एम्स गोरखपुर में पहली बार टेम्पोरल बोन डिसेक्शन वर्कशॉप:देशभर के ENT विशेषज्ञों ने सीखी जटिल सर्जरी की बारीकियां
एम्स गोरखपुर में ईएनटी सर्जरी के क्षेत्र में डॉक्टरों का कौशल बढ़ाने और कान की जटिल सर्जरी की बारीकियां सिखाने के लिए पहली टेम्पोरल बोन डिसेक्शन कार्यशाला आयोजित की गई। ईएनटी और एनाटॉमी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुई दो दिवसीय इस कार्यशाला में देशभर से आए ईएनटी डॉक्टरों को सर्जरी की नई तकनीकें सिखाई गईं और उनका व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें प्रतिभागियों को कान की सूक्ष्म संरचना को समझने के साथ सुरक्षित सर्जरी के लिए जरूरी तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यशाला में एम्स नई दिल्ली, एसजीपीजीआई लखनऊ और बीएचयू वाराणसी के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने टेम्पोरल बोन यानी कान के आसपास स्थित खोपड़ी की जटिल हड्डी की संरचना, उसकी सूक्ष्म शारीरिक बनावट और आंतरिक कान (इनर ईयर) के विभिन्न हिस्सों की जानकारी दी। साथ ही टाइम्पेनो-मास्टॉइड सर्जरी की आधुनिक तकनीकों और ऑपरेशन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया। कैडेवरिक डिसेक्शन से समझीं सर्जरी की बारीकियां कार्यशाला की खास बात यह रही कि प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि कैडेवरिक डिसेक्शन के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इस प्रक्रिया में मानव शरीर की संरचना का अध्ययन कर सर्जरी से जुड़े महत्वपूर्ण हिस्सों को करीब से समझने का अवसर मिलता है। इससे चिकित्सकों को कान की जटिल शारीरिक संरचना, आसपास मौजूद संवेदनशील हिस्सों और ऑपरेशन के दौरान जरूरी सावधानियों को समझने में मदद मिली। कान की सूक्ष्म शल्यक्रियाओं में बेहद सटीकता की जरूरत होती है। ऐसे में टेम्पोरल बोन की त्रि-आयामी संरचना को समझना ईएनटी सर्जनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को सुरक्षित शल्यक्रिया के सिद्धांतों और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी दी। एम्स दिल्ली, एसजीपीजीआई और बीएचयू के विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण कार्यशाला में एम्स नई दिल्ली के डॉ. प्रेम सागर, एसजीपीजीआई लखनऊ की डॉ. नसरीन और बीएचयू वाराणसी के डॉ. शिवा एस. ने विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर प्रतिभागियों को टाइम्पेनो-मास्टॉइड सर्जरी की विभिन्न तकनीकों और टेम्पोरल बोन की सूक्ष्म शारीरिक रचना से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। जम्मू, बठिंडा, दिल्ली और लखनऊ समेत देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए ईएनटी चिकित्सकों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के चिकित्सा अधिकारी भी कार्यशाला में शामिल हुए। अलग-अलग संस्थानों से आए चिकित्सकों को विशेषज्ञों से सीधे सीखने और अपने व्यावहारिक कौशल को बेहतर बनाने का अवसर मिला। चिकित्सा शिक्षा और उन्नत प्रशिक्षण पर जोर समापन समारोह में एम्स गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक ने आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की हैंड्स-ऑन कार्यशालाएं युवा सर्जनों के कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। व्यावहारिक प्रशिक्षण से चिकित्सकों को जटिल शल्यक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित करने और सुरक्षित सर्जरी के सिद्धांतों को सीखने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि एम्स गोरखपुर चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उन्नत शल्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्टता स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। संस्थान में राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन से चिकित्सकों को नई तकनीकों और विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा। भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। ईएनटी और एनाटॉमी विभाग ने मिलकर किया आयोजन कार्यशाला का आयोजन ईएनटी विभाग के डॉ. अश्वनी चौधरी, डॉ. पंखुरी मित्तल और डॉ. रुचिका अग्रवाल ने किया। एनाटॉमी विभाग ने प्रो. विवेक मिश्रा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों विभागों के संकाय सदस्यों, रेजिडेंट चिकित्सकों और आयोजन समिति के समन्वित प्रयासों से कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यशाला में शामिल चिकित्सकों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताया। प्रतिभागियों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से जटिल शल्यक्रियाओं की व्यावहारिक समझ बढ़ती है और विशेषज्ञों के अनुभव से सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने भविष्य में भी एम्स गोरखपुर में ऐसे उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने की अपेक्षा जताई।
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