ट्रंप-शी जिनपिंग की महामुलाकात में क्या होगा? जानिए पूरा एजेंडा
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दि राइजिंग न्यूज़ | अमेरिका | 24 सितंबर 2026
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर 2026 तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं। इस दौरान उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्यापार, शुल्क, दुर्लभ खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ताइवान और ईरान समेत कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो रही है। यह 2026 में दोनों नेताओं की दूसरी आमने-सामने मुलाकात है और एक दशक से अधिक समय बाद शी जिनपिंग की व्हाइट हाउस यात्रा है।
ट्रंप-शी जिनपिंग की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तीन दिवसीय बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के साथ कई रणनीतिक मतभेद बने हुए हैं। 23 से 25 सितंबर तक चल रही इस यात्रा में औपचारिक स्वागत समारोह, द्विपक्षीय बैठक, राजकीय रात्रिभोज और कई अन्य कार्यक्रम शामिल हैं। दोनों देशों के संबंधों में व्यापार, शुल्क, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दे लगातार प्रमुख बने हुए हैं। ऐसे में इस वार्ता को केवल दो राष्ट्राध्यक्षों की मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापार युद्ध और शुल्क पर सबसे ज्यादा जोर
अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव इस बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। दोनों पक्ष शुल्क में कमी, कृषि उत्पादों के व्यापार और गैर-रणनीतिक वस्तुओं के लिए व्यापारिक बाधाओं को कम करने जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच शुल्क संबंधी अस्थायी समझौते की अवधि 10 नवंबर 2026 तक बताई गई है। अमेरिका और चीन के अधिकारियों के बीच शीर्ष बैठक से पहले भी बातचीत हुई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग के बीच व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और दुर्लभ खनिजों जैसे विषयों पर चर्चा हुई। हालांकि, व्यापार घाटे और दोनों देशों की औद्योगिक नीतियों से जुड़े बड़े मतभेद अभी भी बने हुए हैं।
दुर्लभ खनिजों पर क्यों है इतनी नजर
दुर्लभ खनिज आधुनिक तकनीक, ऊर्जा और रक्षा उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। चीन इन खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी भूमिका रखता है, इसलिए अमेरिका इनकी स्थिर और निर्बाध आपूर्ति को लेकर चिंतित है। दूसरी ओर चीन अमेरिकी तकनीकी प्रतिबंधों में ढील चाहता है। बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला को लेकर दोनों देशों के बीच समझ बनाने की कोशिश हो सकती है। दुर्लभ खनिजों को लेकर किसी भी नए समझौते का असर अमेरिका के रक्षा और तकनीकी उद्योग के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
ताइवान का मुद्दा भी रहेगा अहम
ताइवान अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील रणनीतिक मुद्दों में से एक है। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान के साथ सुरक्षा और सैन्य संबंध बनाए हुए है। इसलिए दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच बातचीत में ताइवान से जुड़े सैन्य और कूटनीतिक मुद्दे महत्वपूर्ण बने रहने की संभावना है। ताइवान को लेकर अमेरिका की सैन्य सहायता और चीन की सुरक्षा चिंताएं दोनों देशों के बीच मतभेद का प्रमुख कारण हैं। इस मुद्दे पर किसी बड़े बदलाव की स्थिति का असर एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता में प्रतिस्पर्धा और सहयोग
कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब अमेरिका-चीन संबंधों का एक नया महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है। दोनों देश इस तकनीक में नेतृत्व हासिल करने की प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, लेकिन साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर बातचीत भी कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सुरक्षा और संभावित खतरों पर संवाद व्यवस्था बनाने की चर्चा हुई है। हालांकि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा भी जारी है। अमेरिका अपनी उन्नत तकनीकी बढ़त को बनाए रखना चाहता है, जबकि चीन तकनीकी क्षेत्र में अपने विकास पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों का विरोध करता रहा है। इसलिए इस मुद्दे पर व्यापक समझौते की राह आसान नहीं मानी जा रही है।
ईरान और मध्य पूर्व का मुद्दा
