ट्रंप का दावा- चांद हमारा है, जानिए क्या कहता है कानून और क्या यहां माइनिंग संभव है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चांद को लेकर किए गए दावे ने अंतरिक्ष कानून और चांद के संसाधनों पर अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कोई भी देश चांद पर अपना संप्रभु अधिकार या मालिकाना हक नहीं जता सकता। हालांकि, चांद से पानी, खनिज और दूसरी प्राकृतिक सामग्री निकालने तथा उनके इस्तेमाल को लेकर कानून में कई सवाल अब भी स्पष्ट नहीं हैं।

Sep 21, 2026 - 11:29
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ट्रंप का दावा- चांद हमारा है, जानिए क्या कहता है कानून और क्या यहां माइनिंग संभव है?

दि राइजिंग न्यूज़ | अमेरिका | 21 सितंबर 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 सितंबर को सामाजिक माध्यम पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया था कि चांद हमारा है। इस पोस्ट के साथ अमेरिकी झंडे वाली चांद की सतह की तस्वीर भी साझा की गई थी। हालांकि, अंतरिक्ष कानून के मौजूदा नियमों के अनुसार अमेरिका सहित कोई भी देश चांद को अपना क्षेत्र घोषित नहीं कर सकता।

बाहरी अंतरिक्ष संधि क्या कहती है

1967 की बाहरी अंतरिक्ष संधि चांद और दूसरे खगोलीय पिंडों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों का प्रमुख आधार है। इसके दूसरे अनुच्छेद के अनुसार कोई भी देश बाहरी अंतरिक्ष, चांद या किसी अन्य खगोलीय पिंड पर संप्रभुता, कब्जे या किसी दूसरे तरीके से अपना अधिकार स्थापित नहीं कर सकता। चांद पर झंडा लगाने, आधार बनाने या किसी हिस्से का इस्तेमाल करने से भी उस क्षेत्र पर कानूनी मालिकाना हक नहीं मिलता।संधि का पहला अनुच्छेद भी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण और समान उपयोग पर जोर देता है। इसके अनुसार बाहरी अंतरिक्ष की खोज और उपयोग सभी देशों के हित में होना चाहिए। साथ ही, देशों को अंतरिक्ष की खोज और उसके उपयोग का अवसर समान रूप से मिलना चाहिए। अंतरिक्ष में सरकारी संस्थाओं के साथ निजी संस्थाओं की गतिविधियों के लिए भी संबंधित देश जिम्मेदार माना जाता है।

क्या चांद पर खनन किया जा सकता है

चांद पर खनन का विषय अंतरिक्ष कानून का सबसे जटिल हिस्सा है। बाहरी अंतरिक्ष संधि चांद या उसके किसी हिस्से पर कब्जा करने से रोकती है, लेकिन चांद से निकाले गए संसाधनों के मालिकाना हक को लेकर विस्तृत नियम नहीं देती। इसी वजह से चांद के पानी, खनिज और अन्य संसाधनों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी बहस जारी है।अमेरिका ने वर्ष 2015 में एक कानून बनाकर अपने नागरिकों को अंतरिक्ष से संसाधन निकालने और उनका व्यावसायिक इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। हालांकि, इस कानून में यह भी स्पष्ट किया गया कि संसाधन निकालने की अनुमति का अर्थ किसी खगोलीय पिंड पर अमेरिका का मालिकाना हक स्थापित होना नहीं है। यानी निकाली गई सामग्री और उस स्थान के स्वामित्व को अलग-अलग माना गया है।

चांद के संसाधनों में इतनी दिलचस्पी क्यों है

चांद के ध्रुवीय क्षेत्रों में ऐसे इलाके मौजूद हैं जहां लंबे समय तक सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंचता। वैज्ञानिकों के अनुसार, इन क्षेत्रों में पानी की बर्फ मौजूद हो सकती है। भविष्य में इस बर्फ से पीने का पानी, सांस लेने के लिए ऑक्सीजन और अंतरिक्ष यानों के लिए ईंधन तैयार करने की संभावना देखी जा रही है।इसके अलावा चांद की सतह पर मौजूद खनिज और धातुएं भविष्य में अंतरिक्ष में बनाए जाने वाले आधारभूत ढांचे के लिए उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर खनन करने के लिए आवश्यक तकनीक अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है। इसके साथ ही चांद से संसाधन निकालने की लागत और आर्थिक व्यवहार्यता भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

