झांसी में लावारिश मौत मरे लोगों का 'गया' में पिंडदान:आठ सौ आत्माओं के पिंड लेकर झांसी से रवाना हुए संस्था के सदस्य, बोले-'जिनका कोई नहीं उनके हम हैं'
झांसी में कुछ पिंड उन लोगों के थे, जिनके नाम और गोत्र लेने के लिए उनके अपने मौजूद थे। लेकिन कुछ पिंड उन आत्माओं के लिए भी थे, जिनका नाम लेने वाला इस दुनिया में कोई नहीं बचा। इन्हीं पिंडों को लेकर सोमवार सुबह झांसी से आठ सदस्यीय दल चंबल एक्सप्रेस से बिहार के गया के लिए रवाना हुआ। पितृपक्ष में गया पहुंचकर इन पिंडों का पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया जाएगा। दल का नेतृत्व डॉ. जितेंद्र कुमार तिवारी कर रहे हैं। उनके साथ संस्था के अन्य सदस्य भी गया गए हैं। रविवार को पहुज किनारे हुआ था तर्पण
इससे एक दिन पहले रविवार को शिवपुरी रोड की पहुज नदी के तट पर अलग तरह का पितृकर्म हुआ। यहां जिला जनकल्याण महासमिति और रानी झांसी फाउंडेशन की ओर से सामूहिक तर्पण और पिंड पूजन कराया गया था। लोग अपने घरों से निकलकर यहां अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और दूसरे पूर्वजों को याद करने पहुंचे थे। नाम और गोत्र का उच्चारण करते हुए पिंड पूजन हुआ। इसी के बीच कुछ पिंड उन अज्ञात, अनाथ और लावारिस दिवंगतों के लिए भी रखे गए, जिनकी पहचान तक शायद किसी को मालूम नहीं। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्र गूंजते रहे और श्रद्धालु अपने पूर्वजों को याद करते रहे। लेकिन उन पिंडों के पीछे एक ऐसी कहानी थी, जिसमें किसी परिवार का नाम नहीं था, सिर्फ एक भावना थी कि जिसका अपना कोई नहीं, उसके लिए भी कोई खड़ा हो। गया नहीं जा सके, तो यहां से भेजे पूर्वजों के पिंड
इस आयोजन में ऐसे परिवारों के पूर्वजों के लिए भी पिंड पूजन कराया गया, जो किसी कारण से गया नहीं जा सके। किसी के लिए दूरी बाधा थी तो किसी के लिए समय और परिस्थितियां। उन्होंने अपने पूर्वजों का नाम और गोत्र देकर यहां पिंड पूजन कराया। अब इन्हीं पिंडों को गया ले जाकर पिंडदान किया जाएगा। कई साल से निभा रहे हैं यह संकल्प डॉ. जितेंद्र कुमार तिवारी का कहना है कि पितृपक्ष सिर्फ अपने पुरखों को याद करने का अवसर नहीं है। ऐसे लोगों को याद करना भी जरूरी है, जिनके जाने के बाद उनके नाम पर दिया जलाने वाला कोई नहीं बचा।
इसी सोच के साथ वह पिछले कई वर्षों से अज्ञात, अनाथ और लावारिस दिवंगतों के लिए गया में पिंडदान और श्राद्ध कर्म कराते आ रहे हैं। इस बार भी रविवार को पहुज नदी के किनारे पिंड पूजन के बाद सोमवार को इन्हें लेकर दल गया के लिए निकल पड़ा। अब गया की धरती पर इन पिंडों के साथ उन लोगों के लिए भी प्रार्थना होगी, जिन्हें शायद जिंदगी में अपना कहने वाला कोई नहीं मिला। धर्माचार्यों की मौजूदगी में हुआ पूजन
पिंड पूजन और तर्पण का अनुष्ठान जिला धर्माचार्य महंत विष्णु दत्त स्वामी, महानगर धर्माचार्य आचार्य पं. हरिओम पाठक, मंडलाचार्य लल्लन महाराज, आचार्य बृजकिशोर हरभजन भार्गव, आचार्य बसंत विष्णु गोलवलकर, आचार्य मनोज चतुर्वेदी, मनोज थापक, पं. मार्तंड स्वामी, आचार्य उमेश दुबे और पं. राजीव पाठक सहित धर्माचार्यों के मार्गदर्शन में हुआ।
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