ममता बनर्जी के बाद अब ऋतब्रत गुट ने EC को भेजे नाम, सब में तृणमूल कांग्रेस
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद के बीच ममता बनर्जी के बाद ऋतब्रत बनर्जी गुट ने भी चुनाव आयोग को तीन नए नाम भेजे हैं। इनमें नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस, डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस शामिल हैं। अब आयोग को दोनों गुटों के नाम और चुनाव चिह्न के विकल्पों पर फैसला करना है।
दि राइजिंग न्यूज | कोलकाता | 18 सितंबर 2026
तृणमूल कांग्रेस में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग के अगले फैसले पर टिक गया है। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट को नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने के लिए कहा गया था। ममता बनर्जी के बाद अब ऋतब्रत गुट ने भी अपने तीन नाम चुनाव आयोग को भेज दिए हैं। खास बात यह है कि ऋतब्रत गुट की ओर से सुझाए गए तीनों नामों में ‘तृणमूल कांग्रेस’ शब्द शामिल है।
ऋतब्रत गुट ने भेजे तीन नाम
ऋतब्रत बनर्जी गुट ने शुक्रवार को चुनाव आयोग को पार्टी के नए नामों के तीन विकल्प सौंपे। इनमें ‘नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस’, ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस’ शामिल हैं। गुट की ओर से यह फैसला पार्टी नेताओं के साथ हुई ऑनलाइन बैठक के बाद लिया गया। अब इन विकल्पों पर अंतिम निर्णय चुनाव आयोग को करना है।
ममता बनर्जी ने भी भेजे थे विकल्प
इससे पहले ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के जवाब में अपनी ओर से पार्टी के नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प भेज दिए थे। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने आयोग के आदेश के कुछ ही घंटे बाद गुरुवार रात करीब 11 बजकर 36 मिनट पर अपना जवाब भेजा। ममता बनर्जी ने आयोग के अंतरिम आदेश पर कड़ा विरोध भी जताया और इसे लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों पर लगाई रोक
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों पक्षों को सुनने के बाद अंतरिम आदेश जारी किया था। आदेश के तहत ममता बनर्जी गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट दोनों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम और मौजूदा चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। आयोग ने दोनों पक्षों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प उपलब्ध कराने को कहा था।
दोनों गुटों ने समय से पहले सौंपे नाम
चुनाव आयोग की ओर से तय समय सीमा खत्म होने से पहले ही दोनों गुटों ने अपने-अपने विकल्प आयोग को सौंप दिए। ऋतब्रत गुट ने आयोग के अंतरिम आदेश का स्वागत किया है, जबकि ममता बनर्जी ने आदेश पर कड़ा विरोध जताया है। अब दोनों पक्षों की ओर से दिए गए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्पों पर आयोग को निर्णय लेना होगा।
उपचुनाव से पहले बढ़ा विवाद
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के कारण यह विवाद और महत्वपूर्ण हो गया है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है और दोनों गुटों की ओर से उम्मीदवार मैदान में उतारे गए हैं। ऐसे में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग का फैसला दोनों पक्षों के लिए अहम होगा।
अब चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार
ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट की ओर से नामों के विकल्प मिलने के बाद अब निगाहें चुनाव आयोग के अगले कदम पर हैं। आयोग को यह तय करना है कि दोनों पक्षों को कौन-सा नाम और चुनाव चिह्न दिया जाएगा। खास तौर पर दोनों गुटों के विकल्पों में ‘तृणमूल कांग्रेस’ शब्द होने के कारण आयोग के सामने नामों को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला करने की स्थिति है। उपचुनाव से पहले आने वाला यह फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति में आगे की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
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