2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’! व्यापारियों ने क्यों लिया बड़ा फैसला?
2 अक्टूबर को देशभर के कई व्यापारी संगठन ‘नो यूपीआई डे’ मनाने की तैयारी कर रहे हैं। व्यापारियों का यह विरोध 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट के खिलाफ है। नए नियम के तहत 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित व्यापारी यूपीआई लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 24 सितंबर 2026
देशभर के कई व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का आह्वान किया है। व्यापारियों का विरोध 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर है। नए नियम के तहत निर्धारित परिस्थितियों में 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेन-देन रखी गई है।
2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ का ऐलान
देश के कई व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन व्यापारी संगठनों की ओर से यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार नहीं करने का आह्वान किया गया है। कारोबारियों का कहना है कि नए शुल्क से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। इस विरोध के दौरान ग्राहकों को भुगतान के लिए नकद या अन्य माध्यमों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
किन संगठनों ने किया समर्थन
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर सहित कई व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर के अभियान का समर्थन किया है। इनके अलावा अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्पाद वितरक महासंघ, अखिल भारतीय मोबाइल विक्रेता संघ, अखिल भारतीय ज्वैलर्स एवं स्वर्णकार महासंघ और खुदरा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी समर्थन की बात कही है। महाराष्ट्र के संगठन ने देश के दूसरे हिस्सों के व्यापारिक संगठनों से भी संपर्क करने की जानकारी दी है।
व्यापारियों को किस बात पर आपत्ति है
व्यापारियों की मुख्य आपत्ति 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर है। नए ढांचे के अनुसार निर्धारित व्यापारी-ग्राहक यूपीआई लेन-देन में 2,000 रुपये से अधिक की राशि पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। यह शुल्क ग्राहक से सीधे लेने के बजाय व्यापारी पक्ष पर लागू किया जाना है। सरकार और संबंधित संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों पर यह शुल्क डालने की अनुमति नहीं होगी।
क्या है मर्चेंट डिस्काउंट रेट
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से भुगतान व्यवस्था में शामिल संस्थाओं को दिया जाता है। डिजिटल भुगतान को पूरा करने में बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और अन्य संबंधित संस्थाएं तकनीकी ढांचा उपलब्ध कराती हैं। नए नियम के तहत निर्धारित व्यापारी भुगतान में 2,000 रुपये से अधिक की राशि पर 0.40 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। हालांकि, एक लेन-देन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये निर्धारित की गई है।
300 रुपये से अधिक नहीं होगा शुल्क
नए नियम के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यापारी लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत की दर से शुल्क लगेगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। यानी बहुत बड़ी राशि के भुगतान पर भी निर्धारित सीमा से अधिक एमडीआर नहीं लिया जाएगा। वहीं, 2,000 रुपये तक के पात्र व्यापारी यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर शून्य रहेगा।
ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा
नए नियम का शुल्क व्यापारी पक्ष पर लागू किया गया है और सामान्य ग्राहक से अलग से यूपीआई शुल्क लेने का प्रावधान नहीं है। सरकार ने बैंकों और भुगतान से जुड़ी संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि व्यापारी इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले यूपीआई भुगतान भी शुल्क से बाहर रहेंगे। इसके अलावा कुछ छोटे व्यापारियों को भी निर्धारित शर्तों के तहत छूट दी गई है।
छोटे व्यापारियों को मिलेगी राहत
नए शुल्क ढांचे में छोटे व्यापारियों के लिए भी अलग प्रावधान रखा गया है। जिन छोटे व्यापारियों को यूपीआई क्यूआर के माध्यम से एक महीने में 1 लाख रुपये तक की राशि प्राप्त होती है, उन्हें नए एमडीआर से छूट दी गई है। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के पात्र व्यापारी लेन-देन पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इस वजह से नए शुल्क का प्रभाव सभी यूपीआई भुगतानों पर समान रूप से नहीं पड़ेगा।
पहले भी कई जगह हुआ ‘नो यूपीआई डे’ का विरोध
नए शुल्क को लेकर व्यापारियों का विरोध अलग-अलग स्थानों पर पहले भी सामने आया है। व्यापारी संगठन इसे अपनी लागत और कारोबार से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं तथा सरकार के सामने अपनी मांग रखने की तैयारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र के व्यापारिक संगठनों ने भी इस विषय पर व्यापक स्तर पर चर्चा और सरकार से बातचीत की बात कही है। 2 अक्टूबर का प्रस्तावित अभियान इसी विरोध को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखने की कोशिश के रूप में बताया जा रहा है।
यूपीआई पूरी तरह बंद नहीं होगा
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 2 अक्टूबर को पूरे देश की यूपीआई सेवा तकनीकी रूप से बंद होने की घोषणा नहीं हुई है। ‘नो यूपीआई डे’ व्यापारी संगठनों की ओर से किया गया विरोध अभियान है, जिसके तहत संबंधित व्यापारी उस दिन यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करने का आह्वान कर रहे हैं। इसलिए इसे देशभर में यूपीआई व्यवस्था के आधिकारिक रूप से बंद होने के रूप में नहीं समझना चाहिए।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया शुल्क ढांचा
नया एमडीआर ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला है। इसके तहत निर्धारित व्यापारी भुगतान में 2,000 रुपये से अधिक की राशि पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लागू होगा और इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान और 2,000 रुपये तक के पात्र व्यापारी भुगतान पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। ऐसे में 2 अक्टूबर का ‘नो यूपीआई डे’ व्यापारियों के विरोध का एक प्रमुख प्रस्तावित दिन है, जबकि वास्तविक शुल्क व्यवस्था 15 अक्टूबर से शुरू होगी।
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