कानपुर देहात में क्रय केंद्रों पर खरीद सुस्त, किसान परेशान:धान खरीद में फार्मर आईडी और डिजिटल क्रॉप सर्वे की खामियां बनी बाधा

Nov 03, 2026 - 12:16
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कानपुर देहात में क्रय केंद्रों पर खरीद सुस्त, किसान परेशान:धान खरीद में फार्मर आईडी और डिजिटल क्रॉप सर्वे की खामियां बनी बाधा
कानपुर देहात में किसानों की फसल सरकारी क्रय केंद्रों तक पहुंचने से पहले ही तकनीकी और कागजी कार्यवाही में उलझती नजर आ रही है। खरीफ की फसल खरीदने के लिए जिले में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, लेकिन सरकारी खरीद की रफ्तार बेहद सुस्त है। बाजरा की खरीद शुरू हुए करीब एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक सरकारी लक्ष्य के सापेक्ष महज 2 प्रतिशत खरीद ही हो सकी है। वहीं, मक्का बेचने के लिए किसान सरकारी केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। इसकी वजह मंडियों में सरकारी केंद्रों की तुलना में बेहतर भाव मिलना है। उधर, 1 नवंबर से धान की खरीद शुरू होने के बावजूद क्रय केंद्रों पर अब तक खरीद शुरू नहीं हो सकी है। जिले में 43 केंद्रों पर मोटे अनाज की खरीद की व्यवस्था खाद्य विभाग ने जिले में ज्वार, बाजरा और मक्का की खरीद के लिए कुल 43 क्रय केंद्र बनाए हैं, जबकि धान खरीद के लिए 56 केंद्र निर्धारित किए गए हैं। केंद्रों पर प्रभारी भी तैनात हैं। किसानों के बैठने और पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके बावजूद किसान सरकारी खरीद का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में अब तक करीब 260 मीट्रिक टन बाजरा की खरीद हुई है, जो सरकारी लक्ष्य का महज 2 प्रतिशत है। इसकी एक वजह सरकारी और बाजार भाव में बहुत अधिक अंतर न होना बताया जा रहा है। किसान सरकारी केंद्रों पर रजिस्ट्रेशन और अन्य औपचारिकताओं में उलझने के बजाय बाजार में ही अपनी उपज बेच रहे हैं। वहीं, मक्का की बाजार में मांग और बेहतर भाव मिलने के चलते सरकारी केंद्रों पर इसकी आवक नहीं बढ़ पा रही है। फार्मर आईडी और डिजिटल क्रॉप सर्वे में खामियां बनी बाधा धान खरीद में सबसे बड़ी बाधा फार्मर आईडी और डिजिटल क्रॉप सर्वे की खामियां बन रही हैं। रजिस्ट्रेशन के दौरान किसान की जमीन का विवरण फार्मर आईडी से जुड़ता है। इसके बाद एग्रीस्टैक के रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन होता है कि किस गाटा संख्या में कौन सी फसल बोई गई है। लेकिन कई किसानों की जमीन फार्मर आईडी में दर्ज नहीं है। वहीं, डिजिटल क्रॉप सर्वे में भी कई गाटा संख्या छूट गए हैं, जिनमें बोई गई फसल का विवरण ऑनलाइन दर्ज नहीं हो पाया है। ऐसे में किसान चाहकर भी अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करा पा रहे हैं। शासन स्तर पर कमेटी गठित, समाधान का इंतजार जिला खाद्य विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए शासन स्तर से अधिकारियों की कमेटी गठित की गई है। जल्द ही इसका समाधान होने की उम्मीद है। इसके बाद धान खरीद में तेजी आने की संभावना है। अब देखना होगा कि किसानों को रजिस्ट्रेशन से जुड़ी तकनीकी और कागजी दिक्कतों से कब तक राहत मिलती है और सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद की रफ्तार कब तेज होती है।

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