भारतीय मूल के सांसद का धोखा! इंडिया पर अमेरिकी टैरिफ लगाने के लिए डाला वोट
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े विधेयक को 262-159 मतों से पारित किया। भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने इसके पक्ष में मतदान किया। विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार दे सकता है, हालांकि भारत पर ऐसा शुल्क अभी सीधे लागू नहीं हुआ है।
दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 18 सितंबर 2026
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक को 262 के मुकाबले 159 मतों से पारित कर दिया है। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026’ नाम के इस विधेयक में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन जैसे देश इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, विधेयक अपने आप भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क लागू नहीं करता, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति को निर्धारित परिस्थितियों में ऐसा शुल्क लगाने का अधिकार देता है।
राजा कृष्णमूर्ति ने विधेयक के पक्ष में किया मतदान
इलिनॉयस से डेमोक्रेटिक सांसद राजा कृष्णमूर्ति उन छह भारतीय-अमेरिकी सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने इस मतदान में अलग रुख अपनाया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, छह भारतीय-अमेरिकी सांसदों में कृष्णमूर्ति ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, अमी बेरा, श्री थानेदार और सुहास सुब्रमण्यम ने इसके खिलाफ मतदान किया। प्रतिनिधि सभा में कुल 58 डेमोक्रेटिक सांसदों ने विधेयक के समर्थन में मतदान किया।
क्या है इस विधेयक में प्रावधान
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसकी ऊर्जा तथा रक्षा व्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाना है। इसके तहत रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति को 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की शक्ति दी जा सकती है। भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों में शामिल हैं, इसलिए दोनों पर संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हुई है।
भारत पर अभी सीधे नहीं लगा है 100 प्रतिशत शुल्क
इस पूरे मामले में यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पारित होने का अर्थ यह नहीं है कि भारत पर तत्काल 100 प्रतिशत शुल्क लगा दिया गया है। विधेयक राष्ट्रपति को इस तरह का शुल्क लगाने का अधिकार देता है और इसका इस्तेमाल करना अमेरिकी प्रशासन के अगले निर्णय पर निर्भर करेगा। रिपोर्टों के अनुसार, विधेयक अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी की प्रक्रिया में है।
रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर दबाव
अमेरिकी कानून में प्रस्तावित व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय पर दबाव बढ़ाना है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है और इसी वजह से अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित प्रभाव को लेकर भारत पर चर्चा हो रही है। इससे भारत के ऊर्जा आयात, व्यापार और अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन इस अधिकार का इस्तेमाल किस तरह करता है।
यूक्रेन के समर्थन में राजा कृष्णमूर्ति का रुख
राजा कृष्णमूर्ति ने मतदान से पहले यूक्रेन से जुड़े एक समूह के साथ मुलाकात भी की थी। उन्होंने यूक्रेन की संप्रभुता और स्वतंत्रता के समर्थन की बात कही थी और रूस के खिलाफ दबाव बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उनके मतदान का रुख इसी व्यापक अमेरिकी नीति और यूक्रेन के समर्थन से जुड़े उनके सार्वजनिक बयानों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में कैसे पास हुआ विधेयक
विधेयक को प्रतिनिधि सभा में 262 मतों के समर्थन और 159 मतों के विरोध के साथ मंजूरी मिली। इसमें रिपब्लिकन सांसदों के साथ 58 डेमोक्रेटिक सांसदों ने भी समर्थन में मतदान किया। इससे स्पष्ट है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के मुद्दे पर दोनों दलों के कुछ सांसदों ने एक समान रुख अपनाया, जबकि विधेयक में राष्ट्रपति को व्यापक शुल्क अधिकार देने को लेकर अमेरिकी राजनीति में मतभेद भी सामने आए हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या असर पड़ेगा
विधेयक के पारित होने के बाद भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों को लेकर नई अनिश्चितता पैदा हुई है। यदि भविष्य में अमेरिकी प्रशासन भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय करता है, तो भारतीय निर्यातकों और दोनों देशों के व्यापार पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस अधिकार का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करेंगे या नहीं, इसलिए संभावित प्रभाव का आकलन आगे होने वाले प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगा।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी बनी अहम वजह
भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है। रूस से होने वाला तेल आयात भी इसी रणनीति का हिस्सा है। अमेरिकी कानून के संभावित प्रभाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है। इसलिए आने वाले समय में रूस से ऊर्जा खरीद और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बना रह सकता है।
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