यूपी में ठंड बढ़ी, अलीगढ़ की रात सबसे ठंडी:पारा गिरकर 18.6°C पहुंचा, दिवाली से पहले 4 जिलों की हवा सांस लेने लायक नहीं
यूपी में दिवाली से पहले ठंड बढ़ गई है। शनिवार सुबह लखनऊ, बाराबंकी, महराजगंज, श्रावस्ती और संभल समेत 20 शहरों में कोहरा छाया रहा। पिछले 24 घंटे की बात करें तो अलीगढ़ सबसे ठंडा रहा, यहां न्यूनतम पारा 18.6°C रहा। उधर, NCR और पश्चिमी यूपी वाले जिलों में वायु प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार पहुंच गया है। गाजियाबाद, हापुड़ और बागपत की हवा भी रेड जोन में पहुंच गई है। वाराणसी BHU के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया- दिवाली वाले हफ्ते में तापमान में और गिरावट आने के आसार हैं। सुबह के समय कोहरा बना रह सकता है। मौसम में बदलाव के साथ सुबह और शाम की ठंडक बढ़ेगी। बीते 24 घंटे का तापमान जानिए- 4 जिलों की हवा सांस लेने लायक नहीं, ग्रेप-2 लागू दिवाली से पहले NCR के जिलों की हवा रेड जोन में पहुंच गई है। प्रदूषण को देखते हुए पूरे एनसीआर में ग्रेप-2 लागू कर दिया गया है। नगर निगम सड़कों पर पानी का छिड़काव करा रहा है। खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाने के साथ धूल उड़ने वाले स्थानों पर भी निगरानी रखी जा रही है। डीजल से चलने वाले इंजनों पर पाबंदी लगा दी गई है। होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट के तंदूर में कोयला-लकड़ी जलाने पर रोक लगा दी गई है। तारकोल से सड़क बनाने जैसे प्रदूषण बढ़ाने वाले कामों पर भी रोक लगाई गई है। पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल तक कैसा रहेगा मौसम? पश्चिमी यूपी: नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, आगरा और मथुरा में फिलहाल मौसम शुष्क रहने के संकेत हैं। सुबह हल्की धुंध देखने को मिल सकती है। मध्य यूपी: लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई और रायबरेली में बारिश की फिलहाल संभावना नहीं है। दिन में धूप और रात में हल्की ठंड का असर रह सकता है। पूर्वांचल: वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, गोरखपुर और देवरिया में भी मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। सुबह के समय कुछ स्थानों पर हल्की धुंध देखने को मिल सकती है। बुंदेलखंड: झांसी, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर और ललितपुर में भी फिलहाल बारिश का कोई संकेत नहीं है। रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई में बरतें सावधानी नवंबर में बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को रबी फसलों के प्रबंधन में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खासकर पूर्वांचल में गेहूं, चना, मटर और सरसों की बुवाई के दौरान खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें। निचले खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान हो सकता है। जिन खेतों में बारिश के कारण पर्याप्त नमी है, वहां अनावश्यक सिंचाई से बचें। मौसम की स्थिति और मिट्टी में नमी को देखते हुए ही बुवाई और सिंचाई का निर्णय लें। ठंड-कोहरे में इन फसलों का रखें ध्यान गेहूं: शुरुआती बढ़वार के समय पर्याप्त नमी बनाए रखें। खेत में जलभराव न होने दें। सरसों: लगातार कोहरा और नमी रहने से सफेद रतुआ और अन्य फफूंद वाले रोगों का खतरा बढ़ सकता है। फसल की नियमित निगरानी करें। आलू: झुलसा रोग की आशंका पर पत्तियों की जांच करें। रोग के लक्षण दिखने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें। मटर और चना: अधिक नमी और जलभराव से जड़ों को नुकसान हो सकता है। खेतों में जल निकासी की व्यवस्था रखें।
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