पटाखा-बाजार में 56 दुकानों पर एक फायर एक्सटिंग्विशर:पानी के ड्रम आधे से कम भरे, दुकानदारों ने लाइसेंस के नाम पर 8 हजार रुपए देने का किया दावा
गाजीपुर के लंका मैदान में दीपावली के लिए लगी पटाखों की 56 अस्थायी दुकानों पर सुरक्षा इंतजाम अधूरे मिले। शुक्रवार रात करीब 8 बजे दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि हर दुकान पर दो फायर एक्सटिंग्विशर रखना अनिवार्य है, लेकिन मौके पर एक ही अग्निशमन यंत्र मिला। दो दुकानों के बीच आग रोकने और लोगों के निकलने के लिए छोड़ी गई तीन मीटर की जगह पर पटाखों की पेटियां रखी थीं। कुछ जगह दुकानदारों की बाइक और ई-रिक्शा भी खड़े मिले। दुकानों के सामने रखे पानी के ड्रम भी आधे से कम भरे थे। खास बात यह है कि अग्निशमन विभाग ने दुकानदारों को एनओसी के साथ सुरक्षा संबंधी निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद मौके पर इनका पालन होता नहीं दिखा। मैदान में पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन खामियां दूर कराने की कार्रवाई नजर नहीं आई। दो फायर एक्सटिंग्विशर जरूरी, मौके पर एक ही मिला अग्निशमन विभाग की ओर से जारी सुरक्षा संबंधी पर्ची में प्रत्येक अस्थायी दुकान पर दो फायर एक्सटिंग्विशर रखने का स्पष्ट निर्देश है। इसके अलावा दो बाल्टी बालू और पर्याप्त पानी की व्यवस्था भी अनिवार्य है। लेकिन पड़ताल में हर दुकान पर एक ही अग्निशमन यंत्र मिला। दुकानों के सामने रखे पानी के ड्रम भी आधे से कम भरे थे। विभागीय निर्देशों के मुताबिक प्रत्येक दुकान को तीन तरफ से टीनशेड से ढकना जरूरी है। दो दुकानों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी भी निर्धारित की गई है, ताकि आग एक दुकान से दूसरी दुकान तक न पहुंचे और आपात स्थिति में लोग सुरक्षित बाहर निकल सकें। तीन मीटर की जगह पर पटाखों की पेटियां और बाइक पड़ताल में सामने आया कि दुकानों के बीच छोड़ी गई तीन मीटर की जगह पर पटाखों की पेटियां रखी थीं। कुछ जगह दुकानदारों की बाइक और ई-रिक्शा भी खड़े मिले। जबकि सुरक्षा निर्देशों के अनुसार दुकानों के सामने और आसपास दोपहिया व चारपहिया वाहन खड़े करने पर रोक है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में लोगों के निकलने का रास्ता बाधित हो सकता है। दो अग्निशमन यंत्रों की जगह एक ही यंत्र और आधे से कम भरे पानी के ड्रम से शुरुआती बचाव कितना प्रभावी होगा, यह बड़ा सवाल है। 8 हजार रुपए में लाइसेंस और दूसरी व्यवस्थाओं का दावा लाइसेंस लेने वाले कुछ दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक दुकान के लाइसेंस और अन्य व्यवस्थाओं के लिए करीब 8 हजार रुपए दिए गए हैं। उनके मुताबिक इसमें लाइसेंस फीस, कमेटी की ओर से जमीन के नाम पर लिए गए 800 रुपए, तीन तरफ टीनशेड लगाने, दो फायर एक्सटिंग्विशर और अन्य खर्च शामिल हैं। दुकानदारों का दावा है कि पटाखों की दुकान लगाने के लिए लाइसेंस की व्यवस्था कचहरी में पान की दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति के माध्यम से कराई जाती है। दुकानदार उसी व्यक्ति को रकम देते हैं और वह लाइसेंस दिलाने का काम करता है। 'कई देवताओं को देना पड़ता है पैसा' लाइसेंस दिलाने के नाम पर दुकानदारों से 8 हजार रुपए लेने वाले व्यक्ति से जब इस बारे में बात की गई तो उसने कहा कि इसमें 'बहुत सारे देवता हैं, जिनको पूजना पड़ता है।' उसने बताया कि पहले 5 हजार रुपए लिए जाते थे। इसके बाद यह रकम 6 हजार और फिर 7 हजार हुई। अब 8 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। उसके मुताबिक इस रकम में कई लोगों को भी पैसा देना पड़ता है, तभी लाइसेंस मिल पाता है। हालांकि, रकम के बंटवारे और भुगतान से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारी बोले- छोटी दुकानें हैं, दो यंत्र कहां से लाएंगे मौके पर मिली खामियों के संबंध में प्रभारी अग्निशमन अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि दुकानदार छोटे हैं, इसलिए दो फायर एक्सटिंग्विशर की जगह एक ही रखा गया है। उन्होंने कहा कि दुकानों पर बालू और पानी की व्यवस्था है और तीन मीटर की दूरी भी रखी गई है। जब उन्हें निर्धारित खाली जगह पर पटाखों की पेटियां और बाइक खड़ी होने की जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा कि दोपहर में निरीक्षण किया था। अगले दिन सुबह दोबारा निरीक्षण करेंगे। यदि ऐसा है तो उसे दिखवा लेंगे। जब उनसे बताया गया कि दुकानदारों का दावा है कि उन्होंने दो फायर एक्सटिंग्विशर के लिए भी रकम दी है और विभाग की एनओसी व सुरक्षा संबंधी पर्ची में दो अग्निशमन यंत्र रखने का निर्देश है, तो उन्होंने कहा कि छोटी दुकानें हैं, दो फायर एक्सटिंग्विशर कहां से लेकर आएंगे। मैदान में पुलिस-अग्निशमन कर्मी, फिर भी नहीं सुधरे इंतजाम हैरानी की बात यह है कि पटाखा बाजार में पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद हैं। इसके बावजूद सुरक्षा संबंधी खामियां दूर कराने की कार्रवाई नजर नहीं आई। तीन मीटर की जगह पर सामान और वाहन खड़े हैं। पानी के ड्रम आधे से कम भरे हैं और दो अनिवार्य अग्निशमन यंत्रों की जगह एक ही उपलब्ध है। आतिशबाजी के दौरान छोटी सी चिंगारी भी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब विभाग ने सुरक्षा के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है, तो उसका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी किसकी है? छोटी दुकान होने के आधार पर एक अग्निशमन यंत्र रखने की छूट किस नियम के तहत दी गई है? और दुकानदारों से दो अग्निशमन यंत्रों के खर्च के नाम पर रकम लेने के दावे की जांच कौन करेगा?
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