आर्टेमिस समझौता क्या है

अमेरिका ने वर्ष 2020 में आर्टेमिस समझौते की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य चांद, मंगल और अन्य खगोलीय पिंडों की शांतिपूर्ण, पारदर्शी और सहयोगात्मक खोज के लिए कुछ साझा सिद्धांत तय करना है। इसमें शामिल देश बाहरी अंतरिक्ष संधि के सिद्धांतों का पालन करने पर सहमत होते हैं।आर्टेमिस समझौते के तहत चांद, मंगल और क्षुद्रग्रहों से संसाधन निकालने और उनका इस्तेमाल करने को कानूनी रूप से स्वीकार किया गया है, बशर्ते इससे किसी क्षेत्र पर संप्रभु अधिकार का दावा न किया जाए। समझौते में अंतरिक्ष अभियानों के बीच टकराव रोकने के लिए अस्थायी सुरक्षा क्षेत्र बनाए जाने की भी व्यवस्था है। इन क्षेत्रों को किसी भू-भाग पर मालिकाना हक के रूप में नहीं देखा जाता।

चांद पर सुरक्षा क्षेत्र को लेकर क्या नियम हैं

अलग-अलग देशों और निजी संस्थाओं के चांद पर अभियान बढ़ने के साथ उनके बीच टकराव रोकना भी महत्वपूर्ण हो गया है। आर्टेमिस समझौते में ऐसे सुरक्षा क्षेत्र बनाने की बात कही गई है, जिनका उद्देश्य एक अभियान की गतिविधियों में दूसरे अभियान की अनावश्यक दखलंदाजी रोकना है। इन क्षेत्रों को चांद के किसी हिस्से पर स्थायी अधिकार के रूप में स्थापित करने की अनुमति नहीं है।समझौते में शामिल देशों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करें। आवश्यकता पड़ने पर अलग-अलग अभियान चलाने वाले देशों के बीच समन्वय किया जाना है। 31 अगस्त 2026 को तुर्की के शामिल होने के बाद आर्टेमिस समझौते से जुड़े देशों की संख्या 71 बताई गई है।

मून एग्रीमेंट क्या कहता है

वर्ष 1979 में संयुक्त राष्ट्र के तहत चांद समझौता तैयार किया गया था। इसमें चांद और उसके प्राकृतिक संसाधनों को पूरी मानवता की साझा विरासत माना गया है। यह समझौता ऐसे संसाधनों पर किसी देश या कंपनी के मालिकाना हक को स्वीकार नहीं करता, जिनका अभी तक खनन नहीं किया गया है।इस समझौते में यह भी कहा गया है कि भविष्य में चांद पर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खनन शुरू होने पर उसके लिए एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इसके जरिए खनन से मिलने वाले आर्थिक और वैज्ञानिक लाभों को विभिन्न देशों के बीच साझा करने की व्यवस्था की जानी है। हालांकि, बाहरी अंतरिक्ष संधि की तुलना में इस समझौते को बहुत कम देशों ने स्वीकार किया है और अमेरिका इसमें शामिल नहीं है।

खनन से निकाले गए संसाधनों का मालिक कौन होगा

अंतरिक्ष कानून में चांद की जमीन और वहां से निकाले गए संसाधनों के बीच अंतर का सवाल महत्वपूर्ण है। बाहरी अंतरिक्ष संधि चांद की जमीन पर मालिकाना हक को रोकती है, लेकिन खनन के बाद निकाली गई सामग्री के स्वामित्व को लेकर स्पष्ट और विस्तृत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नहीं है। इसी वजह से इस विषय पर विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग कानूनी व्याख्याएं सामने आती रही हैं।एक मत के अनुसार, यदि संसाधन निकालने की गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में होती हैं तो निकाली गई सामग्री का इस्तेमाल चांद के किसी हिस्से पर क्षेत्रीय अधिकार जताने के समान नहीं माना जाना चाहिए। वहीं, दूसरी राय यह है कि संसाधनों के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक इस्तेमाल की खुली अनुमति अंतरिक्ष को पूरी मानवता के हित में इस्तेमाल करने के मूल सिद्धांत को प्रभावित कर सकती है।

भविष्य में क्या बदल सकता है

चांद की खोज अब केवल सरकारों तक सीमित नहीं रह गई है। सरकारी अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ निजी कंपनियां भी रॉकेट, अंतरिक्ष यान और भविष्य के चांद अभियानों में सक्रिय हो रही हैं। ऐसे में संसाधनों के इस्तेमाल, खनन की सीमा, अभियान क्षेत्रों के बंटवारे और संभावित विवादों को सुलझाने के लिए नए अंतरराष्ट्रीय नियमों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी कंपनी या देश को चांद के संसाधनों के इस्तेमाल की कितनी अनुमति दी जा सकती है। इसके साथ यह भी तय करना होगा कि अलग-अलग अभियानों के बीच संसाधन वाले क्षेत्रों को कैसे साझा किया जाएगा और सुरक्षा क्षेत्र किस सीमा तक बनाए जा सकेंगे। आने वाले वर्षों में चांद पर बढ़ती गतिविधियों के साथ इन कानूनी सवालों का महत्व और बढ़ सकता है।

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