एमएलसी चुनाव में कई सीटों पर भाजपा को झटका...
विधान परिषद चुनाव 2026 में उत्तर प्रदेश की 11 सीटों में भाजपा ने छह सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी पांच सीटों पर जीत की ओर रही। वाराणसी और लखनऊ में सपा ने जीत दर्ज की, वहीं गोरखपुर में भाजपा ने अपनी सीट बचाई। महाराष्ट्र के नागपुर में कांग्रेस की जीत भी चुनाव के प्रमुख परिणामों में शामिल रही।
दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 29 अक्टूबर 2026
विधान परिषद चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की कुल 28 सीटों पर हुए चुनाव में अलग-अलग क्षेत्रों के परिणामों ने राजनीतिक तस्वीर को चर्चा में ला दिया। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर पांच कर ली।
उत्तर प्रदेश के इन चुनावों में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम विशेष रूप से चर्चा में रहा। यहां भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को केवल 307 मतों के अंतर से हराया। ध्रुव त्रिपाठी को 16,790 मत मिले, जबकि राजीव यादव को 14,580 मत प्राप्त हुए। इस करीबी मुकाबले में भाजपा अपनी सीट बचाने में सफल रही।
वाराणसी में समाजवादी पार्टी ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट बरकरार रखी। सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 5,015 मतों से हराया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सपा की इस जीत को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, लखनऊ की स्नातक सीट पर भी सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने भाजपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य अवनीश कुमार सिंह को हराकर जीत दर्ज की।
महाराष्ट्र के नागपुर में भी भाजपा को झटका लगा। यहां कांग्रेस के अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र भी है। इस कारण यहां का परिणाम राजनीतिक चर्चा का विषय बना।
समाजवादी पार्टी के लिए इन चुनावों का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि वर्ष 2020 के विधान परिषद चुनाव में पार्टी ने 11 में से तीन सीटें जीती थीं। इस बार पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की। दूसरी ओर भाजपा ने छह सीटों पर अपना कब्जा बनाए रखा। इन नतीजों से स्पष्ट है कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अलग-अलग दलों को समर्थन मिला है। हालांकि, इन चुनावों के मतदाताओं का समूह सामान्य विधानसभा चुनावों के मतदाताओं से अलग होता है, इसलिए इनके परिणामों को पूरे प्रदेश के जनमत का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता
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