दीवाली पर जूते पहनकर खिल उठे मासूम चेहरे:मोटिवेजर्स क्लब की ओर से हुआ आयोजन, स्टेशनरी और जूते वितरित की
दिवाली खुशियों का त्यौहार है और हम सभी इस मौके पर नए कपड़े एवं अन्य समान खरीदते हैं। मोटिवेजर्स क्लब ने दिवाली पर दूसरों के लिए खुशियां बांटने का प्लान बनाया और इस थीम को ध्यान में रख कर मोटिवेजर्स क्लब ने कैंपेन (बादल पे पांव है) को 5 दिनों तक चलाया। कैंपेन में जरूरतमंद बच्चों को नए जूते/चप्पल एवं स्कूल की स्टेशनरी वितरित की गई। 2 साल से लेकर सभी उम्र के लोगों को जूते चप्पल और स्टेशनरी बाटी गई। नए जूते/सैंडल देख कर मानो बच्चों के चेहरे खिल उठे तो कुछ ने मिलने पर खुशी के साथ आश्चर्य भी किया "नया सामान तो बहुत कम ही पहनने को मिलता है"। क्लब पिछले 3 साल से इस कैंपेन को शेफ नितिन मोहन के साथ दिवाली से कुछ दिन पहले चलाते रहे हैं और इस बार भी ऐसा ही किया जिससे लगभग 300 बच्चों को खुशियां बांटी। शेफ नितिन का कहना था कि ये 3 साल से डिस्ट्रीब्यूट करने से हमें ये पता चल गया है कि बिना चप्पल नंगे पैर गर्मी की तपन और सर्दी में ठिठुरते पैर से चलने वाले बच्चों के लिए ये बहुत आवश्यक और बेसिक जरूरत है। हम हमेशा से ही झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को नए समान वितरित करते आए हैं और आगे भी प्रयास जारी रहेगा। इस कैंपेन को मजबूती देने और सहयोगी के तौर पर जुड़ने वाली एंटरप्रेन्योर अंकिता बरारा कहती हैं "जब मुझे पता चला कि इस तरह के कैंपेन से बच्चों को नई वस्तुएं दी जा रही हैं तो मैने भी इसमें जुड़कर लोगो तक खुशी बांटने का प्रयास किया। जरूरतमंद लोग अपना पेट तो कैसे करके भर लेते हैं पर ये नए कपड़े जूते और स्कूल स्टेशनरी उनके लिए लग्जरी की तरह होती है। कम संसाधनों में इनको खरीद पाना उनके लिए बहुत मुश्किल होता है।" सामाजिक कार्यकर्ता और बिजनेसमैन मोहित अग्रवाल ने भी बच्चों के लिए अपना समय देने और सामग्री वितरण करने के पीछे के उद्देश्य को शेयर करते हुए बताया " अपनी बिजी लाइफ़ से समय निकाल कर इन बच्चों के साथ समय बिताना बहुत ही सुखद अनुभव देता है। साथ ही ये भी एहसास दिलाता है कि खुद के लिए तो सभी नया समान खरीदते हैं पर जब इन बच्चों के चेहरे की खुशी दीवाली के त्यौहार पर नए समान मिलने पर आप देखते हैं तो समाज के साथ त्यौहार मनाने के भाव का एहसास कर पाते हैं। अंत में मोटिवेजर्स क्लब के फाउंडर और इस कैंपेन को डिजाइन करने वाले गौरव छाबड़ा ने बताया कि हम चाहते हैं हर बार कुछ नया सोच कर जरूरतमंद को त्यौहार पर दिया जाए। पहले भी हमने कोरोना काल के समय सड़क किनारे दुकान लगाने वाले से दिया और मिट्टी के खिलौने सब खरीद लिए थे क्योंकि उस समय बिक्री बहुत कम हो रही थी और फिर वही सहयोग से अन्य लोगों को वितरित करवा दिया था। हमारा प्रयास है कि हम आगे भी इसी तरह के कैंपेन करते रहेंगे।
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