तेज बारिश से रॉकेट्री ट्रायल टला, कल होगा शुभारंभ:कुशीनगर के पिपराघाट में होना था कार्यक्रम, 76 टीमों के बच्चों ने किया रिव्यू
कुशीनगर में किताबों में अंतरिक्ष विज्ञान पढ़ने वाले बच्चों को अपनी बनाई तकनीक को आसमान में उड़ते देखने का इंतजार करना पड़ा। बीती रात हुई तेज बारिश के कारण पिपराघाट में आयोजन स्थल पर कार्यक्रम नहीं हो सका। इससे देशभर से आईं 76 टीमों के बच्चे मायूस हो गए। हालांकि आयोजकों ने कार्यक्रम को पूरी तरह रोका नहीं। सभी टीमों को गौरीश्रीराम स्थित जगदीश पब्लिक स्कूल में रखा गया है, जहां वैज्ञानिक बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं और उनके तैयार मॉडलों की समीक्षा कर रहे हैं। देवरिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद शशांक मणि की पहल पर श्री नारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन (एसएसडीएफ), इन-स्पेस और इसरो की ओर से इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप आयोजित किया जा रहा है। प्रतियोगिता 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक होनी है। इसमें मॉडल रॉकेट और कैनसैट लॉन्च किए जाने हैं। आयोजकों के मुताबिक, मौसम ने साथ दिया तो 1 नवंबर को निर्धारित स्थान पर कार्यक्रम शुरू होगा। 76 टीमों के बच्चे ले रहे हिस्सा प्रतियोगिता में देशभर की 76 टीमें शामिल हैं। विद्यार्थी अपने बनाए मॉडल रॉकेट और छोटे उपग्रह लेकर पहुंचे हैं। इसका मकसद बच्चों को अंतरिक्ष तकनीक की केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें खुद तकनीक विकसित करने और उसका परीक्षण करने का मौका देना है। एक किलोमीटर तक पेलोड ले जाएगा रॉकेट मॉडल रॉकेट्री में विद्यार्थियों को ऐसा रॉकेट तैयार करना है, जो करीब एक किलोमीटर की ऊंचाई तक एक किलोग्राम वजन ले जा सके। इसमें रॉकेट की उड़ान स्थिर रखने, पेलोड को सुरक्षित अलग करने और उसकी रिकवरी जैसी तकनीकी क्षमताओं को परखा जाएगा। ड्रोन से लॉन्च होंगे छोटे उपग्रह प्रतियोगिता में कैनसैट भी शामिल हैं। इनके जरिए विद्यार्थी छोटे उपग्रह में इस्तेमाल होने वाली प्रणालियों का मॉडल तैयार करते हैं। इस बार कैनसैट को ड्रोन की मदद से लॉन्च किया जाएगा। इससे बच्चों को उपग्रह की तकनीक और उसके काम करने के तरीके को समझने का मौका मिलेगा। बारिश से बदला कार्यक्रम, स्कूल में प्रशिक्षण बीती रात हुई तेज बारिश के कारण पिपराघाट स्थित आयोजन स्थल पर कार्यक्रम नहीं हो सका। इसके बाद आयोजकों ने सभी टीमों को जगदीश पब्लिक स्कूल में प्रशिक्षण और मॉडल की समीक्षा के लिए रखा है। प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को भौतिकी, गणित, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार का व्यावहारिक ज्ञान देने के साथ टीम में काम करने और तकनीकी समस्याओं का हल खोजने का अनुभव भी दिया जा रहा है।
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