सोनभद्र में 12 से अधिक निजी अस्पतालों में मिलीं खामियां:पंजीकृत एमबीबीएस डॉक्टर नहीं मिले, जांच के लिए डीएम ने बनाई 3 टीमें
सोनभद्र जिले में स्वास्थ्य विभाग की तीन महीने तक चली रैंडम जांच में एक दर्जन से ज्यादा निजी अस्पतालों में अनियमितताएं मिली हैं। कहीं पंजीकरण में दर्ज एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद नहीं मिले तो कहीं बिना पंजीकरण नवीनीकरण के ही अस्पताल संचालित होते मिले। शुरुआती जांच में निर्धारित मानकों के पालन में भी कमियां सामने आई हैं। इसके बाद जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने मामले की जांच के लिए तीन प्रशासनिक टीमें गठित की हैं। डीएम ने तीनों टीमों को चिन्हित अस्पतालों में अचानक पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए हैं। टीमों में एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और निजी अस्पतालों के पंजीकरण के नोडल अधिकारी शामिल किए गए हैं। जांच के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पंजीकृत डॉक्टरों की मौजूदगी भी जांच के दायरे में स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में कई अस्पतालों में पंजीकरण के दौरान दर्ज डॉक्टर नहीं मिले। इसके अलावा कुछ अस्पतालों के पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया गया था। डीएम ने शुरुआती अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी थी। अवैध अस्पताल और पैथोलॉजी सेंटरों की मिलती रही हैं शिकायतें जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में अवैध अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों के संचालन की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इन पर निगरानी की जिम्मेदारी जिला स्तर के नोडल अधिकारी के साथ स्थानीय सीएचसी और पीएचसी अधीक्षकों की भी है। इसके बावजूद कई इलाकों में अनियमित संस्थानों का संचालन जारी रहने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पंजीकरण से लेकर इलाज के मानकों तक होगी जांच तीनों प्रशासनिक टीमें अस्पतालों के पंजीकरण और नवीनीकरण, पंजीकृत डॉक्टरों की उपलब्धता और निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के पालन की जांच करेंगी। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अचानक निरीक्षण के दौरान अनियमितता मिलने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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