राममंदिर चंदा विवाद UP चुनावों का मुद्दा नहीं बनना चाहिए:विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने जांच नतीजों पर संतोष जताया,बोले-उम्मीद, राजनीति बंद हो जाएगी
VHP के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट आलोक कुमार ने शनिवार को कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे की कथित चोरी से जुड़े विवाद को अब खत्म कर देना चाहिए और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले इसे राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट की बनाई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की चार्जशीट में मंदिर के निर्माण में काम करने वाले या ट्रस्ट से जुड़े लोगों की तरफ से कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई। एक बयान में, VHP के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट आलोक कुमार ने बताया कि चढ़ावा गिनने का काम करने वाले कुछ लोगों ने यह अपराध किया था और वे अब जेल में हैं। उन्होंने कहा, "इसके अलावा कोई और गड़बड़ी नहीं हुई। बाकी हिसाब-किताब भी ठीक है। भगवान राम के लिए दी गई सभी कीमती चीजें सुरक्षित हैं और उनका सही हिसाब रखा गया है। ट्रस्टियों की तरफ से कोई गड़बड़ी या अपराध नहीं पाया गया।" VHP ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जांच के बाद दाखिल की गई लगभग 70,000 पन्नों की चार्जशीट ने उन सभी "साजिशों" को बेनकाब कर दिया है, जिनका मकसद ट्रस्टियों, ट्रस्ट के महासचिव, हिंदू अभियान, विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र और मंदिर के मैनेजमेंट को बदनाम करना था। ये बातें तब सामने आईं जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी SIT ने, जो इस मामले की जांच कर रही थी, 23 सितंबर को अयोध्या में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (करप्शन) कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इसमें कहा गया है कि राम मंदिर के लिए मिले दान का गबन कैश-गिनने की प्रक्रिया के दौरान हुआ और इसमें लोगों का एक ऐसा नेटवर्क शामिल था, जिन्होंने कथित तौर पर चोरी किए गए फंड को हटाया, छिपाया और बांटा। चार्जशीट में जिन गवाहों के नाम हैं, उनमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और कंस्ट्रक्शन इंचार्ज गोपाल राव शामिल हैं। चार्जशीट में आठ आरोपियों के नाम हैं -- अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव -- ये सभी अभी न्यायिक हिरासत में हैं। आलोक कुमार ने आगे कहा, “इस जांच ने कई विवादों को खत्म कर दिया है। ट्रस्टियों, ट्रस्ट के महासचिव, हिंदू अभियान, विश्व हिंदू परिषद, संघ, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र और मंदिर के मैनेजमेंट को बदनाम करने की सभी साजिशें नाकाम हो गई हैं और खत्म हो गई हैं।” आलोक कुमार ने जांच के नतीजों पर संतोष जताया और कहा कि राम मंदिर के लिए काम करने वाले या उसके ट्रस्ट से जुड़े लोगों के खिलाफ कोई गलत काम साबित नहीं हुआ है। VHP नेता ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों के मुताबिक SIT का पुनर्गठन किया था ताकि उसमें एक फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल किया जा सके, और अब चढ़ावे की कथित चोरी की जांच पूरी हो चुकी है, जिसमें दोषियों की पहचान कर ली गई है। आलोक कुमार ने कहा, "हमें उम्मीद है कि अब इस मुद्दे पर राजनीति बंद हो जाएगी। 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के दौरान राम मंदिर के मुद्दे का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। सच सामने आ चुका है। सभी को इसे स्वीकार करना चाहिए और शोर-शराबा व विवाद खत्म होना चाहिए।" उन्होंने अदालत से कार्यवाही में तेज़ी लाने की भी अपील की ताकि दोषी पाए जाने वालों को बिना देरी के सज़ा मिल सके। उन्होंने कहा, "सुनवाई रोज़ाना होनी चाहिए ताकि जिन लोगों ने राम मंदिर के फ़ंड के साथ गड़बड़ी करने की हिम्मत की, उन्हें जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सज़ा मिल सके।"
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