परशुराम सेना अध्यक्ष ने सत्ता को उखाड़ने की बात कही:प्रयागराज में बोले - धर्म से समझौता नहीं, ब्राह्मण समाज सत्ता बनाना भी जानता है
राष्ट्रीय परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक पंडित राजेश कृष्णकांत मिश्र मंगलवार को प्रयागराज पहुंचे। एयरपोर्ट पर प्रदेश अध्यक्ष पंडित शिवदत्त शुक्ल, राष्ट्रीय महासचिव राकेश मिश्र, मीडिया प्रभारी गंगा प्रसाद मिश्र समेत अन्य पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं और पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। एयरपोर्ट पर लोगों को संबोधित करते हुए पंडित राजेश मिश्र ने ब्राह्मण समाज की वर्तमान स्थिति, सनातन संस्कृति और राजनीतिक सत्ता को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने समाज में बढ़ती कुरीतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज को अपने आदर्शों और मूल्यों के अनुरूप आचरण करना चाहिए। ब्राह्मण समाज की स्थिति पर जताई चिंता
राजेश मिश्र ने कहा कि ब्राह्मण समाज को धर्मशास्त्रों और परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान मिला है, लेकिन आज समाज का एक बड़ा हिस्सा अपने मूल आदर्शों से दूर होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 50 फीसदी ब्राह्मण अपने ब्राह्मणत्व से विमुख होकर गलत नीतियों का अनुसरण कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इससे समाज के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज का काम केवल सत्ता का अनुसरण करना नहीं, बल्कि समाज को दिशा दिखाना भी है। उन्होंने कहा कि आज समाज का एक हिस्सा सत्ता के सामने नतमस्तक होकर केवल अनुयायी की भूमिका निभा रहा है, जो स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “सत्ताएं आती-जाती रहेंगी, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि ब्राह्मण समाज सत्ता बनाना जानता है, तो उसे उखाड़कर फेंकने की ताकत भी रखता है।” पंडित राजेश मिश्र ने सनातन संस्कृति और धर्म की रक्षा पर जोर देते हुए कहा कि धर्म के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि संगठन हिंदुत्व और धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “धर्म पर आंच आए तो टकराना जरूरी है, अगर जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है।” उन्होंने इन पंक्तियों को धर्म और शास्त्रों की रक्षा के लिए आगे रहने वाले सनातनी लोगों को समर्पित किया।
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