अमेरिका और चीन के बीच बातचीत में ईरान का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो सकता है। चीन के ईरान के साथ आर्थिक और ऊर्जा संबंध हैं, जबकि अमेरिका तेहरान को लेकर अपनी अलग रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में वॉशिंगटन बीजिंग की भूमिका और ईरान के साथ उसके संबंधों पर चर्चा कर सकता है। ईरान से जुड़े घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से अमेरिका-चीन वार्ता में यह मुद्दा केवल दोनों देशों के संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा रहेगा।
23 सितंबर: वॉशिंगटन पहुंचे शी जिनपिंग
शी जिनपिंग 23 सितंबर को वॉशिंगटन पहुंचे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉइंट बेस एंड्रयूज पर उनका व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। यह यात्रा एक दशक से अधिक समय बाद शी जिनपिंग की अमेरिकी राजधानी की पहली राजकीय यात्रा है। इस स्वागत को दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के लिहाज से प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना गया। शी जिनपिंग के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी अमेरिका पहुंची हैं और राजकीय यात्रा के दौरान उनके लिए भी अलग कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।
24 सितंबर: व्हाइट हाउस में मुख्य वार्ता
24 सितंबर को व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग के औपचारिक स्वागत के बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक निर्धारित है। इसके बाद विस्तारित बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधि व्यापार और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। औपचारिक स्वागत समारोह में अमेरिकी सैन्य परंपराओं के तहत कई कार्यक्रम रखे गए हैं। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच वार्ता होगी, जबकि मेलानिया ट्रंप और पेंग लियुआन के लिए स्मिथसोनियन राष्ट्रीय एशियाई कला संग्रहालय का दौरा निर्धारित किया गया है।
सैन्य सम्मान और लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन
24 सितंबर के स्वागत समारोह में अमेरिकी सेना की विभिन्न इकाइयों की औपचारिक प्रस्तुतियां होंगी। कार्यक्रम के अंत में एक बी-2 स्पिरिट बमवर्षक और चार एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमानों का हवाई प्रदर्शन भी निर्धारित किया गया है। यह कार्यक्रम राजकीय यात्रा की औपचारिकता और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संबंधों को प्रदर्शित करने वाला हिस्सा है। इसके बाद व्हाइट हाउस में दोनों राष्ट्राध्यक्षों की मुख्य द्विपक्षीय वार्ता होगी।
24 सितंबर की शाम होगा राजकीय रात्रिभोज
दिनभर की आधिकारिक बैठकों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रथम महिला की ओर से शी जिनपिंग और पेंग लियुआन के सम्मान में व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में राजकीय रात्रिभोज आयोजित किया जाएगा। दोनों नेताओं के इस कार्यक्रम में संबोधन भी निर्धारित हैं। राजकीय रात्रिभोज केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच संबंधों के प्रतीकात्मक पक्ष को भी सामने लाता है। इस दौरान अमेरिका और चीन के प्रमुख राजनीतिक तथा कारोबारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
25 सितंबर: चाय पर मुलाकात और राष्ट्रीय अभिलेखागार का दौरा
तीन दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन 25 सितंबर को ट्रंप और मेलानिया ट्रंप, शी जिनपिंग और पेंग लियुआन के साथ व्हाइट हाउस में चाय पर मुलाकात करेंगे। इसके बाद दोनों दंपति वॉशिंगटन स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार का दौरा करेंगे। राष्ट्रीय अभिलेखागार में अमेरिका और चीन के ऐतिहासिक संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को देखने का कार्यक्रम है। इसके बाद शी जिनपिंग और पेंग लियुआन की अमेरिका की राजकीय यात्रा समाप्त होगी और वे वॉशिंगटन से रवाना होंगे।
अमेरिका-चीन संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मुलाकात
ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को स्थिर रखने और रणनीतिक मतभेदों को नियंत्रित करने की कोशिश जारी है। व्यापार और शुल्क के अलावा महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दे दोनों देशों के लिए संवेदनशील हैं। बैठक से किसी बड़े और स्थायी समझौते की गारंटी नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के बीच कई संरचनात्मक मतभेद अभी भी मौजूद हैं। फिर भी शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधी बातचीत से व्यापारिक और कूटनीतिक तनाव को संभालने के लिए आगे की बातचीत का रास्ता खुला रह सकता है।
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