ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष का हमला, एसआईआर विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट के बाद विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, असदुद्दीन ओवैसी समेत कई नेताओं ने जांच, कार्रवाई और जवाबदेही की मांग की। वहीं, चुनाव आयोग ने मतभेद के दावों को खारिज करते हुए अलग-अलग राय को सामान्य प्रक्रिया बताया है।

Sep 23, 2026 - 18:04
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ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष का हमला, एसआईआर विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026

चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया पर रोक की मांग की है। वहीं भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि वह किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं का बचाव कर रही है।

एसआईआर विवाद पर ममता बनर्जी का बड़ा हमला

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कामकाज में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए। ममता बनर्जी ने यहां तक कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी होनी चाहिए और उनके कार्यकाल में हुए चुनावों को दोबारा कराया जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी के सूचना तंत्र का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ने पुलिस का दुरुपयोग किया और भाजपा समर्थक लोगों की नियुक्ति से जुड़ी गतिविधियों में भूमिका निभाई। ममता ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की रक्षा जरूरी है। ये सभी आरोप ममता बनर्जी के राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं।

उमर अब्दुल्ला ने भी उठाए सवाल

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर पहले से शिकायतें सामने आती रही हैं और परिसीमन उनके लिए महत्वपूर्ण विषय रहा है। उमर अब्दुल्ला ने प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठाए तथा कहा कि चुनावों में जनता का विश्वास बना रहना लोकतंत्र के लिए जरूरी है।

उमर अब्दुल्ला ने चुनाव प्रक्रिया में जनता के भरोसे को लोकतंत्र की नींव से जोड़ते हुए कहा कि यदि लोगों का चुनाव व्यवस्था से विश्वास उठ गया तो लोकतांत्रिक भागीदारी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से सामने आए विवाद पर विचार करने की बात कही। उनके बयान में आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी खबरों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई।

एमके स्टालिन ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा

द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए और उनके पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठाया। स्टालिन का यह बयान उस समय आया जब एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की चर्चा राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बनी हुई है।

तेजस्वी यादव ने चुनाव दोबारा कराने की मांग की

राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने बिहार और बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इन चुनावों में गड़बड़ी हुई और दोनों राज्यों में दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए। तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया।

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी किसी विशेष व्यक्ति को बचाने की कोशिश नहीं कर रही है। उनके अनुसार भाजपा का प्रयास भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ फैलाए जा रहे दुष्प्रचार का मुकाबला करना है। उन्होंने विपक्ष द्वारा न्यायालय का रुख किए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास महत्वपूर्ण है। संबित पात्रा ने एसआईआर को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के 27 मई 2026 के फैसले का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने एसआईआर की वैधता को बरकरार रखा है और यदि किसी को चुनाव आयोग या मतदान मशीनों पर भरोसा नहीं है तो उसे जनता पर भरोसा रखना चाहिए। भाजपा की ओर से इस पूरे विवाद को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसे के मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया गया।

एसआईआर विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सामने आए विवाद ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। विपक्षी नेताओं की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, एसआईआर प्रक्रिया पर रोक और कुछ चुनावों को दोबारा कराने जैसी मांगें सामने आई हैं। दूसरी ओर भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया में जनता के भरोसे को महत्वपूर्ण बताया है। फिलहाल इस पूरे मामले में विपक्ष और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला, एमके स्टालिन और तेजस्वी यादव ने अलग-अलग मुद्दों पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। उपलब्ध सामग्री में इन राजनीतिक दावों के बीच अंतिम निष्कर्ष के रूप में किसी स्वतंत्र जांच का परिणाम प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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