यमंत्री कार्यालय तक जांच की आंच पहुंचने का दावा

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उच्च न्यायालय में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान पंजाब सरकार के कामकाज और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों के संबंध में कई गंभीर दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के स्थानांतरण और नियुक्ति, ठेकों, जमीन से जुड़े मामलों तथा अन्य सरकारी निर्णयों में कथित हस्तक्षेप का उल्लेख किया गया है।जांच एजेंसी का दावा है कि उसे तलाशी और डिजिटल उपकरणों से ऐसे दस्तावेज, संदेश और अन्य सामग्री मिली है, जिनसे सरकारी तंत्र में कथित रूप से बिचौलियों की भूमिका का संकेत मिलता है। हालांकि, रिपोर्ट में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक जांच और सुनवाई के दायरे में हैं। इन आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

पंजाब पुलिस पर सहयोग नहीं करने का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि पंजाब पुलिस ने जांच के दौरान अपेक्षित सहयोग नहीं किया। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी की ओर से तीन पत्र भेजे जाने के बावजूद कुछ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। एजेंसी ने उच्च न्यायालय के समक्ष इस मामले से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं।रिपोर्ट में नितिन गोहल, जितिन गोहल, राजबीर घुम्मन, बीर दविंदर, रोमी राजा महाजन और अन्य लोगों के नाम का उल्लेख किया गया है। इन लोगों पर निजी लाभ के लिए कथित आपराधिक साजिश, स्थानांतरण और नियुक्ति के लिए रिश्वत लेने तथा गोपनीय सरकारी जानकारी साझा करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

21 लाख रुपये से भरा बैग मिलने का दावा

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, 7 मई से 10 मई 2026 के बीच पंजाब में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। इसी कार्रवाई के दौरान नितिन गोहल से जुड़े परिसर से कथित तौर पर 21 लाख रुपये से भरा एक बैग बरामद होने का दावा किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, यह बैग घर की बालकनी से फेंका गया था।जांच एजेंसी ने दावा किया है कि नितिन गोहल के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से मिली सामग्री में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों के साथ संपर्क और बातचीत के संकेत मिले। एजेंसी ने उच्च न्यायालय के समक्ष संदेशों की प्रतिलिपियां, जानकारी और चित्र भी प्रस्तुत किए हैं।

स्थानांतरण और नियुक्ति में कथित हस्तक्षेप

प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के स्थानांतरण और नियुक्ति से जुड़े कई मामलों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, नितिन गोहल कथित तौर पर इच्छुक अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन के बीच संपर्क का काम करते थे।जांच एजेंसी का दावा है कि अलग-अलग सरकारी विभागों में अधिकारियों की पसंदीदा नियुक्ति और स्थानांतरण को लेकर बातचीत की गई। इसके अलावा कथित रूप से स्थानांतरण प्रस्ताव, नियुक्ति आदेश और विभागीय बदलाव से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने से पहले ही साझा किए जाने के संकेत भी मिले हैं।

ठेकों और सरकारी फैसलों को लेकर भी आरोप

रिपोर्ट में सरकारी ठेकों के आवंटन और निर्माणकर्ताओं से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा जमीन के उपयोग में बदलाव की अनुमति, नीतिगत मामलों की शर्तें तय करने और अन्य सरकारी सुविधाओं से जुड़े मामलों में कथित लेनदेन की बात कही गई है।प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, जांच के दौरान मिली बातचीत और अन्य सामग्री से यह संकेत मिलता है कि कुछ लोग सरकारी अधिकारियों तक पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल करके आर्थिक लाभ हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। एजेंसी ने ऐसे कई मामलों का विवरण अपनी रिपोर्ट में दिया है।

सरकारी गोपनीय जानकारी लीक करने का भी आरोप

जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों और संवेदनशील सूचनाओं तक कथित अनधिकृत पहुंच का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, नितिन गोहल और उनके सहयोगियों के पास स्थानांतरण प्रस्ताव, नियुक्ति आदेश, नीतिगत दस्तावेज, प्रशासनिक मंजूरी और अन्य आंतरिक सरकारी संवाद से संबंधित जानकारी होने के संकेत मिले।प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि इनमें से कुछ सूचनाएं सार्वजनिक होने से पहले ही संबंधित लोगों तक पहुंच रही थीं। इससे एजेंसी ने सरकारी रिकॉर्ड तक अनधिकृत पहुंच और संवेदनशील जानकारी के संभावित रिसाव की आशंका जताई है।

हथियार लाइसेंस से जुड़े मामलों में भी भूमिका का आरोप

रिपोर्ट में हथियार लाइसेंस से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया गया है। इसमें लाइसेंस की सिफारिश, मंजूरी, नवीनीकरण और अन्य संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर हुई कथित बातचीत और संपर्क का उल्लेख है।जांच एजेंसी का आरोप है कि नितिन गोहल कथित तौर पर सरकारी तंत्र में प्रभाव रखने वाले लोगों के माध्यम से ऐसे मामलों में सहायता और समन्वय कर रहे थे। हालांकि, इन सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

3 सितंबर को हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में होनी है। प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों और पंजाब पुलिस की भूमिका से जुड़े सवालों पर अदालत में सुनवाई के दौरान स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।फिलहाल रिपोर्ट में लगाए गए आरोप जांच एजेंसी का पक्ष हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान या पंजाब सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब दिया जाता है और अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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