सीजेपी नेताओं के राजनीति में आने पर क्या बोले सोनम वांगचुक
सीजेपी के संस्थापक सदस्यों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर सोनम वांगचुक ने कहा कि उनके राजनीति में आने की इच्छा हो सकती है और इसमें कोई बुराई नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि सामाजिक मंच का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के एजेंडे के लिए नहीं होना चाहिए।
दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 30 अगस्त 2026
सीजेपी के संस्थापक सदस्यों के भविष्य में राजनीति में आने की चर्चाओं के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि संगठन के संस्थापक सदस्यों के भीतर राजनीतिक महत्वाकांक्षा हो सकती है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। वांगचुक ने यह बात एक बातचीत के दौरान कही।सोनम वांगचुक ने सीजेपी के संस्थापक सदस्य सौरव दास, अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इन लोगों को काफी करीब से देखा है। उनके आकलन के अनुसार इन लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं निश्चित रूप से हो सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा होने का मतलब यह नहीं है कि संगठन के वर्तमान अभियान का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के हित में किया जाना चाहिए।
‘सीजेपी के संस्थापक कोई संत नहीं हैं’
सोनम वांगचुक ने कहा कि सीजेपी के संस्थापक सदस्यों को ऐसा नहीं माना जाना चाहिए कि वे राजनीति से पूरी तरह दूर रहने वाले संत हैं। उनके अनुसार, हर व्यक्ति के अपने राजनीतिक विचार और भविष्य को लेकर महत्वाकांक्षाएं हो सकती हैं। उन्होंने माना कि इन सदस्यों के भीतर भी राजनीति में जाने की इच्छा हो सकती है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत आकलन है। वांगचुक ने कहा कि संस्थापक सदस्यों ने स्वयं उनसे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बारे में कोई बात नहीं कही है। उन्होंने अपने अनुभव और उनके साथ काम करने के आधार पर यह राय व्यक्त की है।
राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखना गलत नहीं
वांगचुक ने राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि राजनीति में आने की इच्छा रखना अपने आप में गलत नहीं है। उनका मानना है कि देश में अधिक से अधिक युवा लोगों को राजनीति में आगे आना चाहिए। युवा यदि मौजूदा राजनीतिक दलों से जुड़ते हैं या अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाते हैं, तो इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता है।उन्होंने कहा कि राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ना जरूरी है। उनके अनुसार, युवा नेतृत्व व्यवस्था में नई सोच और नए विचार ला सकता है। हालांकि किसी भी सामाजिक आंदोलन या मंच का इस्तेमाल किसी खास राजनीतिक दल के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए।
अभिजीत दिपके के राजनीतिक अतीत पर भी बोले
सोनम वांगचुक ने अभिजीत दिपके को लेकर होने वाली आलोचनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वह छात्र आंदोलन से जुड़े थे, तब कुछ आलोचकों ने उन्हें बताया था कि अभिजीत दिपके पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। वांगचुक ने कहा कि उनके लिए यह कोई बड़ी चिंता की बात नहीं थी।उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का अतीत में किसी राजनीतिक दल के साथ काम करना अपने आप में गलत नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि वर्तमान में वह किस उद्देश्य के लिए किसी आंदोलन या मंच से जुड़ा हुआ है। वांगचुक ने इसी आधार पर दिपके के साथ काम करना जारी रखा।
दो महीने तक चले आंदोलन का किया जिक्र
वांगचुक ने बताया कि अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका ने उनके साथ मिलकर करीब दो महीने तक चले आंदोलन में काम किया था। इस आंदोलन में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग उठाई गई थी। इस दौरान तीनों संस्थापक सदस्यों की भूमिका को उन्होंने करीब से देखा।उन्होंने कहा कि भविष्य में इन लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हो सकती हैं। लेकिन फिलहाल यह जरूरी है कि जिस मंच से वे जुड़े हैं, उसका इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के हित में न किया जाए। आंदोलन की स्वतंत्रता और उसके उद्देश्य को बनाए रखना उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
‘मंच का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडे के लिए न हो’
सोनम वांगचुक ने साफ कहा कि यदि सीजेपी के संस्थापक सदस्य भविष्य में राजनीति में जाना चाहते हैं, तो इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन जब तक वे किसी सामाजिक या जन आंदोलन का हिस्सा हैं, तब तक उस मंच की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। किसी राजनीतिक दल के प्रचार या एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए आंदोलन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि संगठन के सदस्य फिलहाल इस बात पर कायम हैं। वांगचुक के बयान से साफ है कि वह व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा और किसी आंदोलन के राजनीतिक इस्तेमाल के बीच अंतर मानते हैं। उनके अनुसार दोनों चीजों को एक जैसा नहीं समझा जाना चाहिए।
महत्वपूर्ण बिंदु
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सोनम वांगचुक ने सीजेपी के संस्थापक सदस्यों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर प्रतिक्रिया दी।
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उन्होंने कहा कि संस्थापक सदस्यों के भीतर राजनीति में आने की इच्छा हो सकती है।
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वांगचुक के अनुसार राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखना अपने आप में गलत नहीं है।
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उन्होंने सौरव दास, अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका का जिक्र किया।
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उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का पहले किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होना गलत नहीं है।
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वांगचुक ने युवा लोगों की राजनीति में भागीदारी बढ़ाने की बात कही।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक मंच का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के एजेंडे के लिए नहीं होना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि भविष्य में संस्थापक सदस्य राजनीति में आ सकते हैं, लेकिन फिलहाल आंदोलन की स्वतंत्रता जरूरी है।
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