एसआईआर विवाद पर चुनाव आयोग का बड़ा जवाब, कहा- सभी काम कानून के मुताबिक

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने सफाई दी है कि उसकी सभी कार्रवाइयां संविधान, कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार होती हैं। आयोग ने कहा कि आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग सुझाव सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में लिए गए प्रमुख फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों के आधार पर किए गए हैं।

Sep 23, 2026 - 16:25
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एसआईआर विवाद पर चुनाव आयोग का बड़ा जवाब, कहा- सभी काम कानून के मुताबिक

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026


मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठे सवालों और दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली पर स्पष्टीकरण दिया है। आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित कानूनों के तहत काम करता है। आयोग के अनुसार, आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग सुझाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जबकि अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए हैं।

एसआईआर विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दी सफाई

भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बीच अपनी कार्यप्रणाली पर स्पष्टीकरण दिया है। आयोग ने कहा कि वह एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है और संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों तथा स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत काम करता है। आयोग के मुताबिक, किसी भी बड़े फैसले से पहले लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी सलाह और आंतरिक जांच-पड़ताल होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। इनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना है। आयोग ने स्पष्ट किया कि अंतिम रूप से जारी किए गए उसके आदेश और निर्देश वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही जारी होते हैं।

दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों पर क्या बोला आयोग

यह स्पष्टीकरण ऐसी रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब दस महीनों के दौरान एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। एक रिपोर्ट में ऐसे कम से कम 14 अवसरों का उल्लेख किया गया है। आयोग ने इन आंतरिक टिप्पणियों को संस्था में मतभेद का प्रमाण मानने से इनकार किया है। उसका कहना है कि किसी भी संस्थागत विचार-विमर्श में अलग-अलग सुझाव और टिप्पणियां सामने आना स्वाभाविक है। आयोग के अनुसार, अंतिम निर्णय लेने से पहले अधिकारियों और सदस्यों की ओर से सवाल उठाना तथा सुझाव देना प्रक्रिया का हिस्सा है।

आयोग के सभी आदेश वैधानिक प्रक्रिया के तहत जारी

निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसके आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी किए जाते हैं। आयोग ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों से संबंधित वर्ष 2023 के कानून का भी उल्लेख किया है। उसका कहना है कि निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया में निर्धारित वैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाता है।आयोग के अनुसार, किसी आदेश के प्रारूप तैयार होने के दौरान सदस्यों की ओर से परिचालन संबंधी सवाल या सुझाव दिए जाना सामान्य बात है। इन टिप्पणियों का उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

अलग-अलग राय को बताया सामान्य संस्थागत प्रक्रिया

चुनाव आयोग ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना किसी भी संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा है। अंतिम निर्णय से पहले विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाती है और उसके बाद आयोग अपना निर्णय लेता है। आयोग ने यह भी कहा कि केवल निर्वाचन आयुक्त ही नहीं, बल्कि उसके अधिकारी भी चुनावी व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव दे सकते हैं।आयोग का कहना है कि आंतरिक टिप्पणियों को अंतिम निर्णय के समान मानना उचित नहीं होगा। उसके अनुसार, किसी विषय पर सुझाव या आपत्ति दर्ज होना और उस पर अंतिम निर्णय लिया जाना, दोनों अलग-अलग चरण हैं।

दस महीने की चुनिंदा टिप्पणियों से पूरी तस्वीर नहीं मिलती: आयोग

निर्वाचन आयोग ने कहा कि पिछले दस महीनों के दौरान सामने आई कुछ चुनिंदा आंतरिक टिप्पणियों को अलग से देखने पर पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। आयोग के मुताबिक, इसी अवधि में अनेक मंजूरियां दी गईं, फैसले लिए गए, निर्देश जारी किए गए और करीब 40 नई पहल भी शुरू की गईं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और विशेष गहन पुनरीक्षण सहित कई चुनावी सुधारों पर काम किया गया है। उसके अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान लिए गए ये फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।

बिहार समेत कई राज्यों में चुनाव कराने का भी दिया हवाला

निर्वाचन आयोग ने अपने पक्ष में हाल में कराए गए विभिन्न चुनावों और चुनाव संबंधी गतिविधियों का भी उल्लेख किया। आयोग के अनुसार, बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रक्रिया संचालित की गई।आयोग ने कहा कि इन चुनावों के दौरान व्यापक प्रशासनिक और परिचालन तंत्र का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा चुनाव से संबंधित कई मंजूरियां और निर्देश भी जारी किए गए। आयोग ने इसे उसकी नियमित संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का हिस्सा बताया।

मतदाता सूची में सुधार को लेकर एसआईआर जारी

विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची की समीक्षा और मतदाताओं से संबंधित विवरणों के सत्यापन की प्रक्रिया चलाई जा रही है। निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी वर्ष 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित सेवाएं उपलब्ध हैं। इनमें गणना प्रपत्र भरने, पिछली पुनरीक्षित मतदाता सूची में नाम खोजने और संबंधित दस्तावेज जमा करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। आयोग की ओर से जारी पहले के निर्देशों में भी कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण संविधान के अनुच्छेद 324 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और संबंधित नियमों के तहत कराया जा रहा है।

डिजिटल व्यवस्था की सुरक्षा पर भी आयोग ने दी जानकारी

निर्वाचन आयोग ने अपनी डिजिटल व्यवस्था और मतदाता संबंधी आंकड़ों की सुरक्षा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। आयोग के अनुसार, उसके डिजिटल मंचों को अनधिकृत छेड़छाड़ और आंकड़ों में हेरफेर रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित किया जाता है। आयोग ने कहा कि सूचना-प्रौद्योगिकी सुरक्षा जांच और लेखा-परीक्षण जैसी व्यवस्थाएं राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों की सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले सामान्य साइबर सुरक्षा उपाय हैं। मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने जैसे कार्य संबंधित वैधानिक अधिकारियों द्वारा कानून के तहत निर्धारित शक्तियों के अनुसार किए जाते हैं।

संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाने की बात

निर्वाचन आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वह अपने संवैधानिक दायित्वों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है और वह इसी जिम्मेदारी के तहत चुनावी प्रक्रिया को संचालित करता रहेगा।आयोग ने यह भी संकेत दिया कि आंतरिक विचार-विमर्श को संस्थागत प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। उसका कहना है कि उसके अंतिम फैसले और आधिकारिक निर्देश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया तथा पूर्ण आयोग के निर्णय के आधार पर जारी किए जाते हैं।

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