सीतापुर में सियार का आतंक, 5 साल की बच्ची समेत 6 लोगों पर हमला
सीतापुर के गोंदलामऊ क्षेत्र में सियार के हमलों से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। सियार ने पांच साल की बच्ची समेत छह लोगों को घायल कर दिया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है, जबकि ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ निगरानी कर रहे हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | सीतापुर | 03 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के गोंदलामऊ क्षेत्र में सियार के लगातार हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। सियार ने पांच साल की बच्ची समेत छह लोगों को अपना निशाना बनाया है। हमले में सभी लोगों के हाथ-पैर में चोटें आई हैं। इसके अलावा सियार द्वारा गाय और कुत्तों के झुंड पर भी हमला किए जाने की बात सामने आई है।ग्रामीणों के मुताबिक, सियार सुबह के समय खेतों और गांव के आसपास घूम रहा है और अचानक लोगों पर हमला कर रहा है। लगातार हो रही घटनाओं के कारण ग्रामीण अकेले खेतों की ओर जाने से डर रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी परिवारों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण अब लाठी-डंडों के साथ समूह बनाकर गांव में निगरानी कर रहे हैं।
पांच साल की बच्ची पर अचानक किया हमला
गोंदलामऊ क्षेत्र के निमंतापुर गांव की रहने वाली विमलेश पाल की पांच वर्षीय बेटी आकांक्षा गुरुवार सुबह करीब छह बजे दुकान की ओर जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में सियार ने अचानक बच्ची पर हमला कर दिया। सियार के हमले में बच्ची घायल हो गई और उसकी चीख सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।ग्रामीणों ने शोर मचाकर सियार को वहां से भगाया और बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। घटना के बाद गांव में डर का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह के समय गांव और खेतों के आसपास जंगली जानवरों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। ऐसे में बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने में परिवार डर रहे हैं।
पांच अन्य ग्रामीणों को भी बनाया निशाना
बच्ची पर हमले के बाद सियार ने इलाके के अन्य ग्रामीणों पर भी हमला किया। इनमें निमतापुर निवासी 32 वर्षीय अनिल कुमार, उदयीपुर पूर्वी के मजरा महमदा निवासी 17 वर्षीय शिवम, बेहड़ा निवासी 40 वर्षीय हरद्वारी शामिल हैं। इनके अलावा अवधपुर पूर्वी निवासी 40 वर्षीय राकेश और उदयीपुर पूर्वी निवासी 35 वर्षीय मीरा पर भी सियार ने हमला किया।बताया गया कि ये सभी लोग सुबह के समय खेतों की ओर गए थे। इसी दौरान सियार ने अचानक उन पर हमला कर दिया। लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया, जिसके बाद सियार वहां से भाग गया। हमले में सभी लोगों के हाथ और पैरों में चोटें आने की जानकारी सामने आई है।
गाय और कुत्तों पर भी किया हमला
ग्रामीणों का कहना है कि सियार केवल इंसानों को ही निशाना नहीं बना रहा है, बल्कि गांव के आसपास मौजूद पशुओं पर भी हमला कर रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, सियार ने गाय और कुत्तों के झुंड पर भी हमला किया है। इससे गांव के लोगों में जंगली जानवर को लेकर और अधिक डर पैदा हो गया है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि सियार को जल्द नहीं पकड़ा गया तो आगे भी इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं। खासतौर पर छोटे बच्चों और खेतों में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।
वन विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर लिया जायजा
सियार के हमलों की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम गांव पहुंची और मौके का जायजा लिया। टीम ने ग्रामीणों से घटना के संबंध में जानकारी ली और इलाके की स्थिति का निरीक्षण किया। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से सियार को पकड़ने और गांव में निगरानी बढ़ाने की मांग की।वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों से खेतों और सुनसान स्थानों पर अकेले न जाने के लिए कहा गया है। ग्रामीणों को विशेष रूप से सुबह और शाम के समय सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
लाठी-डंडों के साथ गांव में पहरा दे रहे ग्रामीण
लगातार हो रहे हमलों के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। गांव के लोग अब लाठी-डंडों के साथ समूह बनाकर निगरानी कर रहे हैं। परिवारों ने बच्चों को भी अकेले बाहर जाने और खेलने से रोक दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सियार को पकड़ नहीं लिया जाता, तब तक बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जाएगी।ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग की टीम लगातार इलाके में निगरानी करे और सियार को पकड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवर के खुले घूमने से गांव के लोगों में लगातार भय बना हुआ है।
मुख्य बिंदु
- सीतापुर के गोंदलामऊ क्षेत्र में सियार का आतंक।
- पांच साल की बच्ची समेत छह लोगों पर हमला।
- सभी घायलों के हाथ-पैर में चोट आने की जानकारी।
- सियार ने गाय और कुत्तों पर भी हमला किया।
- वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
- ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ गांव में निगरानी कर रहे हैं।
- बच्चों को अकेले बाहर जाने से रोका जा रहा है।
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