20 राज्यों में करोड़ों मतदाताओं के नाम कटे, अब दोबारा जुड़ेंगे नाम!
चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद छूटे पात्र मतदाताओं और नए मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ने के लिए 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है। देशभर में प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। पात्र लोग सामान्य प्रपत्र छह के जरिए अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 2 अक्टूबर 2026
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद देश के कई राज्यों की मतदाता सूचियों में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। दिल्ली में लगभग 32.8 प्रतिशत की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई, जबकि महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में भी बड़ी संख्या में नाम हटे हैं। चुनाव आयोग ने अब 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छूटे पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है।
एसआईआर के बाद क्या हुआ
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूचियों की व्यापक जांच की गई। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले नामों की पहचान करने के साथ पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना है। चुनाव आयोग के अनुसार यह प्रक्रिया चरणों में पूरी की गई और इसमें बूथ स्तर के अधिकारियों तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। अब जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, उन्हें दोबारा जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
20 राज्यों में दोबारा जुड़ेंगे छूटे मतदाताओं के नाम
चुनाव आयोग ने 29 सितंबर 2026 को राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखित निर्देश भेजकर विशेष अभियान चलाने को कहा। एक अक्टूबर की बैठक में भी इस निर्देश को दोहराया गया। अधिकारियों को एसआईआर से पहले और बाद की मतदाता सूचियों का मिलान करने के लिए कहा गया है। इससे उन पात्र लोगों की पहचान की जा सकेगी, जिनके नाम पुनरीक्षण के दौरान छूट गए हैं।
प्रपत्र छह से दोबारा जुड़ सकेगा नाम
जिन पात्र मतदाताओं का नाम अंतिम सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रपत्र छह के जरिए दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। बूथ स्तर के अधिकारी जरूरत पड़ने पर घर-घर जाकर आवेदन भरने और आवश्यक दस्तावेज जमा कराने में सहायता करेंगे। पहली बार मतदान करने के योग्य नागरिकों को भी इस अभियान के जरिए मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। आयोग का उद्देश्य छूटे हुए पात्र नागरिकों को सूची में वापस लाना है।
राज्यवार मतदाता नाम कटने का आंकड़ा
| क्रम | राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | हटाए गए नाम | गिरावट |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | 2.05 करोड़ | 13.21% |
| 2 | महाराष्ट्र | 2.07 करोड़ | 21.10% |
| 3 | पश्चिम बंगाल | 83.86 लाख | 10.90% |
| 4 | तमिलनाडु | 74.00 लाख | 11.50% |
| 5 | तेलंगाना | 71.60 लाख | 21.70% |
| 6 | गुजरात | 68.00 लाख | 14.50% |
| 7 | दिल्ली | 51.50 लाख | 32.80% |
| 8 | बिहार | 47.00 लाख | 5.95% |
| 9 | मध्य प्रदेश | 34.25 लाख | 5.96% |
| 10 | राजस्थान | 31.00 लाख | 5.70% |
| 11 | हरियाणा | 28.00 लाख | 13.90% |
| 12 | छत्तीसगढ़ | 25.00 लाख | 11.80% |
| 13 | पंजाब | 25.00 लाख | 11.60% |
| 14 | ओडिशा | 17.00 लाख | 5.10% |
| 15 | कर्नाटक | 11.00 लाख | 2.04% |
| 16 | केरल | 9.00 लाख | 3.24% |
| 17 | उत्तराखंड | 7.90 लाख | 9.44% |
| 18 | गोवा | 1.28 लाख | 10.80% |
| 19 | पुडुचेरी | 77 हजार | 7.54% |
| 20 | अंडमान एवं निकोबार | 52 हजार | 16.60% |
| 21 | लक्षद्वीप | 206 | 0.35% |
ऊपर दिए गए राज्यवार आंकड़े आपके उपलब्ध स्रोत में दिए गए आंकड़ों के आधार पर हैं। अलग-अलग चरणों और प्रारूप या अंतिम मतदाता सूचियों के कारण आंकड़ों में अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए, चुनाव आयोग की प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों में अलग चरणों में चली है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा संख्या में नाम हटे
दिए गए आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब 2.05 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। राज्य में एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची में करीब 13.39 करोड़ मतदाता दर्ज रहे। चुनाव अधिकारियों के अनुसार पुनरीक्षण के दौरान नाम हटाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया के लिए दावे और आपत्तियों की व्यवस्था भी रखी गई थी।
महाराष्ट्र में भी दो करोड़ से ज्यादा नाम प्रभावित
महाराष्ट्र में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 2.07 करोड़ नाम प्रारूप सूची से बाहर रहे। हालांकि महाराष्ट्र में प्रक्रिया के दौरान दावे और आपत्तियों के लिए समयसीमा बढ़ाई गई थी और अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि प्रारूप सूची से बाहर रहना अपने आप में अंतिम रूप से नाम हट जाने के बराबर नहीं है। पात्र मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने का अवसर दिया गया है।
दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रतिशत गिरावट
दिल्ली में मतदाता सूची में लगभग एक-तिहाई की गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों में करीब 32.8 प्रतिशत मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में नहीं रहे। यही कारण है कि दिल्ली में छूटे हुए पात्र मतदाताओं को दोबारा सूची में शामिल करने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया गया है। चुनाव अधिकारियों की ओर से मतदाता पंजीकरण और सहायता शिविरों की व्यवस्था भी की जा रही है।
चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियों की खबर
कुछ रिपोर्टों में एसआईआर से जुड़े निर्णयों और मतदाता सूची प्रबंधन को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों का दावा किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने कुछ निर्णयों को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन रिपोर्टों में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था और स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन दावों पर संबंधित पक्षों के आधिकारिक स्पष्टीकरण को अलग से देखना जरूरी है।
गोवा में तकनीकी व्यवस्था को लेकर मामला
गोवा में कुछ पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की प्रक्रिया में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था से जुड़ी तकनीकी समस्या का मामला रिपोर्ट किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय स्तर पर पात्र पाए गए कुछ मतदाताओं के नामों को केंद्रीय प्रणाली में पुनः बहाल करने में दिक्कत आई। यह मामला मतदाता सूची के प्रबंधन में तकनीकी व्यवस्था और स्थानीय अधिकारियों के बीच समन्वय के सवाल को सामने लाता है।
ओडिशा में प्रपत्र सात के कथित दुरुपयोग की जांच
ओडिशा के भद्रक जिले के धामनगर में बूथ स्तर के अधिकारियों के प्रमाण-पत्रों के कथित दुरुपयोग से बड़ी संख्या में नाम हटाने के आवेदन जमा किए जाने का मामला सामने आया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले की पुलिस जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आवेदन किस तरह जमा किए गए और इसमें किसकी भूमिका थी। ऐसे मामलों में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
चुनाव आयोग का उद्देश्य क्या है
चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण कराया गया है। मृत मतदाताओं, स्थानांतरित लोगों और दोहरी प्रविष्टियों की पहचान करना इस प्रक्रिया का हिस्सा है। दूसरी ओर, बड़ी संख्या में नाम हटने के बाद यह भी जरूरी है कि पात्र मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और नाम दोबारा जुड़वाने का पर्याप्त अवसर मिले। इसी उद्देश्य से अब विशेष पुनःनामांकन अभियान चलाया जा रहा है।
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