श्रावस्ती में थारू समुदाय की सांस्कृतिक प्रस्तुति:लोक परंपराओं की झलक दिखी, शिविर में 46 मरीजों को मुफ्त दवाएं बांटी गईं
श्रावस्ती में थारू समुदाय द्वारा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को सहेजने और ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार दोपहर 3:00 से 4:00 बजे के मध्य एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भचकाही स्थित बारात घर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में थारू समाज की पारंपरिक लोक संस्कृति का प्रदर्शन किया गया, वहीं दूसरी ओर निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाकर स्थानीय ग्रामीणों को चिकित्सा राहत प्रदान की गई। 46 मरीजों की जांच कर बांटी गईं मुफ्त दवाएं बारात घर परिसर में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कुल 46 मरीजों का परीक्षण किया गया। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की और आवश्यकतानुसार उन्हें निःशुल्क दवाएं वितरित कीं। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना और लोगों को मौसमी बीमारियों व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना रहा। लखीमपुर की टीम ने प्रस्तुत की थारू लोक संस्कृति की झलक कार्यक्रम के दौरान लखीमपुर से आई विशेष सांस्कृतिक टीम ने थारू संस्कृति पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इन रंगारंग प्रस्तुतियों के माध्यम से थारू जनजाति की प्राचीन परंपराओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक विरासत का सजीव चित्रण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलती है। कई प्रमुख अतिथि और समाजसेवी रहे मौजूद इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में थारू कल्चर श्रावस्ती के प्रवक्ता प्रताप नारायण, विशिष्ट अतिथि राम करतार राणा और अति विशिष्ट अतिथि के रूप में मूल आदिवासी जनजाति कल्याण युवा प्रदेश संगठन के मंत्री मंगल प्रसाद राणा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजन में थारू कल्चर श्रावस्ती के महामंत्री कर्मवीर राणा तथा ग्राम प्रधान व सभा अध्यक्ष ईश्वरदीन चौधरी ने सक्रिय भूमिका निभाई। दो प्रमुख ट्रस्टों के सौजन्य से हुआ सफल आयोजन इस पूरे कार्यक्रम का सफल आयोजन ओम ग्लोबल ट्राइबल ट्रस्ट (लखनऊ) के प्रबंधक ओपी राणा और जी. एंड पी. ग्लोबल ट्रस्ट (लखनऊ) के प्रबंधक संजय प्रकाश राणा के सौजन्य से किया गया। इस दौरान डॉ. विजय शंकर राणा, कोमल सिंह राणा, नर्स आरुषि राणा और इशू किरन राणा सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। यह पहल थारू समाज की धरोहर को संरक्षित करने और दूरदराज के गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुई।
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